Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

कई प्रत्‍याशियों के दामन पर पड़े हैं कई गंभीर विवादों के कीचड़

By   /  August 5, 2012  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

 

यूपी संवाददाता समिति के चुनाव में 41 लोग मैदान में

किसी भी पद पर दलित दावेदार नहीं, सर्वाधिक प्रत्‍याशी ब्राह्मण

5 को स्‍क्रूटनी और 6 को वापसी के बाद 12 को होगा मतदान

-कुमार सौवीर||

लखनऊ: बहुप्रतीक्षित उत्‍तर प्रदेश राज्‍य मुख्‍यालय मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति के चुनाव में अब करीब 15 फीसदी सदस्‍य चुनाव लड़ रहे हैं। समिति की 15 सदस्‍यीय कार्यकारिणी के लिए 41 लोग मैदान में हैं। मजेदार बात तो यह है कि इनमें से कई ने तो एकाधिक पदों के लिए नामांकन कराया है। पांच अगस्‍त को नामांकन पत्रों की स्‍क्रूटनी और नामांकन वापस करने के बाद सीधे 12 तारीख को मतदान होगा। वोटों की गणना के बाद चुनाव का परिणाम उसी दिन घोषित कर दिया जाएगा।

समिति की कार्य‍कारिणी में अध्यक्ष पद के लिए एक, उपाध्‍यक्ष के लिए दो, सचिव के लिए एक, संयुक्‍त सचिव के लिए दो, कोषाध्‍यक्ष के लिए अलावा कार्यकारिणी सदस्‍य पद के लिए आठ पद के लिए चुनाव होना है। अब तक मिली खबरों के मुताबिक किसी भी दलित ने अपना नाम किसी भी सदस्‍य के लिए दावा नहीं किया है। केवल कोषाध्‍यक्ष और कार्यकारिणी सदस्‍य के पद के लिए एक-एक मुस्लिम उम्‍मीदवार का परचा दाखिल कराया गया है। करीब पचास फीसदी ब्राह्मणों ने समिति के पदों विभिन्‍न के लिए नामांकन कराया है। इसके बाद सर्वाधिक नामांकन कायस्‍थ सदस्‍यों से हुए हैं। मौजूदा अध्‍यक्ष हिसाम सिद्दीकी इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। दिलचस्‍प बात तो यह है कि इस चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र पेश करने वाले कई लोगों का दामन पर कई गंभीर विवादों के छींटें पड़ चुके हैं।

चुनाव संचालन के लिए किशोर निगम, दीपक गिडवाणी और राजकुमार सिंह को नामित किया गया है। नामांकन पत्र दायर करने की आज अंतिम तारीख थी।

चुनाव अधिकारी राजकुमार सिंह ने एक बातचीत में बताया कि अध्‍यक्ष पद के लिए चार, सचिव के लिए तीन, कोषाध्‍यक्ष के लिए चार, संयुक्‍त सचिव के लिए पांच के साथ ही साथ कार्यकारिणी सदस्‍य के लिए 18 लोगों ने अब तक अपना नामांकन पत्र पेश किया है। राजकुमार सिंह के अनुसार मनमोहन, प्रभात त्रिपाठी, शिवशंकर गोस्‍वामी और हेमंत तिवारी का पर्चा अध्‍यक्ष पद के लिए मिला है। सचिव पद के लिए प्रांशू मिश्र, सिद्धार्थ कलहंस, और अरविंद शुक्‍ल चुनाव लडेंगे, जबकि उपाध्‍यक्ष पद के लिए सतवीर सिंह, देवकीनंदन मिश्र, रूद्रदत्‍त घिल्डियाल, नरेंद्र कुमार श्रीवास्‍तव, विजय उपाध्‍याय, जितेंद्र तिवारी और जितेंद्र शुक्‍ल चुनाव लडेंगे। कोषाध्‍यक्ष पद पर नासिर खां, नीरज श्रीवास्‍तव, केसी विश्‍नोई और दिलीप सिन्‍हा का परचा दाखिल हुआ है। संयुक्‍त सचिव पद के लिए अविनाश चंद्र मिश्र, देवकीनंदन मिश्र, राजेश शुक्‍ल, अजय श्रीवास्‍तव, दिलीप कुमार सिंह चुनाव लडेंगे।

कार्यकारिणी के लिए शरत प्रधान, राजेश शुक्‍ल, श्रीधर अग्निहोत्री, मुदित माथुर, संजय चतुर्वेदी, अशोक मिश्र, तेज बहादुर सिंह, नासिर खां, अमृतांशु मिश्र, अजय श्रीवास्‍तव, विजय कुमार निगम, जुरैर अहमद आजमी, अरूण कुमार त्रिपाठी, दिलीप सिन्‍हा, शेखर श्रीवास्‍तव, हरीश कांडपाल, दिलीप कुमार सिंह और अनिल त्रिपाठी का परचा दाखिल कराया गया है।

नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख खत्‍म होने के बाद अब कई प्रत्‍याशियों ने अपना प्रचार बाकायदा शुरू कर दिया है। इनमें अध्‍यक्ष पद के लिए मनमोहन और प्रभात त्रिपाठी, उपाध्‍यक्ष पद के लिए सतवीर सिंह, विजय उपाध्‍याय, जितेंद्र शुक्‍ल, आरडी घिल्डियाल, सचिव पद के लिए प्रांशु मिश्र, सिद्धार्थ कलहंस, अरविंद शुक्‍ल, संयुक्‍त सचिव के लिए राजेश शुक्‍ल और अविनाश चंद्र मिश्र आदि प्रमुख हैं। लेकिन हैरत की बात  तो यह है कि शेखर श्रीवास्‍तव ने अपने प्रचार के लिए जो ईमेल सभी सदस्‍यों को जारी किया है, इसका विषय है Low & Order meeting- 04-08-2012.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: