/हमार और फोकस टीवी के मीडियाकर्मी वेतन पाने को तरसे..

हमार और फोकस टीवी के मीडियाकर्मी वेतन पाने को तरसे..

लगातार विवादों में बने रहने वाले स्वयंभू राजा और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मतंग सिंह के दुर्दिन ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहे. लम्बे समय से उनके मालिकाना हक वाले टीवी चैनल्स लम्बे समय से आर्थिक तंगी के चलते बंद होने कगार पर हैं. इस भीषण आर्थिक परेशानी के कारण हमार तथा फोकस टीवी के मीडियाकर्मियों और कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिल रहा.

जिसके चलते इन मीडियाकर्मियों और कर्मचारियों के पास आन्दोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा. अब हमार तथा फोकस टीवी में वेतन तथा पीएफ की मांग को लेकर कर्मचारियों ने कुछ दिनों से आंदोलन छेड़ दिया है. कर्मचारी हिसाब किताब क्‍लीयर होने तक फ्लोर छोड़ने को तैयार नहीं हैं. पर प्रबंधन के सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. प्रबंधन ने 11 अगस्‍त की तिथि मामला सुलझाने के लिए तय की है, उससे पहले वे कर्मचारियों की कोई बात सुनने को तैयार नहीं है. इसके बाद हमार-फोकस के कर्मचारी भूख हड़ताल करने की तैयारी कर रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन ने केवल बकाया वेतन देने का आश्‍वासन दिया है जबकि कर्मचारी बकाया वेतन के अलावा पीएफ तथा अन्‍य बकाया देयों की मांग कर रहे हैं. इसको लेकर ही टकराव है. मीडियाकर्मी अब डीएम को आवेदन देकर भूख हड़ताल करने की इजाजत मांगी है. डीएम ने मामले पर विचार करने का आश्‍वासन दिया है. समझा जा रहा है कि भूख हड़ताल की इजाजत मिलते ही कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे.

मीडियाकर्मी पीसीआई अध्‍यक्ष जस्टिस काटजू समेत तमाम संस्‍थानों को पत्र लिखकर अवगत भी करा चुके हैं. आंदोलन करने वालों में पंकज कुमार, दिलीप सिंह, अमल कुमार सिंह, अमर सिंह, बंदना गुप्‍ता, रचना ठाकुर, मनीष मासूम, नवनीत सिंह, राजेश मिश्रा, विकास राज तिवारी, मृत्‍युंजय साधक, राजीव तिवारी, सौरभ उपाध्‍याय, पुनीत पुष्‍कर समेत कई अन्‍य कर्मचारी भी शामिल हैं.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.