Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

वसुंधरा के नेतृत्व में चुनाव लडऩे पर असमंजस…

By   /  August 15, 2012  /  8 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-तेजवानी गिरधर||

राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा के नेतृत्व में घोषित रूप से लड़े जाने पर अभी असमंजस बना हुआ है। भाजपा का संघनिष्ठ धड़ा हालांकि भाजपा की सरकार बनने पर श्रीमती वसुंधरा को ही मुख्यमंत्री बनाने पर सहमत है, मगर उन्हें पहले से मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट न करने पर जोर डाल रहा है। इस संबंध में उसका तर्क ये है कि जिस प्रकार गुजरात में मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी के कहीं न कहीं पार्टी लाइन से ऊपर होने के कारण वहां हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं, ठीक उसी प्रकार की स्थिति राजस्थान में भी होती जा रही है। ऐसे में बेहतर ये होगा कि उन्हें पहले से मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित न किया जाए, बाद में भले ही भाजपा को बहुमत मिलने पर उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाए।
इसी के साथ एक महत्वपूर्ण जानकारी ये भी है कि संघ का धड़ा वसुंधरा को फ्रीहैंड दिए जाने के पक्ष में भी नहीं है। उसका कहना है कि ऐसा करने पर वे अपने समानांतर धड़े को निपटाने की कोशिश कर सकती हैं, जैसा कि वे पहले भी कर चुकी हैं। कई पुराने नेता हाशिये पर धकेल दिए गए। और यदि ऐसा हुआ तो चुनाव में पार्टी को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। असल में उनका इशारा इस संभावना की ओर है, जिसके तहत यह माना जा रहा है कि चुनाव से पहले वसुंधरा राजे को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा जा सकता है। संघ का यह धड़ा मौजूदा अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी को हटाए जाने के पक्ष में भी नहीं है। चतुर्वेदी को हटाए जाने को वह अपनी हार के रूप में देख रहा है।
वस्तुत: श्रीमती राजे को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए दबाव बनाने वालों का कहना है कि अगर पार्टी को चुनाव में जीत हासिल करनी है तो वसुंधरा को टिकट वितरण अपने हिसाब से करने की छूट देनी होगी। इसके पीछे उनका तर्क ये है कि यदि प्रदेश अध्यक्ष कोई और होता है तो वह टिकट वितरण के समय रोड़ा अटका सकता है, जिसकी वजह से गलत प्रत्याशियों को टिकट मिल जाने की आशंका रहेगी। अपनी इस बात पर जोर डालने के लिए वे पिछले चुनाव का जिक्र करते हैं कि तब प्रदेश अध्यक्ष ओम माथुर के कुछ टिकटों के लिए अड़ जाने के कारण ऐसे प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारने पड़े, जो कि हार गए और भाजपा जीती हुई बाजी हार गई। हालांकि वे इस बात पर सहमत हैं कि संघ लॉबी को भी पूरी तवज्जो दी जानी चाहिए और उनके सुझाये हुए प्रत्याशियों को भी टिकट दिए जाएं, मगर कमान केवल वसुंधरा के हाथ में दी जाए। वसुंधरा खेमा इस बात पर भी नजर रखे हुए है कि कहीं संघ लॉबी कुछ ज्यादा हावी न हो जाए। अगर ऐसा होता है तो वे पहले की ही तरह फिर से इस्तीफा हस्ताक्षर अभियान जैसी किसी मुहिम की रणनीति अपना सकते हैं।
समझा जाता है कि फिलहाल पार्टी हाई कमान इस बात को लेकर असमंजस में है कि वसुंधरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए अथवा नहीं। इस बात की संभावना भी तलाशी जा रही है कि वसुंधरा विरोधी लॉबी को संतुष्ट करने के लिए किसी ऐसे नेता को प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा जाए, जो कि संघ और वसुंधरा दोनों को स्वीकार्य हो। इस सिलसिले में पूर्व गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया का नाम सामने आ रहा है। हालांकि पिछले दिनों कटारिया की प्रस्तावित मेवाड़ यात्रा को लेकर जो बवाल हुआ, उससे ऐसा प्रतीत हुआ कि वे वसुंधरा को चुनाती देने जा रहे हैं और दोनों के बीच संबंध काफी कटु हो चुके हैं, जबकि वस्तुस्थिति ये है कि वह विवाद केवल मेवाड़ अंचल में व्याप्त धड़ेबाजी की वजह से उत्पन्न हुआ। वहां वर्चस्व को लेकर कटारिया व किरण में जबरस्त खींचतान है और उसी वजह से इतना बड़ा नाटक हो गया। उस झगड़े की जड़ किरण माहेश्वरी थीं। अर्थात वसुंधरा व कटारिया के संबंध उतने कटु नहीं हैं, जितने कि समझे जा रहे हैं। कटारिया के अतिरिक्त पूर्व अध्यक्ष ओम माथुर का नाम भी सामने आ रहा है।
कुल मिला कर ताजा स्थिति ये है कि हाईकमान इस मुद्दे पर और विचार कर लेना चाहता है। विशेष रूप से दिसंबर में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का कार्यकाल बढ़ाए जाने अथवा स्थितियां बदलने की संभावना के बीच राजस्थान के मसले को एक तरफ ही रखने के पक्ष में है। वैसे उसका एक मात्र मकसद राजस्थान पर फिर काबिज होना है। इसके लिए वह दोनों धड़ों के बीच तालमेल बनाए रखने पर ही पूरी ताकत लगाएगा। वजह ये है  कि एक ओर जहां वसुंधरा खेमा ताकतवर होने के कारण आक्रामक है, वहीं संघ के हार्डकोर नेताओं की मंशा ये है कि इस बार येन केन प्रकारेण वसुंधरा को राजस्थान से रुखसत कर दिया जाए। यह स्थिति पार्टी के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है। लब्बोलुआब राजस्थान भाजपा का मसला बेहद नाजुक है और उसे बड़ी सावधानी से निपटाए जाने की कोशिश की जा रही है।


Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

8 Comments

  1. Mahesh says:

    Either writer are a high command of BJP or an authority of BJP appointed by Mr.Gadkari or RSS headquarter Nagpur. How can he decides about Vasundhara Raje aur Gulab Chand Kataria’s politics and what so called high command think about duo leaders and state politics.
    This was a totally presumption by writer,he wrote an items instead of a news story.

    • tejwani girdhar says:

      आपकी इस टिप्पणी से सच झूठ तो नहीं हो जाएगा

      • Mahesh says:

        You know the truth but u can’t realize because u wrote ITEM.

        • tejwani girdhar says:

          मैं आपके कहने से गलत को सही नहीं लिख सकता, कम से कम लेख्क को इतनी तो आजादी दीजिए

  2. Their should not be any problem. May be somebody trying to create a confusion so they can attract some mileage out of it.

  3. shri Lalit sharma says:

    देश के प्रति आप सभी के मन में सैतान पनप गया है इसे इस सैतान को अपने मन से मिटाओ / आज देश में भ्रष्टाचार के मुर्दे उजागर होरहे है देश के हर अपसर और मीडिया ए सब भ्रष्ट होगेय है और देश को कोख्ला कने में कोई कसर नहीं छोड़ा है हमारे देश के मीडिया ने इनका मतलब है राष्ट्र सेवा से इनको तो बस इनकम होना चाहिए प्रचार के पैसे मिलना चाहिए सबसे ज्यदा देश में हिंसा फैलाने वाले है ए जनाब मीडिया और कोई नहीं है / हमारे देश को लूटा ही है मीडिया और कोई नहीं देश के जनता को बरगलाते है ए मीडिया और अंदर फिक्स मीटिंग करते है .

    • tejwani girdhar says:

      आपकी इस टिप्पणी का मेरे इस आइटम से कोई लेना देना नहीं है, आप तो जो मन में आया उसकी उलटी कर रहे हैं, मीडिया को गाली देना आजकल फैशन सा है, आप भी दीजिए, मगर ख्याल रखिये, यही मीडिया सच को भी उजागर करता है

  4. This is not a news items, its look like an Biased editorial (Only presumption).

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: