/पाकिस्तान में हिन्दू लड़की के अगुवा होने के बाद खौफ बढ़ा..

पाकिस्तान में हिन्दू लड़की के अगुवा होने के बाद खौफ बढ़ा..

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 14 साल की एक हिंदू लड़की के अगवा होने के बाद से वहां रह रहे अल्पसंख्यक परिवार पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं.

पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के अध्यक्ष जेठानंद डूंगर मल कोहिस्तानी ने बताया कि सिंध प्रांत के जैकोबाबाद से मंगलवार को नाबालिग लड़की मनीषा कुमारी को अगवा कर लिया गया जिसकी वजह से हिंदुओं में डर पैदा हो गया है. सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री कईम अली शाह ने इस मामले की जांच के लिए प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहन लाल को जैकोबाबाद भेजा है.

कोहिस्तानी ने कहा कि जैकोबाबाद से लड़की के अपहरण और पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों से 11 हिंदू व्यापारियों के अगवा होने से हिंदुओं में डर पैदा हो गया है. कानून-व्यवस्था बिगड़ती जा रही है. बिगड़ती स्थिति से न केवल हिंदू बल्कि मुसलमान भी प्रभावित हुए हैं. वहीं, कुछ टीवी चैनलों ने दावा किया है कि जैकोबाबाद के कुछ हिंदू परिवारों ने धर्मांतरण, फिरौती और किडनैपिंग के डर से भारत जाने का निर्णय किया है लेकिन कोहिस्तानी और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के सदस्य अमरनाथ मोटुमल का कहना है कि इन दावों में कोई सचाई नहीं है.
हिन्दू पंचायत के प्रमुख बाबू महेश लखानी ने दावा किया है कि कई हिंदू परिवारों ने भारत जाकर बसने का फैसला किया है और अन्य परिवार भी इस पर विचार कर रहे हैं. पाकिस्तान में हिंदू असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. कुछ हिंदू नेताओं ने यहां तक दावा किया कि 60 परिवार भारत जा चुके हैं और इस हफ्ते कुछ और परिवार वाघा सीमा होते हुए भारत जाएंगे. हालांकि पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग का कहना है कि वाघा सीमा पर हिंदुओं की बड़ी संख्या में आने-जाने की कोई सूचना नहीं है. कोहिस्तानी का कहना है कि खराब कानून-व्यवस्था के कारण हिंदुओं को दबाव का सामना करना पड़ रहा है लेकिन भाग कर कहीं दूसरी जगह जाने की कोई खबर नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘सिंधु नदी की भूमि हमारी मातृभूमि है. कुछ लोग जरूर तीर्थ यात्रा या निजी यात्राओं पर भारत जा रहे होंगे.’ हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस अपराधियों द्वारा फिरौती और किडनैपिंग के लिए निशाना बनाए जा रहे हिंदुओं की मदद नहीं करती है. वहीं, अमरनाथ मोटुमल ने कहा कि उन्होंने खुद मामले की जांच की है और उन्हें वहां से लोगों के भागने का कोई सबूत नहीं मिला है.

उन्होंने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सिंध के सुदूर क्षेत्रों में हिंदू समुदाय के लोगों पर दबाव नहीं बनाया जा रहा है लेकिन, उन खबरों की पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस वजह से वे भाग कर भारत जा रहे हैं. मैं खुद लोगों के पलायन करने की बात की जांच करने गया था पर इसका कोई सबूत नहीं मिला. ऐसे कुछ परिवार हो सकते हैं जिनका एक सदस्य पहले भारत चला गया हो और बाद में उसने परिवार के अन्य लोगों को भी वहां बुलाया हो. ये परिवार दूसरी समस्याओं के कारण भाग रहे हैं लेकिन इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है.’

उन्होंने कट्टरपंथी धार्मिक समूहों पर आरोप लगाया है कि वे सिंध में हिंदू समुदाय के लोगों पर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव बना रहे हैं. पिछले दो सालों की रिपोर्ट के अनुसार, अपराधियों और उग्रवादियों का निशाना बनने के बाद बलुचिस्तान और सिंध से दर्जनों हिंदू परिवार भागकर भारत चले गए हैं. हिंदू व्यापारियों को अगवा करने के कई मामले और महिलाओं के जबरन धर्मांतरण के भी कई केस सामने आए हैं.

(नभाटा)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.