/कांडा को राजनैतिक रसूख गिरफ्तारी से बचाए हुए हैं या उसकी आर्थिक शक्ति…?

कांडा को राजनैतिक रसूख गिरफ्तारी से बचाए हुए हैं या उसकी आर्थिक शक्ति…?

गीतिका शर्मा खुदकुशी मामले में फरार चल रहे हरियाणा न्यूज़ चैनल और एमडीएलआर एयरलाइंस के मुखिया गोपाल कांडा का ग्यारह दिन बाद भी  कोई पता नहीं चल सका है. दिल्‍ली पुलिस की टीम ने सिरसा स्थित कांडा के घर फिर से छापेमारी शुरू की है. कांडा की तलाश के लिए पुलिस कुछ मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर रही है, इसके आधार पर फिर से छापेमारी की जा रही है. कांडा की तलाश में अब तक 50 जगहों पर छापेमारी हुई और 25 लोगों से पूछताछ की गई है. इससे पहले की गई छापेमारी में कांडा के एक रिश्‍तेदार को हिरासत में भी लिया गया था.

 

गीतिका के भाई अंकित शर्मा ने इस मामले में पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. अंकित ने कहा, ‘पुलिस उस लड़की को गलत बताने की कोशिश कर रही है जो मर गई है. आरोपी, जो कि डरपोक है, दस दिनों से फरार है और पुलिस उसे खोज नहीं सकी है.’
सबसे पहले, 17 साल की गीतिका को 2006 में ही एमडीएलआर एयरलाइंस में 16 हजार रुपए वेतन पर फ्लाइट अटेंडेंट की नौकरी दी. वह एयरलाइंस, जिसकी शुरुआत ही 2007 में हुई. आखिर एक नाबालिग को नौकरी कैसे दे दी गई? वह भी कंपनी शुरू होने से पहले? जब एक साल के अंदर ही गीतिका ने नौकरी छोडऩी चाही तो उसका वेतन बढ़ाकर क्यों रोक लिया गया. सीधे सौ फीसदी से ज्यादा का इनक्रिमेंट दिया, वेतन हो गया 33000. घर-दफ्तर का सफर कंपनी की होंडा अकॉर्ड कार से तय होने लगा. ऐसा क्या ‘असाधारण’ किया था उसने? अगर उसका काम इतना ही अच्छा था तो फिर एक जुलाई 2009 को गीतिका का तबादला होटल में क्यों कर दिया गया? गीतिका को कांडा ने होटल में क्या जिम्मेदारी दी?

गीतिका ने अगस्त 2010 में कांडा की कंपनी छोड़कर अमीरात एयरलाइंस ज्वाइन की. वह भी एमडीएलआर से एनओसी लेकर. फिर कांडा ने अमीरात एयरलाइंस को शिकायत क्यों भिजवाई कि गीतिका के कागजात फर्जी हैं? एक पुलिस इंस्पेक्टर ने भी अमीरात एयरलाइंस को मेल भेजकर गीतिका पर लोन का फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया? उसने यह मेल किसके कहने पर भेजा था? इन शिकायतों पर अमीरात ने गीतिका को निकाल दिया. फिर ऐसा क्या हुआ, जो गीतिका की शिकायत करने वाले कांडा ने उसे दोबारा अपनी कंपनी में नौकरी दे दी, वह भी कई प्रमोशन देते हुए कंपनी का निदेशक बनाकर? 66000 रुपए वेतन तय हुआ और कंपनी की ओर से बीएमडब्ल्यू कार दी गई.

