/मुश्किल में फंसी केंद्र सरकार : कोयला खदान के आवंटन में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला

मुश्किल में फंसी केंद्र सरकार : कोयला खदान के आवंटन में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला

संसद में शुक्रवार को सीएजी ने कोयला, बिजली और नागरिक उड्डयन पर अपनी रिपोर्ट पेश कर दी हैं. इनमें देश को करीब 2 लाख 18 हजार करोड़ का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है. कोयला ब्लॉक आवंटन में 1.86 लाख करोड़, नागरिक उड्डयन में करीब 3415 करोड़ व बिजली कंपनियों के पॉवर प्रोजेक्ट में 29 हजार करोड़ का नुकसान देश को हुआ है.
सीएजी के मुताबिक कोल आवंटन में करीब 1 लाख 86 हजार करोड़ का नुकसान हुआ. सरकार ने 2004 से 2009 के बीच लगभग 100 कंपनियों को 155 कोयला खदानों का आवंटन किया. इससे सरकारी खज़ाने को लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. ये 1.76 लाख करोड़ के 2जी घोटाले से ज्यादा बड़ी रकम है.

कार्टून:मनोज कुरील

आवंटन की नीति निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई. फायदा कमाने वाली कंपनियों में टाटा, जिंदल ग्रुप, एस्सार ग्रुप, अभिजीत ग्रुप, लक्ष्मी मित्तल आर्सेलर्स ग्रुप और वेदांता का नाम शामिल है.
कॉरपोरेट घरानों को कोयले की खानें सरकार ने कौड़ियों के भाव दीं जिनसे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ. 2004 से 2006 के बीच कोयला खदानों के बंटवारे में पारदर्शिता नहीं बरती गई. 2004-06 के बीच 142 कोल ब्लॉक बांटे गए. इस दौरान कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था.

 बिजली पर सीएजी की रिपोर्ट

बिजली परियोजनाओं को लेकर सीएजी रिपोर्ट में भी निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की बात कही गई है. मसलन एक ही कंपनी को एक से ज्यादा अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट विकसित करने की इजाजत दी गई जिसमें CAG ने सरकार पर टाटा पॉवर और रिलायंस पॉवर को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है. टाटा और रिलायंस को उनकी जरूरत से ज्यादा जमीन अधिग्रहीत करने की इजाजत दी गई.
सासन प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए कंपनियों ने गलत जानकारी दी. सरकार ने रिलायंस पॉवर को सासन प्रोजेक्ट के लिए आवंटित तीन ब्लॉक से तय मात्रा से कहीं ज्यादा कोयला निकालने की इजाजत दी. सीएजी के मुताबिक निजी कंपनियों को कम से कम 29 हजार करोड़ का फायदा हुआ.

एविएशन पर सीएजी की रिपोर्ट

दिल्ली में निजी कंपनी जीएमआर और सरकार की भागीदारी से बने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के मामले पर भी सीएजी की एक रिपोर्ट पेश हुई है. इससे जुड़ी सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने महज 1,813 करोड़ रुपये में 60 साल के लिए जीएमआर को दिल्ली एयरपोर्ट की जमीन लीज पर दे दी.
एयरपोर्ट के अलावा लगभग पांच हजार एकड़ ज़मीन भी मामूली रकम लेकर दे दी गई. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों और करदाताओं को हुए नुकसान की भी अनदेखी की. ये नुकसान करीब 3 हजार 750 करोड़ रुपये का है. तब प्रफुल्ल पटेल नागरिक उड्डयन मंत्री थे.
अब सीएजी ने तत्कालीन एविएशन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की भूमिका पर सवाल खड़ा किया है. सीएजी के मुताबिक प्रफुल्ल पटेल के दौर में मंत्रालय ने दिल्ली एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी GMR को 3400 करोड़ का फायदा पहुंचाया. इसके साथ ही दिल्ली एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनी DIAL पर नियमों के विपरीत डेवलेपमेंट फीस वसूलने का आरोप भी लगा है.

(फेसबुक पर मनीष खत्री की वाल से)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.