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चाँद मोहम्मद की फिजाँ दुनियाँ छोड़ गई..

By   /  August 6, 2012  /  6 Comments

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चंडीगढ़ से सटे मोहाली में अनुराधा बाली उर्फ फिजा मोहम्मद की लाश उनके घर में मिली है. लाश सड़ी हुई थी और काफी बदबू भी आ रही थी. फिजा वहीं महिला हैं जो कि दिग्गज राजनेता स्व. भजन लाल के पुत्र  और हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन उर्फ चांद मोहम्मद से शादी के बाद सुर्खियों में आई थीं.

मोहाली के सेक्टर अड़तालिस में फिजा के घर से उनका शव बरामद किया गया है. फिजा घर में अकेली रहा करती थी और शव सड़ी गली हालत में मिला है जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसकी मौत चार से पांच दिन पहले ही हो चुकी थी.

फिजा के चाचा सतपाल का कहना है कि रविवार को जब वो फिजा के घर पहुंचे तो उसके घर के ताले टूटे हुए मिले.  आज जब वो पुलिस के साथ वहां पहुंचे तो फिजा का शव बिस्तर पर पड़ा हुआ मिला.

फिजा के चाचा का ये भी कहना है कि उन्होंने बिस्तर के पास खून के छींटे भी देखे. अभी तक इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि फिजा की मौत कैसे हुई. फिलहाल मौके पर पुलिस मौजूद है.

उनकी मौत की वजह का फिलहाल पता नहीं चल सका है. सोमवार की सुबह फिजा का शव रहस्यमय परिस्थितियों में बरामद किया गया है. उनके चाचा ने इसकी सूचना पुलिस को दी.

उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

पेशे से वकील अनुराधा बाली उर्फ फिजा उस वक्त सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम और भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन से शादी की थी.

दोनों ने धर्म बदलकर शादी की थी. शादी के बाद नाम बदलकर अनुराधा बाली फिजा मोहम्मद और चंद्रमोहन चांद मोहम्मद बन गए थे. हालांकि दोनों की शादी बीस दिन ही चली. दोनों अलग अलग हो गए और बाद में तलाक भी हो गया.

हरियाणा की पूर्व अस्सिटेंट एडवोकेट जनरल अनुराधा बाली उर्फ फिजा ने दिसंबर 2008 में राज्य के तत्कालीन डिप्टी सीएम चंद्रमोहन से धर्म बदलकर शादी की थी.

साल 2009 में चंद्रमोहन से शादी टूटने के बाद फिजा अवसाद में चली गई थी और उन्हें कथित तौर पर खुदकुशी की भी कोशिश की थी. पिछले दिनों उनका पड़ोसियों से भी झगड़ा हुआ था.

फिजा ने टीवी रियल्टी शो ‘इस जंगल से मुझे बचाओ’ में काम किया था.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

6 Comments

  1. Sanjay Jha says:

    इस कहानी का ऐसा ही अंत होना था, इसकेलिए तो दोसी दोनों ही है , लेकिन सबसे ज्यादा दोसी चन्द्रमोहन है , इन दोनों का नाटक पुरे दुनिया ने टीवी के माध्यम से देखा है.

  2. Gopal Prasad says:

    Please must read and share….

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