/बेख़ौफ़ था कांडा, अब बजेगा बैंड..

बेख़ौफ़ था कांडा, अब बजेगा बैंड..

हरियाणा के पूर्व गृह राज्य मंत्री और हरियाणा न्यूज़ चैनल के मालिक गोपाल गोयल कांडा की

गोपाल कांडा का पुतला फूंकते प्रदर्शनकारी

असलियत जानने के लिए सोनिया गाँधी ने कांडा की पूरी रिपोर्ट मांगी है. उधर गोपाल कांडा ने दिल्ली पुलिस के सामने पेश होने के लिए तीन दिन का समय माँगा था मगर दिल्ली पुलिस ने कांडा को किसी भी तरह की मोहलत देने से इंकार कर दिया जिसके चलते आज कांडा को हर हाल में दिल्ली पुलिस के सामने पेश होना होगा. दिल्ली पुलिस को अपनी प्राथमिक जाँच में गीतिका शर्मा की मौत से कुछ समय पहले धमकियां मिलने के सबूत मिले हैं.

दूसरी तरफ हरियाणा के पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा ने दावा किया है कि एयर होस्टेस गीतिका शर्मा को उन्होंने एमबीए करने के लिए 7.50 लाख रुपये दिए थे (गोया इससे उनका अपराध कम हो जाता हो). गोपाल कांडा गीतिका के परिवार के साथ ‘पारिवारिक रिश्ते’ की बात पहले ही कुबूल चुके हैं.

इस बीच, गीतिका की मौत का सच जानने के लिए दिल्ली पुलिस ने गोपाल कांडा को आज पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है. गोपाल कांडा के निजी सचिव देवकांत शर्मा ने इस बात की पुष्टि की है कि कांडा आज पुलिस के सामने पेश होंगे.

दिल्ली पुलिस के उत्तर-पश्चिम जिले के डीसीपी पी. करुणाकरण बुधवार सुबह गीतिका के घर पहुंचे. बीजेपी के दिल्ली प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष भी गीतिका के घर पहुंचे.

डीसीपी पी. करुणाकरण ने बताया कि मंगलवार को पुलिस ने एमडीएलआर कंपनी के लीगल

गोपाल कांडा के विरुद प्रदर्शन

एडवाइजर अंकित आहलूवालिया और कंपनी की एमडी अरुणा चड्ढा से पूछताछ की. दोनों से गीतिका और कांडा के बीच के रिश्तों और पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका के संबंध में पूछताछ की गई. इस पूछताछ के बाद ही गोपाल कांडा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में धमकाने की धारा (506) भी जोड़ी गई है. दिल्ली पुलिस के अफसर ने कहा, ‘गीतिका के परिवार वाले यह दावा करते रहे हैं कि आहलूवालिया ने गीतिका को खुदकुशी से कुछ घंटे पहले फोन किया था. प्राथमिक जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे गीतिका को बीते कुछ दिनों से धमकी मिलने का पता चला है.’ अरुणा का नाम सुसाइड नोट में ही सामने आया था, जबकि गीतिका के मोबाइल फोन, लैपटॉप, आई-पैड व अन्य निजी सामानों की जांच के बाद अंकित अहलूवालिया की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी. दिल्ली पुलिस ने हरियाणा पुलिस को कांडा की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है.

गीतिका के घर वालों ने गोपाल कांडा से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा मांग की है. पुलिस ने गीतिका के परिवारवालों को सुरक्षा मुहैया करा दी है. दिल्ली पुलिस के दो जवान 24 घंटे गीतिका के घर के बाहर सुरक्षा में तैनात रहेंगे. पुलिस के मुताबिक गोपाल कांडा से जान का खतरा होने की शिकायत पर पुलिस ने यह निर्णय लिया है.

गीतिका की मौत पर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम भी गीतिका के घर पहुंची. तीन सदस्यों वाली इस टीम ने गीतिका के परिवारवालों से पूछताछ की. महिला आयोग की टीम इस मामले में जल्द ही कांडा से भी पूछताछ करेगी. यह मामला सियासी मोड़ लेता नज़र आ रहा है. हरियाणा में विपक्षी पार्टियां धरने-प्रदर्शन कर सरकार को घेरने के प्रयास में हैं, वहीं सत्ता पक्ष के नेता चुप्पी साधे हुए हैं. गोपाल कांडा समेत कई मंत्रियों व विधायकों के अनैतिक कार्यों में संलिप्त रहने का आरोप लगाते हुए भाजपा-हजकां गठबंधन ने राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया को ज्ञापन दिया. प्रतिनिधिमंडल ने सरकार को बर्खास्त कर राज्य में नए सिरे से चुनाव कराने और गोपाल कांडा को गिरफ्तार कर उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की.

इस प्रकरण पर हो-हल्ले के बाद कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने भी रिपोर्ट मांग ली है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान को संपूर्ण रिपोर्ट आज बुधवार को दे दी जा जाएगी.

जानकारी के अनुसार हरियाणा जनहित कांग्रेस के सांसद कुलदीप बिश्नोई एवं राज्य सभा में सांसद रणबीर सिंह प्रजापत इस मामले को संसद में भी उठाने की तैयारी कर रहे हैं. भाजपा ने भी दिल्ली में आलाकमान को यह मामला उठाने के लिए पत्र दिया है. भाजपा राष्ट्रीय सचिव कैप्टन अभिमन्यु का कहना है कि लोकसभा में कांग्रेस सरकार के ऐसे कारनामे देश के सामने आने चाहिए. चरित्र पतन की सीमाएं लांघी जा चुकी हैं, सिर्फ मंत्री पद छीनने से ही काम नहीं चलता. हरियाणा में कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने कहा है, ‘मुख्यमंत्री ने त्याग पत्र स्वीकार कर लिया है. ये निर्दलीय विधायक हैं. कांग्रेस ने अपना काम कर दिया है, अब कानून अपना काम करेगा. अगर कांडा दोषी हैं तो उन्हें जरूर सजा मिलेगी.’

इसके अलावा हरियाणा भर में गोपाल कांडा के खिलाफ धरने प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और कई शहरों से गोपाल गोयल कांडा के पुतले फूंके जाने की सूचनाएं मिल रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.