/अदालत ने गोपाल कांडा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किये…

अदालत ने गोपाल कांडा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किये…

रोहिणी की अदालत ने एयर होस्टेस गीतिका शर्मा की खुदकुशी के मामले में आरोपी हरियाणा के पूर्व गृह राज्य मंत्री और एमडीएलआर एयरलाइंस तथा हरियाणा न्यूज़ के मालिक गोपाल कांडा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए पुलिस को 24 अगस्त तक उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने का आदेश जारी किया है.

इससे पहले गुरुवार को कांडा की तलाश कर रही दिल्ली पुलिस की टीम एक बार फिर सिरसा पहुंची थी और कांडा के एक रिश्तेदार के घर पर छापा मारा कर गोपाल कांडा के उस रिश्तेदार को हिरासत में लिया था.

पुलिस उस मोबाइल नंबर को ट्रेस करते हुए यहां तक पहुंची, जिस नंबर पर गोपाल कांडा ने काफी लंबी बात की थी. दिल्ली पुलिस की टीम गोपाल कांडा के साले के दामाद बंटी बंसल को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है. डीसीपी कमल प्रीत सबरवाल की अगुवाई में 25 लोगों की टीम ने सिरसा में दबिश दी.

वहीं, गोपाल कांडा की अग्रिम जमानत याचिका पर आज फैसला आ सकता है. कांडा ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. याचिका में कांडा ने दलील दी है कि गीतिका अति-संवेदनशील थी और उसकी खुदकुशी के लिए उसे (कांडा को) जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.

गौरतलब है कि कांडा की कंपनी एमडीएलआर एयरलाइंस में काम करने वाली गीतिका ने 5 अगस्त को खुदकुशी कर ली थी और उसने अपने सुसाइड नोट में गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा को जिम्मेदार ठहराया था. कांडा को दिल्ली पुलिस ने पूछताछ के लिए भी बुलाया था, लेकिन वह नहीं आया और अब तक फरार है. इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कई अहम सबूत जुटा लेने का दावा किया है, जिनसे कांडा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.

उधर, इस केस में दूसरी आरोपी अरुणा चड्ढा को आज कोर्ट में पेश किया जा सकता है. सोमवार को कोर्ट ने अरुणा की हिरासत तीन दिन के लिए बढ़ा दी थी. दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि इस केस में गोपाल कांडा के गायब होने से सबूतों को मिटाए जाने की आशंका को देखते हुए अरुणा की हिरासत पुलिस के लिए जरूरी है. पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गोपाल कांडा और उनकी सहयोगी अरुणा चड्ढा ने दुबई जाकर गीतिका पर एयर होस्टेस की नौकरी छोड़कर उनकी कंपनी ज्वाइन करने के लिए दबाव डाला था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.