/पूर्वोत्तर के निवासियों का शेष भारत से खौफज़दा होकर पलायन..

पूर्वोत्तर के निवासियों का शेष भारत से खौफज़दा होकर पलायन..

खुद पर हमले से भयभीत पूर्वोत्तर के भारतीयों ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक व महाराष्ट्र से पलायन शुरू कर दिया है. पूर्वोत्तर के लोगों को धमकी भरे एसएमएस मिल रहे हैं. इससे लोगों का पलायन बढ़ रहा है. मुंबई से करीब डेढ़ हजार लोग गुवाहाटी एक्सप्रेस से असम की ओर रवाना हो गए. सिर्फ बेंगलुरू से ही बुधवार रात पूर्वोत्तर के 6800 लोग तीन विशेष ट्रेनों से अपने घर को रवाना हुए. पलायन का दौर शुक्रवार को भी जारी है.

बेंगलुरू छोड़ रहे पूर्वोत्तर भारतीयों को कर्नाटक के गृहमंत्री आर. अशोक ने खुद बेंगलुरू स्टेशन पहुंचकर इन लोगों को समझाया. फिर भी स्टेशनों पर सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हैं. इसके अलावा मुंबई, पुणे, चेन्नई व हैदराबाद से भी पलायन जारी है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने गुरुवार को लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है.

इस बीच, केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिदे ने भी कहा है कि किसी भी क्षेत्र के लोग देश में कहीं भी रह सकते हैं. जो लोग अफवाह फैला रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. हालाकि लोगों को सुविधा मुहैया कराने के लिए कर्नाटक से उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं. बेंगलुरू में एक लाख से अधिक लोग पूर्वोत्तर भारतीय हैं.

गौरतलब है कि असम में 19 जुलाई को दो समुदायों के बीच हुई हिंसा  में चार लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद से हिंसा का दौर जारी है. इस में अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 4.50 लाख लोग राहत शिविरों में गुजर-बसर कर रहे हैं. इसके बाद मुंबई और अन्य शहरों में एक समुदाय के उपद्रवियों द्वारा मचाये  उत्पात के कारण भारत भर में बसे पूर्वोत्तर भारतीयों के दिलों में डर बिठा दिया है और इन पूर्वोत्तर भारतीयों में असुरक्षा की भावना आ चुकी है. इस बीच कुछ असामाजिक तत्व लगातार अफवाहें फैलाकर इन पूर्वोत्तर भारतीयों को सताने में जुटे हैं.

इन लोगों को एसएमएस करके धमकाया जा रहा है. मैसेज में लिखा होता है कि शहर और राज्य छोड़ कर नहीं गए तो खमियाजा भुगतना होगा. एमएमएस के अलावा फेसबुक जैसी सोशल साइट का भी अफवाह फैलाने के लिए भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है.

बेंगलुरू छोड़ रहे पूर्वोत्तर भारतीयों को सुरक्षा का आश्वासन देने कर्नाटक के गृहमंत्री आर अशोक के अलावा राज्य के पुलिस महानिदेशक लालरोकमा पुचुओ भी बेंगलुरू स्टेशन पहुंचे. उन्होंने टिकट खिड़की पर लाइन लगाए लोगों से कहा कि ‘हमले की खबर महज अफवाह है. मैं खुद पूर्वोत्तर का रहने वाला हूं. किसी को डरने की जरूरत नहीं है.’ पुचुओ मिजोरम के रहने वाले हैं. मगर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा.

रेलवे ने कर्नाटक, खासकर बेंगलुरू से जरूरत के मुताबिक विशेष ट्रेन मुहैया कराई हैं. गुवाहाटी एक्सप्रेस में चार बोगिया जोड़ी गईं. दो विशेष ट्रेनें चलाई गईं. ट्रेनें शुक्त्रवार तक असम और बाकी उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंचेगी. वहा सभी स्टेशनों पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं.

बेंगलुरू के अलावा पिछले दो दिनों में हैदराबाद से करीब 1000, मुंबई और पुणे से 4000 से अधिक लोगों ने पलायन किया है. अभी हाल ही में मुंबई में असम हिंसा के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में हंगामा हो गया था. इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी. करीब 55 लोग घायल हुए थे. इससे भी लोगों में डर बैठ गया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.