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दक्षिण मुंबई में आसाम दंगे के विरोध में उपद्रव, तीन ओबी वैन जलाई

By   /  August 11, 2012  /  9 Comments

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आसाम दंगे में बांग्लादेशियों के पक्ष में मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने के कारण कई गाड़ियों को आग लगा दी गई. शनिवार दोपहर ढाई बजे के करीब 50 हजार लोग मुंबई के आजाद मैदान में धरना-प्रदर्शन करने पहुंचे थे. ये लोग असम में हो रही हिंसा का विरोध कर रहे थे. भीड़ ने मैदान से बाहर निकलकर पहले रास्ता रोकने की कोशिश की और उसके बाद कई गाड़ियों को आग लगा दी.  भीड़ को तितर-वितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े हैं और लाठीचार्ज किया है. मुंबई पुलिस के साथ-साथ केंद्रिय बलों को भी बुलाया गया है. पुलिस ने फॉयरिंग भी की है। भीड़ ने मीडिया पर भी हमला किया गया है। तीन ओबी वैन जला दी गई हैं और दो फोटोग्रॉफर गंभीर रूप से घायल हुए हैं. कुछ रिपोर्टर भी घायल हैं. फिलहाल मुंबई के आजाद मैदान के आसपास के इलाकों में हालात तनावपू्र्ण बने हुए हैं.

मुंबई पुलिस कमीश्नर देवेंद्र भाटी ने कहा,  ‘कुछ शरारती तत्वों ने हिंसा शुरु की लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अभी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में हैं और चिंता करने की कोई बात नहीं है. मैं मीडिया के माध्यम से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं.’

वहीं महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री आर आर पाटिल ने पूरी घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. मुंबई के आजाद मैदान में हुई घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में सभी थानों को अलर्ट कर दिया गया था. यहाँ सबसे बड़ा सवाल है कि पचास हज़ार  प्रदर्शनकारियों की भीड़ एकत्र होने के बावजूद सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं किये गए और ना ही दंगा विरोधी बल बुलाया गया.
सपा नेता अबू आज़मी का कहना है कि असम और बर्मा में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था. कुछ नौजवान आजाद मैदान में घुंसने की कोशिश कर रहे थे जिन्हें पुलिस ने रोका जिसके बाद माहौल हिंसक हो गया. बर्मा और कोकराझार में हुए कत्लेआम की तस्वीरें इंटरनेट पर आने के बाद लोगों में गुस्सा था. लोगों में मीडिया के प्रति भी गुस्सा था जो गलत रूप में भड़का. जो हुआ वो गलत हुआ. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने कहा, ‘कई तरह की अफवाहों भी उठ रही हैं. सबसे पहली जरूरत अफवाहों पर काबू करने और शांति बरतने की है. सभी धर्मों के लोगों को शांति बरतनी चाहिए.’हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसूगैस के गोले भी छोड़े है. फिलहाल हालात पूरी तरह काबू में हैं और मुंबई पुलिस इस मामले में कुछ दंगाइयों को गिरफ्तार कर लिया है.
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

9 Comments

  1. Sir je ye to sabhi dango ko Musalman aur hindu se upper uthakar dekhna chahye

  2. यही तो हमें कह रहे है की भारत में जो अपने आपको असाम्प्रदायिक कहते है किसी भी दंगा होने पर उन्हें 1 तरफ़ा नहीं बोलना चाहिए कि मुस्लिम को परेशानी हो तो खूब हल्ला करते है जब हिन्दू परेशान हो तो कहा दुबक जाते है पता नहीं. बर्मा में मुस्लिमो के साथ कुछ हुआ तो इतने आवाज उठता है लेकिन पाकिस्तान में जब हिन्दू के साथ जो हो रहा है उसे वेलोग नज़र अंदाज करते ऐसा क्यों? ये कैसी असाम्प्रदायिकता कि चादर है.

  3. Musalman aur hindu se upar uth kar dekhiye.Hazaro admi mara ja raha hai to koi comment nahi

  4. Media bikau hai.30000 musalman Barma me mara gaya lekin chor media ne aik bhi khabar nahi di.

  5. sanjai dubey says:

    साले थोड़ी सी कटी भी नहीं की मिर्ची लग गयी.

  6. jab hindu mar rahe the tub koi agitation nahi hua ab musalmano ke marne par sare secular politicians ek ho gaye hai……

  7. देश में देखिये मुसलमानों का उपद्रव, अभी कहा है राजनेता जो अपने आपको असाम्प्रदायिक मानते है.

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