/प्रियंका गाँधी बनवाएंगी राहुल को PM

प्रियंका गाँधी बनवाएंगी राहुल को PM

यदि दैनिक भास्कर की एक खबर को सही माना जाये तो  अगले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को दुबारा सत्ता में लाने के लिए प्रियंका गाँधी पूर्णकालिक राजनीति में उतर आयेंगीं. भास्कर का मानना है कि दो हज़ार चौदह में कांग्रेस हर हाल में राहुल गाँधी को देश का प्रधान मंत्री बनाना चाहती है. मगर देश के माहौल को देखते हुए राजनीति के ग्लैमर और सोनिया गाँधी की सक्रियता की कमी प्रियंका पूरी करेंगी और उत्तर प्रदेश के गाँधी परिवार के परम्परागत लोकसभा क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याएं लिए साप्ताहिक दरबार लगायेगीं. गौरतलब है कि कांग्रेसियों को प्रियंका गाँधी में उनकी दादी स्व. इंदिरा गाँधी की झलक दिखाई पड़ती है. ऐसे में प्रियंका गाँधी का पूर्णकालिक राजनीति में आना हताश कांग्रेस में संजीवनी फूंकने का काम करेगा. भास्कर का मानना है कि नरेन्द्र मोदी द्वारा कांग्रेस को ‘बुढिया पार्टी’ कहने पर प्रियंका ने कांग्रेस को ‘गुडिया पार्टी’ बताते हुए मोदी की बात का करार जवाब दिया गया था. जिसे राजनीतिक समीक्षकों ने काफी सराहा था. और क्या क्या कहती है भास्कर की रिपोर्ट:

कांग्रेस के सांसद और महासचिव राहुल गांधी की पार्टी में भूमिका ज़्यादा बड़ी होगी या नहीं यह अब भी साफ नहीं है. लेकिन राहुल की बहन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी के राजनीति में ज़्यादा सक्रिय होने के संकेत साफ हो गए हैं. प्रियंका गांधी हर बुधवार को राय बरेली के लोगों से मुलाकात करेंगी. प्रियंका अपनी मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र के लोगों से दिल्ली में मुलाकात करेंगी. यह ऐलान टीम अन्‍ना के राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा के अगले ही दिन किया गया है.
माना जा रहा है कि सोनिया गांधी अपने संसदीय क्षेत्र में लोगों को ज़्यादा समय नहीं दे पा रही हैं. इसी की भरपाई करने के लिए प्रियंका को रायबरेली के लोगों से मिलने और उनका दुख दर्द समझने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि, प्रियंका ने रायबरेली और अमेठी में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2012 के दौरान काफी समय बिताया था और पार्टी का जमकर प्रचार किया था. लेकिन कांग्रेस को रायबरेली, अमेठी और सुल्तानपुर में एक सीट को छोड़कर सब पर हार का मुंह देखना पड़ा था. प्रियंका ने 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस के लिए अमेठी, रायबरेली में प्रचार किया था. इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, ‘यह थोड़ा भ्रम में डालने वाली बात है. काफी राहुल गांधी की बात (राजनीति में और अधिक सक्रिय होने की) आती है तो कभी प्रियंका की बात. अगर मीडिया कांग्रेस से स्पष्टीकरण ले तो फिर हम लोग अपनी राय दे सकते हैं.’
प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली के दौरे पर अपने बच्चों को भी ले जाती रही हैं. यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान जब एक जनसभा में वे अपनी बेटी और बेटे को ले गईं तो यह मीडिया की सुर्खियां बना था. राजनीतिक विश्लेषक पुष्पेश पंत ने प्रियंका द्वारा अपने बच्चों को जनसभा में ले जाने पर कहा था, ‘बच्चों को रैलियों में लेकर जाने से नेता की छवि पर बेशक फ़र्क पड़ता है. उदाहरण के तौर पर देखें तो प्रियंका जनता में ये छवि बना रही हैं कि वो अपने छोटे बच्चों और सारे ऐशो-आराम छोड़ कर जनता के बीच आई हैं उनकी सेवा के लिए.’ हालांकि, विधानसभा चुनाव के दौरान प्रियंका के रायबरेली और अमेठी जाने पर विपक्षी पार्टियों ने प्रियंका गांधी को ‘बरसाती मेंढक’ कहा था. विपक्षियों ने आरोप लगाया था कि वे केवल चुनाव के समय ही प्रदेश में आती हैं.
राजनीति के जानकार सोनिया गांधी के इस फैसले को बहुत अहम मान रहे हैं. मशहूर पत्रकार और कांग्रेस पार्टी पर 24, अकबर रोड नाम की किताब के लेखक रशीद किदवई ने इस बारे में कहा, ‘मैं इस फैसले को भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखता हूं. यह अहम कदम है.’ इससे पहले राहुल गांधी ने भी कह दिया है कि वह बड़ी भूमिका के लिए तैयार हैं. माना जा रहा है कि उन्‍हें सरकार के बजाय पार्टी में बड़ी भूमिका दी जाएगी और संगठन महासचिव बनाया जाएगा. कांग्रेस सूत्रों का मानना है कि राहुल को संगठन महासचिव बनाए जाने का उद्देश्य उन्हें सरकार और संगठन, दोनों का बेहतर अनुभव दिलवाना है. उनका प्रोफाइल इतना महत्वपूर्ण बनाया जा रहा है कि उन्हें न केवल पार्टी, बल्कि सरकार चलाने संबंधी गतिविधियों से भी करीब से जोड़ा जा सके. राहुल गांधी सेलेक्ट ग्रुप के सदस्य भी बन सकते हैं. इस जिम्मेदारी को संभालकर राहुल गांधी नेतृत्व से दूर रहने की आलोचना से भी बच जाएंगे. संगठन महासचिव के तौर पर उन्हें अपना नेतृत्व एजेंडा तय करना पड़ेगा और पार्टी के वरिष्ठ साथियों को दिशा निर्देशित भी करना होगा.
कांग्रेस के लिए 2014 का लोकसभा चुनाव ‘करो या मरो’ की स्थिति जैसा है. बिहार और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं है. कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगता है कि प्रियंका इस स्थिति से निजात दिला सकती हैं. वह संगठन को दरकिनार कर सीधे जनता से संवाद स्थापित करने में पूरी तरह से सक्षम हैं. सोनिया को यकीन है कि मजबूत संगठन न होने के नुक़सान की भरपाई प्रियंका अपनी छवि और योग्यता से कर सकेंगी.
प्रियंका ने राजनीति से जुड़ाव की शुरुआत भी रायबरेली से ही की थी. 2004 में वह पहली बार रायबरेली में ही चुनाव प्रचार में उतरी थीं. वहां कांग्रेस पार्टी की तरफ से गांधी परिवार के क़रीबी सतीश शर्मा और भाजपा के उम्मीदवार अरुण नेहरू थे. नेहरू किसी जमाने में राजीव गांधी के क़रीबी थे. लेकिन प्रियंका ने अपने पहले ही भाषण में विरोधियों के होश उड़ा दिए. रायबरेली की पहली मीटिंग में प्रियंका ने कहा, ‘मुझे आपसे एक शिक़ायत है. मेरे पिता के मंत्रिमंडल में रहते हुए जिसने गद्दारी की, भाई की पीठ में छुरा मारा, जवाब दीजिए, ऐसे आदमी को आपने यहां घुसने कैसे दिया? उनकी यहां आने की हिम्मत कैसे हुई?’ प्रियंका ने यह भी कहा था, ‘यहां आने से पहले मैंने अपनी मां से बात की थी. मां ने कहा कि किसी की बुराई मत करना. मगर मैं जवान हूं, दिल की बात आपसे न कहूं तो किससे कहूं?’ प्रियंका जहां जातीं, वहां इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को याद करना नहीं भूलतीं. वह कहतीं, ‘मुझे यहां आकर गर्व महसूस हो रहा है. यह इंदिरा जी की कर्मभूमि है. वह मेरी दादी ही नहीं थीं, सारी जनता की मां भी थीं.’ प्रियंका ने चुनाव से तीन दिन पहले आकर ऐसा माहौल बना दिया कि जहां नेहरू की जीत पक्‍की लग रही थी, वहां सतीश शर्मा जीत गए.
