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एयरपोर्ट एथोरिटी के अफसरों की सांठ गाँठ से पनपते अंतर्राष्ट्रीय गरम गोश्त के सौदागर

By   /  August 17, 2012  /  1 Comment

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मुंबई पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच के विवादास्पद एसीपी वसंत ढोबले ने एक बार फिर एक बड़े सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है. उनकी टीम ने जिस्मफरोशी का धंधा कराने के लिए दिल्‍ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दुबई भेजी जा रही 36 लड़कियों को गिरफ्तार किया है. इन लड़कियों को डांस ग्रुप के नाम पर विदेश ले जाकर उनसे जिस्‍मफरोशी करवाने की योजना थी. पुलिस ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की छानबीन की जा रही है. पुलिस को शक है कि इस अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट में एयरपोर्ट अथॉरिटी के कुछ अफसर भी शामिल हो सकते हैं.

पकड़ी गईं 36 में से 27 लड़कियों की उम्र 22 से 27 साल के बीच है और ये सभी मुंबई से हैं जबकि, शेष लड़कियां हैदराबाद की बताई जाती हैं. पुलिस को शक है कि इनमें से ज्यादातर लड़कियां अच्छे घरों से ताल्लुक रखती हैं1 अपने महंगे शौक को पूरा करने के लिए इन्होंने इस पेशे को चुना.
मुंबई पुलिस को सूचना मिली कि दिल्‍ली एयरपोर्ट से 36 लड़कियां जिस्‍मफरोशी के लिये दुबई जाने की फिराक में हैं. दरअसल इस गिरोह पर मुंबई पुलिस काफी दिनों से नजर रखे हुए थी. सूचना मिलने पर फौरन एक टीम दिल्‍ली आ पहुंची और एयरपार्ट से उन्‍हें गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस को इस बात का भी शक है कि इस अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट में एयरपोर्ट अथॉरिटी के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं. कागजात की छानबीन के बिना वीजा दिलाने में मदद के बदले ये अफसर मोटी रकम वसूल करते हैं. दलालों के चंगुल से छुड़ाई गई लड़कियों को अदालत ने मुंबई के चेंबूर सुधार गृह में भेज दिया है.
पुलिस के मुताबिक लड़कियों को डांस ग्रुप के नाम पर दुबई ले जाकर जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलने की तैयारी थी. पुलिस के मुताबिक जांच में सख्ती के चलते सेक्स रैकेट में शामिल गैंग ने मुंबई से लड़कियों को विदेश भेजना बंद कर दिया है.
मुंबई में सक्रिय गिरोह अब दिल्ली, हैदराबाद और चेन्नई के रास्ते लड़कियों को विदेश भेज रहे हैं. फिलहाल इस बड़े रैकेट को पकड़ने के बाद मुंबई पुलिस को उम्मीद है कि गैंग में शामिल बड़ी मछलियां भी जल्द ही उसकी गिरफ्त में होंगी.
मुंबई पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच के एसीपी वसंत ढोबले अपनी कार्यशैली को लेकर आलोचनाएं भी झेलते रहे हैं. जहां कुछ लड़कियों ने उन पर उनकी जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया है, वहीं शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने ‘सामना’ के संपादकीय के जरिए ढोबले का विरोध किया है. उन्‍होंने लिखा कि ढोबले मनमानी तरीके से काम कर रहे हैं. खाकी वर्दी मे तैयार हुआ यह माफिया आतंकवादियों से भी भयंकर है. अगर ढोबले पर सरकार लगाम नहीं कस सकती है तो वो बताए, फिर हम देखते है कि क्या करना है. मुंबई में एसीपी वसंत ढोबले के खिलाफ मुंबई की हाईप्रोफाइल सोसायटी ने मोर्चा खोल दिया है. 5 जून को ओशिवारा इलाके के एक रेस्तरां में छापेमारी के बाद उन्होंने दो बहनों को जिस्मफरोशी के आरोप में महिला सुधारगृह भेज दिया था, लेकिन उन दो बहनों का कहना है कि उस दिन वो सिर्फ जन्मदिन की पार्टी में गईं थी. दोनों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी रिहाई की गुहार लगाते हुए एक-एक करोड़ मुआवजे की मांग की है.
एसीपी वसंत ढोबले मुंबई पुलिस की समाज सेवा शाखा में हैं और उनका मानना है कि देर रात रेस्तरां में जाने वाली लड़कियां वेश्या होती हैं. इसी कारण ढोबले मुंबई की नाइट लाइफ एंजॉय करने वाले लोगों की नजरों में खलनायक बन गए हैं. सोशल नेटवर्किंग साइटों पर ढोबले के तौर तरीकों को विरोध होता रहा है और उन पर लगाम कसने की मांग होती रही है. लोगों का कहना है कि एसीपी ढोबले अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि एक तबका उनके काम का प्रशंसक भी है. मुंबई के बांद्रा और खार इलाके के निवासी ढोबले के काम से खुश हैं. लोगों का कहना है कि उनके द्वारा रेस्तरां और बीयर बारों पर मारे जा रहे छापे से गंदगी साफ हो रही है.
एसीपी ढोबले साल 1989 में पुणे में घूसखोरी के मामले में निलंबित कर दिए गए थे. 1994 में पुलिस हिरासत में एक शख्स की मौत के मामले में वो एक लाख रुपए जुर्माना के साथ 7 साल की सजा भी काट चुके हैं. साल 1996 में ढोबले दोबारा बहाल किए गए. ढोबले के आने के बाद मुंबई पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच काफी सक्रिय हो गई है. उन्‍होंने 200 से ज्‍यादा लड़कियों को जिस्मफरोशी के धंधे से छुटकारा दिलाया है.

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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