/अपना घर, करनाल मामले में संचालक तथा संचालिका गिरफ्तार

अपना घर, करनाल मामले में संचालक तथा संचालिका गिरफ्तार

करनाल, (अनिल लाम्बा) : मीडिया दरबार पर अपना घर, करनाल का मामला सुर्खियों में आने के बाद करनाल प्रशासन में हडकम्प मच गया है. पुलिस ने अपना घर के संचालक तथा एक संचालिका को गिरफ्तार कर तफ्तीश शुरू कर दी है. इसी मामले में आज डी.एस.पी. मौके पर पहुंचे. उन्होनें कई महत्वपूर्ण फाईलों को अपने कब्जे में लिया. करनाल में पिछले सालों में भी इस तरह का मामला सामने आया था. उसके बाद उसके संचालक को क्लीन चिट मिल गई थी.

बाद में इस सबंध में कुछ लड़कियों द्वारा अपना घर योजना संचालक के खिलाफ  शिकायत करने के बाद भी इस मामले में प्रशासन ने कोई खास तवज्जों नहीं दी मगर जैसे ही मीडिया दरबार ने इस मामले को उठाया तो मामले ने तूल पकड़ लिया. अपना घर में रह रही तीनों लड़कियों के आरोप बाद यहां पर भी यौन शोषण का मामला सामने आया. करनाल में अपना घर के नाम से अनाथ आश्रम चला रहे संचालक को तीन लड़कियों की शिकायत पर पुलिस ने कल गिरफ्तार कर लिया. रोहतक में अपना घर योजना के मामले में सरकार की फजीहत के बाद अब प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है. बताया जा रहा है कि करनाल में सरकारी सहायता को कबाडऩे के नाम पर कई समाजसेवी संस्थाए चल रही है जो कागजों में गतिविधियां चला रही है.

इस खुलासे के बाद लोगों की नींद हराम है. गत रात अपना घर मामले में अपना घर के सह संचालक को कथित तौर पर हिरासत में लिये जाने के बाद उनके समर्थक और परिचित भड़क गए. रात को इन लोगों ने सैशन रोड पर हंगामा किया और अपना घर के सह संचालक को रिहा करने की मांग की. हंगामा बढ़ते देख लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें शांत कराने की कोशिश की.

बताया जाता है कि पुलिस ने सह संचालक को रिहा कर दिया है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो रही है. उल्लेखनीय है कि अपना घर की संचालिका के खिलाफ रात को ही पुलिस ने मारपीट और दुर्व्यवहार  करने का मामला दर्ज कर लिया था. करनाल में अपना घर का मामला साल भर पहले ही सुर्खियों में आ गया था लेकिन प्रशासन की ढील के चलते ये मामला दबा रहा. प्रशासन ने तीन लड़कियों द्वारा यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाने के बाद लड़कियों को तो शिफ्ट कर दिया लेकिन उस समय आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. हैरानी की बात तो यह रही कि साल भर तक अपना घर को मान्यता न मिलने के बाद भी अपना घर बिना रजिस्ट्रेशन के बिना रोक-टोक के एक छोटे से कमरे में चलता रहा. इस कमरे में 30 के करीब लड़कियां रहती थी लेकिन अब इसमें 11 लड़कियां रह रही थी. मामला उजागर होने के बाद प्रशासन हरकत में तो आया लेकिन कार्रवाई नाम मात्र ही की. लड़कियों को शिफ्ट कराया और कल जा कर मेडिकल कराया गया.  यहां उल्लेखनीय है कि पहले प्रशासन इस मामले में लीपापोती का प्रयास कर रहा था, लेकिन मीडिया दरबार ने जैसे ही इस मामले को उठाया तो ऊपर से दवाब आने के बाद अब सरकारी मशीनरी सक्रिय हो उठी है. इसके बाद प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर रहा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.