/कैसा अपना घर, दामाद की हवस का शिकार बनती बच्चियों का वीडियो बनाती थी जसवंती

कैसा अपना घर, दामाद की हवस का शिकार बनती बच्चियों का वीडियो बनाती थी जसवंती

रोहतक के ‘अपना घर’ बच्चियों के यौन शोषण मामले में सी बी आई ने कोर्ट में सत्ताईस पेज की चार्जशीट पेश कर दी है. चार्जशीट के अनुसार ‘अपना घर’ में जब लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया जाता था तो संचालिका जसवंती देवी व उसकी बेटी सिम्मी अश्लील वीडियो बनाती थी. जसवंती देवी का दामाद जय भगवान व सतीश ही बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाते थे. ये बातें सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में कही हैं. पीड़ित लड़कियों के हल्फनामे को भी इसमें आधार बनाया गया है. चार्जशीट के अनुसार एक लड़की को जब बच्चा हुआ तो ‘अपना घर’ के संचालकों ने 21 हजार रुपए में बच्चा बेच डाला. इसके अलावा जब भी कोई लड़की गर्भवती हुई, उसे दवा देकर गर्भपात करवा दिया जाता था.

 

कोर्ट में पेश चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि अपना घर में रहने वाली लड़कियों को जिस्मफरोशी के धंधे में बुरी से धकेल दिया गया था. अपना घर में तो उनके जिस्म का सौदा किया ही जाता था, साथ ही दिल्ली के रेड लाइट एरिया में भी उन्हें बेचा जाता था. जो लड़की ऐसा करने से इंकार करती थी, उसे गर्म चिमटों से दागा जाता था व अन्य तरह से प्रताड़ना दी जाती थी. चार्जशीट के मुताबिक अपना घर में रह रहे बच्चों को जबरदस्ती चोरी करना सिखाया जाता था. इसके के लिए बच्चों को नंगा करके पीटा जाता था. यही नहीं, बच्चों को नशे का आदी भी बनाया जा रहा था. जो बच्चा नशा नहीं लेता था उसे जूस में मिलाकर पिलाया जाता था. बच्चों से पूछताछ में पता लगा कि जसवंती देवी के दामाद के घर पर लड़कियों को भेजा जाता था और ज्यादातर समय उसके घर पर ही जिस्मफरोशी का धंधा कराया जाता था. लड़कियों को जबरदस्ती शराब भी पिलाई गई. होली के दिन लड़कियों को जबरदस्ती शराब तक पिलाई जाती थी.

जांच एजेंसी ने 27 पेज की चार्जशीट में कई संगीन आरोप लगाए हैं. लड़कियों के नंगी अवस्था में मूवी और फोटो बनाने की बात भी सामने आई है. आरोप पत्र में सीबीआई ने लड़के-लड़कियों को खाना न देने, खेतों में काम करवाने, उनसे मारपीट और जयभगवान द्वारा लड़कियों के साथ बलात्कार के खुलासे किए हैं. अपना घर की पीड़ित लड़कियों ने यह भी बयान दिया है कि उनके मुंह में कपड़ा ठूंस कर उनके साथ दुराचार किया जाता था. गूंगी-बहरी लड़की को भी नहीं बख्शा गया. ये मामले हुए दर्ज बलात्कार, छेड़छाड़, आईटी एक्ट, बाल न्याय अधिनियम, बंधुआ श्रम प्रणाली कानून, आपराधिक धमकी, चोट पहुंचाने, गलत तरीके से कारावास, अवैध अनिवार्य मजदूरी, अपहरण, वेश्यावृत्ति, जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने एसआईटी जांच की लाइन पर ही अपना घर की संचालिका जसवंती देवी के अलावा उसके भाई जसवंत सिंह, बेटी सुषमा, दामाद जय भगवान, ड्राइवर सतीश, आश्रय घर परामर्शदाता वीणा और सतीश की बहन शीला को अपनी चार्जशीट में आरोपी बनाया है. इस मामले के पूर्व जांच अधिकारी भीम सिंह रंगा, दयानंद और हरविंदर सिंह का नाम चार्जशीट में नहीं है. रंगा ने केस प्रॉपर्टी लैपटॉप सहित कुछ अन्य सबूत दयानंद को सौंपे थे. दयानंद ने जसवंती का सिम व फोन उसके रिश्तेदार हरविंदर को दे दिया था.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने 9 मई 2012 की रात अपना घर के नाम से चल रहे अनाथालय में छापा मारा था. यह कार्रवाई यहां से लापता हुई तीन लड़कियों के दिल्ली में पकड़े जाने पर हुई थी. अपना घर संचालिका जसवंती व अन्य के खिलाफ मानव तस्करी, देह व्यापार, शोषण व मारपीट आदि के मामले दर्ज हुए. इस मामले में जिला पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था. एडीजीपी एमएस मान की अगुवाई वाली एसआईटी ने जांच के दौरान पुलिस के सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था. बाद में मामले की जांच सीबीआई को दे दी गई.

चार्जशीट से जमानत के रास्ते भी बंद:सीबीआई ने तय समय सीमा में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर आरोपियों की जमानत के रास्ते बंद कर दिए हैं. हालांकि इस मामले में कोर्ट ने निश्चित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया था. मगर सीबीआई द्वारा देर से जांच शुरू किए जाने से चार्जशीट दाखिल करने में देरी का अंदेशा था. सीबीआई को आरोपियों की रिमांड भी नहीं मिल सकी थी. इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने न्यायिक हिरासत में ही पूछताछ की इजाजत लेकर काम शुरू कर दिया. खासबात यह है कि इस मामले में पीड़ित लड़कियों के हल्फनामे ही चार्जशीट का मुख्य आधार है.

‘अपना घर’ पर छापे के दौरान लड़कियों व महिलाओं ने संस्था की संचालिका जसवंती व अन्य पर यौन शोषण, शारीरिक शोषण, मारपीट व बच्चों की खरीद फरोख्त का आरोप लगाया था. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जसवंती, उसके दामाद जयभगवान, बेटी सिम्मी, ममेरे भाई सतीश, ममेरी बहन शीला, भाई जसवंत व काउंसलर वीना को केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया था.

अपना घर में एक स्पेशल ब्यूटी पार्लर भी पाया जा चुका है. जिसमें जिले की कई महिला अधिकारी और वीआईपी फ्री में मसाज का मजा लेती थीं. यहां की लड़कियों से जबरन यह काम कराया जाता था. संचालिका जसवंती से पूछताछ की तो उसने कहा कि लड़कियों को काम सिखाने के लिए यह पार्लर खोला गया था. पुलिस जानकारी जुटा रही है कि यहां कौन-कौन सी महिलाएं आती थीं.

इस बीच, करनाल के ‘अपना घर’ की संचालिका मोनिका व वहां काम करने वाले मानवदास के खिलाफ सदर थाना पुलिस ने साजिश रचने व बलात्‍कार का केस दर्ज कर लिया है. दो दिन पहले बच्चों से मारपीट के मामले में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था. एसएचओ श्री दत्त शर्मा ने बताया कि पुलिस बुधवार को तीनों लड़कियों का मेडिकल करवाएगी और उनके बयान कलमबद्ध करेगी. नाबालिग लड़कियों के पिता ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष उसकी तीनों बेटियां ‘अपना घर’ में रहती थीं. आरोप है कि मोनिका ने साजिशन तीनों लड़कियों को मानव दास के घर भेज दिया जहां मानव दास ने उनके साथ दुष्कर्म किया. उसने पिछले वर्ष भी यह शिकायत पुलिस व जिला प्रशासन को की थी. पुलिस की जांच हुई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.