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भाजपा-हजकां गठबंधन नही उतरा लोगों के गले..

By   /  August 2, 2012  /  1 Comment

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-अनिल लाम्बा||

भाजपा और हजकां के बीच गठबंधन हुए अरसा बीतने के बाद भी अभी तक यह गठबंधन लोगों के गले नही उतर पाया। भाजपा की विश्वसनीयता भी मतदाताओं की नजर में अच्छी साबित नही हो रही है। भाजपा का इतिहास रहा है कि भाजपा ने पहले हविपा के साथ धोखा किया। उसके बाद इनैलों के साथ भी धोखा किया। वहीं पर हजकां ने पिछले सालों में बसपा के साथ गठबंधन किया, लेकिन बाद में उसकी हवा निकल गई और बसपा और हजकां का मेल-जोल ज्यादा नही चल पाया। भाजपा और हजकां के बीच अभी भी विश्वास की कमी बनी हुई है। राजनैतिक विश्लेशकों के अनुसार यह गठबंधन अभी परिपक नही हुआ है। इस गठबंधन को अभी कई और परीक्षाएं देनी होंगी। हजकां के जन्म के बाद जो भी घटनाक्रम हुए उसने हजकां के नेतृत्व की परिपक्वता पर सवाल खड़े किए। यही कारण रहा कि विधानसभा चुनावों में 6 विधायक जीतने के बाद भी कुलदीप बिश्राई अकेले खड़े रह गए बाकी पांच कांग्रेस में चले गए। हजकां और भाजपा के बीच अभी कार्यकत्र्ताओं के स्तर पर विश्वास की कमी बनी हुई है। हरियाणा में भाजपा तभी ताकतवर बनकर नही उभर पाई। भाजपा विधानसभा चुनावों में भी मजबूत विपक्ष की भूमिका नही निभा पार्ई। यदि इतिहास देखे तो भाजपा शुरू से ही जब हविपा के साथ गठबंधन किया तो 10 का आंकड़ा पूरा नही कर पाई। इनैलों के साथ गठबंधन के दौर में भी भाजपा कमजोर रही। इसके बाद चुनावों में भाजपा 5 सीट भी नही ले पाई। आज भी हालात यह है कि भाजपा पिछले विधानसभा चुनावों में सोनीपत सीट पर केवल राजीव जैन की व्यक्तिगत लोकप्रियता के कारण ही जीती। यहाँ पर भी भाजपा का फायदा नही मिला। भाजपा ने हरियाणा में कभी संगठन स्तर पर मजबूती का काम नही किया। भाजपा में अनुशासन की सबसे बड़ी कमी रही। केडरवेस पार्टी होने के बाद भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण में जमीनी नेताओं को महत्व नही मिला। भाजपा में यह बात जरूर रही कि भाजपा के हरियाणा के जो प्रभारी रहे वह आगे चलकर मुख्यमंत्री जरुर बने। इनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी का नाम प्रमुख तौर पर माना जाता है। भाजपा एक समय में मजबूत पार्टी के रुप में मंगलसैन के नेतृत्व में उभरी थी, लेकिन बाद में यह पार्टी मजबूत नही हो पाई। राष्ट्रीय नेतृत्व में भी हरियाणा में भाजपा को मजबूत बनाने की तरफ ज्यादा ध्यान नही दिया। वहीं पर प्रदेश नेतृत्व में जो लोग  बैठे  है वह भी कार्यकत्र्ताओं के साथ न्याय नही कर पाए। आज भी भाजपा और हजकां के हाथ तो मिले हैं किन्तु दिल नहीं मिले ये अक्सर देखने में आया है क़ि हजकां का कार्यकर्ता तो जनसभाओं में बड़-चढ़ कर भाग लेता है किन्तु भाजपा के कार्यकर्ता जनसभाओं में पहुंचना तो दूर क़ी बात घर से भी बाहर आना पसंद नहीं करते |

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Anup sheoran says:

    Jb Bhajan Lal C.M. tha tb ki bat h. Ek aadmi Behal se loharu cort me kisi kam se gya. Tb usse 200 rs. ki risvat mangi gai. Wo aadmi C.M. ke samne pes hua to us gareeb kishan ko jawab mila,”tu yahan tak aaya h, tujhe pareshani hui h or tera kiraya-bhada bhi kharch hua h. Isse to achchha tha ki tum us officer ko hi 200 rs. de deta, tera kam vahi pe ho jata.” Jab gaon me logon ko pta laga to bechare kishan ka majak bnaya or gramino ne C.M. ka nam ‘Modiya’ rakh diya. Or ek taraf Ch. Devilal ji the jo din-rat kishano ke bare me sochte rahte the or jaato ki sabse mahan hasti the.
    Ab aap hi batao janta kis khoon pr vishvash kare.
    Mera vishwash “I.N.L.D.”…….

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