प्रियंका गांधी की कुंडली में ग्रहों की ऐसी स्थिति है जो इस बात का संकेत देती है कि वे राजनीति में सक्रिय रहेंगी. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार लग्न भाव का स्वामी जब पंचम भाव में हो तो व्यक्ति राजनीति में सक्रिय होता है. प्रियंका गांधी की जन्म कुंडली में भी ग्रहों की ऐसी ही स्थिति है. प्रियंका गांधी की दादी इंदिरा गांधी की कुंडली में वृश्चिक और चन्द्र ने उन्हें दृढ और सबल बनाया. ठीक इसी प्रकार की ग्रह स्थिति प्रियंका गांधी की कुंडली में मौजूद है. कुंडली में ग्रहों की इस स्थिति ने प्रियंका गांधी को भी इंदिरा गांधी की तरह खुद पर यकीन रखने वाला और जिद्दी बनाता है. प्रियंका गांधी की कुण्डली में केन्द्रभाव में शनि स्थित है शुक्र का परिवर्तन योग है. ग्रहों की इस स्थिति के कारण इन्हें जनता से अपार स्नेह मिलने का संकेत है. भाग्य भाव का चन्द्रमा लग्न में स्थित है. लग्न का स्वामी मंगल पंचम भाव में मौजूद है जबकि पंचम भाव का स्वामी गुरू द्वितीय भाव में स्थित होकर राजनीति के क्षेत्र में श्रेष्ठ स्थिति का निर्माण कर रहा है. कुंडली में बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है. भाग्य भाव में कर्क राशि में केतु की स्थिति से भी उत्तमता का संकेत है. इनकी कुंडली में तृतीय भाव में बैठा राहु और नवम भाव में स्थित केतु के कारण राजनीति में प्रियंका का सितारा तेजी से चमकने वाला है.
कांग्रेस में लगता है कि 2014 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना तय कर लिया गया है. अगर उन्‍हें पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बनाना है तो संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ कई तरह के राजनीतिक दांव खेलने पड़ेंगे. राहुल गांधी के लिए माहौल बनाना पड़ेगा और ऐसी स्थिति पैदा करनी होगी कि देश की जनता को लगे कि कांग्रेस का कोई विकल्प नहीं है. 2009 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को ऐतिहासिक सफलता मिली. कई राज्यों में कांग्रेस ने इतनी सीटें जीत लीं कि वैसी जीत दोहराना लगभग नामुमकिन होगा. 2009 में कांग्रेस ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर की लगभग सारी सीटें जीत लीं. आंध्र प्रदेश में 42 में से 33 सीटें जीतकर कांग्रेस ने इतिहास रच दिया. असम में 7, गुजरात में 11, केरल में 13, मध्य प्रदेश में 12, पंजाब में 8 और राजस्थान में 20 सीटें जीत कर भी कांग्रेस ने तमाम राजनीतिक विश्लेषकों को अचंभे में डाल दिया. उत्तर प्रदेश में पार्टी 21 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही और महाराष्ट्र में उसे 17 सीटें मिलीं. 2014 में ऐसी जीत दोहराना सोनिया गांधी के लिए नामुमकिन सी चुनौती है. इससे निपटने के लिए उनकी रणनीति यह है कि जिन राज्यों में 2009 के चुनाव में कम सीटें आई हैं, वहां पार्टी को मजबूत किया जाए, ताकि 2014 के आम चुनाव में 203 (2009 के चुनाव में मिली सीटें) से ज्‍यादा सांसद जीत सकें. ऐसे में प्रियंका के राजनीति में थोड़ा सक्रिय होने के फैसले को अहम शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है.
लोगों को प्रियंका में इंदिरा गांधी की झलक दिखाई देती है. नरेंद्र मोदी ने जब कहा था कि कांग्रेस ‘बुढ़िया’ पार्टी है तो प्रियंका का जवाब कि कांग्रेस ‘गुड़िया’ पार्टी है, लोगों को काफी सटीक और अच्‍छा लगा था. प्रियंका ने बड़ी समझदारी के साथ अपनी मार्केटिंग भी की है. उन्होंने सबसे पहले खुद को दादी इंदिरा गांधी जैसा बताया. उन्होंने कहा कि उनकी नाक इंदिरा गांधी जैसी है और फिर अपनी साड़ियों के बारे में बताया कि वे तो उनकी दादी की ही हैं. वह इंदिरा की तरह ही साड़ी बांधती हैं और बाल भी उन्‍हीं की तरह रखती हैं. प्रियंका यह संदेश दे चुकी हैं कि वह न केवल बहादुर हैं, बल्कि विपक्ष का सामना भी कर सकती हैं और देश को बेहतर युवा नेतृत्व दे सकती हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.