/अदालत में बम, चाय की चुस्कियां लेती पुलिस…

अदालत में बम, चाय की चुस्कियां लेती पुलिस…

अखिलेश राज में पुलिस के हौंसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि बाहुबलियों और अपराधियों के सामने फिसड्डी साबित होने वाली पुलिस जहाँ आम नागरिकों पर जुल्म बरपाने में नहीं चूक रही वहीँ पत्रकारों पर भी अपना दमन चक्र  आजमाने में सभी रिकॉर्ड तोड़ने पर आमादा है. ताज़ा मामला है लखनऊ कोर्ट में बम मिलने की खबर खोजने पत्रकारों को पुलिस ने पकड़ा, मौज करते पुलिसवाले जब पत्रकारों पर भड़के, माफीनामा लिखवाया….

-कुमार सौवीर||

लखनऊ हाईकोर्ट में चार बम की फोटो खींचने के जुर्म में आज पुलिसवालों ने पत्रकारों को दबोच लिया। यह पत्रकार उस वारदात और वहां ढाबे पर बेफिक्र होकर चाय की चुस्कियां लेते पुलिसवालों की फोटो खींच रहे थे। घंटों तक परेशान करने और गालियां देने के बाद पुलिसवालों ने उनसे माफीनाम लिखवाकर ही रिहा किया। लेकिन इसी बीच इन पत्रकारों के कैमरे की रील निकाल दी गयी।

यह घटना है इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की। आज दोपहर करीब 11 बजे हाईकोर्ट के पास क्रूड बम मिलने की खबर मिली। यह खबर मिलते ही वायस आफ मूवमेंट नामक एक दैनिक अखबार के संवाददाता अनुराग तिवारी और फोटोग्राफर आशीष पांडेय आनन-फानन अदालत परिसर पहुंचे। पता चला कि हाईकोर्ट के नम्‍बर छह गेट के पास चार अनगढ बम मिले हैं। अनुराग तिवारी ने इस खबर का कवरेज किया और आशीष पांडेय ने फोटो खींची। इसी बीच आशीष ने अदालत और उसके पास की गतिविधियों पर नजर डाली। देखा कि मामले की छानबीन के बजाय वहां चाय के एक ढाबे पर कई पुलिसवाले चाय की चुस्कियां ले रहे हैं। आशीष ने इस नजारे को अपने कैमरे में कैद कर लिया। अचानक ही कैमरे देखकर यह पुलिसवाले चौकन्‍ने हुए। वे इन पत्रकारों की ओर लपके और उन्‍हें दबोच लिया।

अनुराग तिवारी के अनुसार इसी खुन्‍नस पर इन पुलिसवालों ने पत्रकारों के साथ अभद्रता शुरू कर दी। गालियां देते हुए इन पत्रकारों को अपराधी की तरह अदालत में घुमाया गया। यह तब हुआ जबकि इन पत्रकारों ने अपना परिचय दिया था, लेकिन पुलिसवालों का पारा शांत नहीं हुआ। हालांकि इसी बीच कई लोगों ने हस्‍तक्षेप किया और बाद में हाईकोर्ट के रजिस्‍ट्रार के सामने पेश किया। अनुराग तिवारी का कहना है कि आफिस में पुलिसवालों ने दावा किया कि यह लोग पत्रकार नहीं हैं, बल्कि संदिग्‍ध हालत में अदालत परिसर में फोटो खींच कर भाग रहे थे। हालांकि इन पत्रकारों ने पुलिसवालों के इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि पुलिसवाले उल्‍टे इन लोगों को झूठे आरोप लगाते हुए अपमानित कर रहे थे।

बहरहाल, अनुराग तिवारी का आरोप है कि पुलिसवालों ने इन पत्रकारों के कैमरे से रील निकाल कर उसे एक्‍सपोज करा दिया है। अनुराग के अनुसार इसी बीच पुलिसवालों ने इन दोनों से एक बाकायदा एक माफीनामा भी जबरिया लिखवाया है।

आखिरी खबर मिलने तक इन पत्रकारों को अदालत से रिहा किया जा रहा है। अनुराग तिवारी का कहना है कि बाहर निकलने के बाद ही वे पूरी जानकारी दे पायेंगे। हालांकि इस घटना पर पुलिस का पक्ष नहीं लिया जा सका है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.