/दबंगों ने काटा दलित युवक का हाथ!

दबंगों ने काटा दलित युवक का हाथ!

करनाल, (अनिल लाम्बा) : प्रदेश में दलितों पर अत्याचार लगातार बढ़ता जा रहा है। कुटेल में बीते दिनों वाल्मीकि समुदाय के एक युवक का हाथ दबंग लोगों ने काट दिया। उसे अभी तक न्याय नही मिला। वह अस्पताल में उपचार करवा रहा है। न तो कोई राजनैतिक नेता उसका हाल-चाल जानने पहुंचा और न ही वाल्मीकि समुदाय के नाम पर राजनीति करने वाले लोग उसका पता लेने के लिए पहुंचे। जबकि इस जिले में दलितों के नाम पर राजनीति करने वालों की कमी नही है। पिछले दिनों कुटेल गांव में रामफल नामक वाल्मीकि समुदाय के एक युवक की दंबग लोगों ने बाजू काट दी। इस युवक का दोष इतना था कि उसने दबंगो के अत्याचार का विरोध किया। उसने अपनी शिकायत में 8 लोगों को नामजद किया। जबकि पुलिस ने इस मामले को आपसी झगड़े का रूप दे दिया। वाल्मीकि समुदाय के लोगों का कहना है कि उनके साथ न्याय नही हो रहा है। इस गांव में वाल्मीकि समुदाय पर दबंगों द्वारा अत्याचार किए जा रहे है। इस मौके पर एक बैठक का भी आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय वाल्मीकि आदि धर्म समाज के प्रदेशाध्यक्ष अनिल टांक मुख्य तौर पर मौजूद थे। उन्होने कहा कि वाल्मीकि समुदाय पर अत्याचार बर्दाश्त नही किए जाऐंगें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में दलितो पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे है। कांग्रेस में जो वाल्मीकि समुदाय के नेता है वह अपने समुदाय का भला करने में विफल साबित हो रहे है। उन्होनें बताया कि बुधवार को रामफल पर दबंग लोगों ने तलवार से हमला बोल दिया था और उसमें उसका हाथ काट दिया। यह घटना शर्मनांक है। प्रशासन अभी तक केवल 4 लोगों को ही गिरफ्तार कर पाया है जबकि 4 लोग अभी भी बाहर खुलेआम घूम रहे है। उन्होनें कहा कि अभी भी इस समुदाय पर प्रभावशाली लोग दमन कर रहे है। यह एक चिंताजनक पहलू है। इस मौके पर जिले सिंह, रामफल, राजेश पहलवान, दलबीर, राजू, रमेश, प्रकाश, नफे सिंह, बलबीर, रोहताश, राममेहर, राजेंद्र, मोना, संतोष, फूलों, सुनीता, राममोहन सिंह मौजूद थे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.