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नेत्रहीन बनायेंगे कैलाश खेर का म्यूजिक वीडियो

लोकप्रिय गायक कैलाश खेर का एलबम ‘रंगीले’ जिसे उनकी खुद की म्यूजिक कम्पनी कैलासा रिकॉर्ड्स ने रिलीज़ किया है. कैलाश खेर के इस एलबम “रंगीले” को देश-विदेश में बहुत ही पसंद किया है, उनके चाहने वालों ने. कैलासा रिकॉर्ड्स ने ‘कथागान’ शीर्षक से एक प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिसके तहत उन्होंने अपने प्रशंसकों को ‘रंगीले’ एलबम के तीन गीतों बाबा जी, उजाले बांट लो और कथागान के वीडियो बनाने के लिए आमंत्रित किया. इस प्रतियोगिता का सभी ने गर्म जोशी से स्वागत किया और इसमें शामिल होने ने लिए देश – विदेश के हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया.

 

इस प्रतियोगिता में “ब्लाइंड विध कैमरा” नाम से भी एक प्रविष्टि आयी है.  ‘बीयोंड साईट फाउंडेशन’ के फाउन्डर पार्थो भोमिक कहते हैं कि, “ब्लाइंड विध कैमरा कोई रहस्य की बात नही है यह ऐसे लोगो का समहू हैं जो देख नही सकते लेकिन जो कुछ भी कर गुजरने की तमन्ना रखते हैं. हम भी आम इंसानों की तरह ही हैं हमें बहुत ही खुशी है इस बात कि हमें मौका मिला है अपने खुद को साबित करने का और कुछ कर दिखाने का. संगीत के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने पर हमें बहुत ही गर्व है. इसके अलावा हम लोग  भी ‘रंगीले’ के माध्यम से संगीत के अनगिनत रंग महसूस कर लेगें.”

 

हरीश अय्यर जो कि ईक्यु़ल राईट एक्टिविस्ट हैं, “ पेशेवर कैमरे की बारीकियों के बारे में नेत्रहीन छात्रों को प्रशिक्षित और प्रोजेक्ट के संपादन में छात्रों की मदद भी करते हैं, का कहना है कि, ” शायद पहली ही बार ऐसा होगा कि नेत्रहीन लोगों का समहू किसी वीडियो को शूट करेगा. यह सोच ही अपने आप में प्रेरणा देने के लिए काफी है और सामान्य वर्ग की श्रेणी में नेत्रहीन लोगों का भाग लेना बहुत ही बड़ी बात है.”

नेत्रहीन छात्रों के अलावा  गुरु नानक खालसा कॉलेज के कुछ छात्र भी एक वीडियो बना रहे हैं. ये  छात्र अपनी फुटेज में ‘ब्लाइंड विध कैमरा’ की वीडियो मेकिंग को भी उपयोग में लायेगें . इस प्रतियोगिता के बारे में बात करते हुए १९ वर्षीय छात्र अनुज पालय कहते हैं, “यह प्रतियोगिता मेरे लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा के समान है, मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि वहाँ ना मैं हूँ और ना वो (नेत्रहीन छात्र) वहाँ केवल हम हैं, जीतना  और हारना एक अलग बात है, यह एक अलग ही तरह का अनुभव है. अगर मैं जीता, मैं उनके साथ अपनी जीत को बाटूंगा. ”

कैलासा रिकॉर्ड्स द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता की मिली प्रतिक्रिया और प्यार से अभिभूत कैलाश खेर बहुत ही खुश हैं और उनका कहना है कि, “इस एक संगीत वीडियो के जरिये नई आशाएँ, नये क्षितिज और नए आयाम देखने को मिलेगें. मैं बहुत ही उत्सुक हूँ यह सोच कर कि यह विडियो कैसा होगा.”

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.