क्या गीतिका की शिक्षा और प्रशिक्षण गजब का था या उसका अनुभव? उसे कांडा के एक शिक्षण संस्थान में प्रेसिडेंट का ओहदा क्यों दिया गया? वह ग्रुप की इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी एकेजी इन्फ्रा की वाइस प्रेसिडेंट भी बना दी गईं. क्या कारण था कि कांडा आये दिन सिंगापुर या दुबई जाते थे और हर बार गीतिका उनके साथ होती थी? कांडा व उनके कर्मचारी गीतिका से किन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाना चाहते थे? बतौर निदेशक गीतिका के नियुक्ति पत्र में डाली गई यह शर्त भी अजीब थी कि रोज काम खत्म करने के बाद वह कांडा से मिले बिना घर नहीं जाएगी? इसके बावजूद कांडा ने गीतिका को 400 एसएमएस और रोजाना दसियों काल क्यों किए?
कांडा को गिरफ्तार करने में दिल्ली पुलिस जिस तरह का रवैया अख्तियार किए हुए है, उससे कई सवाल खड़े हो गए हैं. आखिर वह उतनी सक्रिय क्यों नहीं है, जितना बड़ा मामला है? क्या पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव है? या फिर कांडा की आर्थिक स्थिति उसे बचाने में सहायक साबित हो रही है? पुलिस के पास उक्त सवालों के कोई आधारपूर्ण जवाब भी नहीं हैं. यह पहला मौका नहीं है, जब पुलिस ने इस तरह का रुख अख्तियार किया हो. हाईप्रोफाइल मामलों में पुलिस ज्यादातर ऐसा ही करती है.
गत पांच अगस्त की सुबह जब गीतिका शर्मा की आत्महत्या की सूचना पुलिस को मिली तो भारत नगर थाना पुलिस को ही मामले की जांच दी गई. पुलिस को मौके से दो सुसाइड नोट मिले, जिसके कुछ देर बाद ही पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर आईपीसी की धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया. उसी दिन गोपाल कांडा से मीडियाकर्मियों की बात हुई, लेकिन पुलिस ने उससे पूछताछ करने या फिर उसे हिरासत में लेने की कोई कोशिश नहीं की.
जैसे-जैसे मीडिया के माध्यम से यह मामला गर्म होने लगा तो पुलिस पर भी दबाव बड़ा. इसके बाद भी पुलिस ने कांडा को पूछताछ के लिए न बुलाते हुए उसकी सहयोगी अरुणा चड्ढा को बुलाया और उसे गिरफ्तार कर लिया. तीन दिन बाद आठ अगस्त को सुबह नौ बजे कांडा के गुड़गांव में होने की जानकारी मिली, पर उसके बाद से कुछ अता-पता नहीं है. यानी पुलिस की नाक के नीचे से वह फरार हो गया और पुलिस सिर्फ उसकी तलाश में टीमें भेजने की बातें करती रही.
डीसीपी पी. करुणाकरन का कहना है कि कांडा के खिलाफ कार्रवाई करने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है और न ही कोई विलंब किया गया है. कांडा हरियाणा के पूर्व गृह राज्य मंत्री हैं और एक एमएलए भी हैं, इसलिए पुलिस ने पहले उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत एकत्र किए ताकि अदालत के समक्ष किसी तरह की कोई फजीहत न हो. दूसरा, कांडा एक जन प्रतिनिधि हैं, इसलिए यह आशंका नहीं जताई गई थी कि वह फरार हो जाएगा. हम उनकी तलाश कर रहे हैं. हमारी कोशिश उन्‍हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करना है.
भारत नगर थाना पुलिस ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि पहले दिन से ही पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. सुसाइड नोट और गीतिका के परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर जांच की गई और पर्याप्त सबूत जुटाने की हर संभव कोशिश की गई है. इस मामले में अरुणा चड्ढा को गिरफ्तार किया जा चुका है और कांडा की तलाश की जा रही है. जांच अधिकारी का कहना है कि हमने कभी कांडा के प्रति कोई लापरवाही नहीं बरती है और हम उसकी सरगर्मी से तलाश कर रहे हैं. उसके खिलाफ कई महत्वपूर्ण सबूत भी एकत्र कर लिए गए हैं, जिससे उसका गिरफ्तारी से बच पाना मुश्किल है.
इस बीच, खबर है कि कांडा पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कस सकता है. सूत्रों के मुताबिक सिरसा से विधायक कांडा के खिलाफ फेमा के उल्‍लंघन का केस दर्ज किया जा सकता है. एमडीएलआर एयरलाइंस के मालिक रहे कांडा ने अपने कुछ पायलटों को विदेशी करेंसी में भुगतान किये हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.