/कसाब की तर्ज़ पर जिंदाल को चाहिए भेजा फ्राई, कीमा और मलाई

कसाब की तर्ज़ पर जिंदाल को चाहिए भेजा फ्राई, कीमा और मलाई

मुंबई में ताज होटल पर हमले का मुजरिम और लश्कर आतंकी सईद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जिंदाल जेल में अपने साथी अजमल कसाब के नक्शेकदम पर चल रहा है. जिंदाल हर रोज सुबह पांच बजे सहरी के लिए भेजा फ्राई, कीमा, चिकन रोल और मलाई की मांग करता है. धार्मिक भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए जिंदाल की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी उसकी हर फरमाइश को पूरा करने के लिए मजबूर हैं. इससे पहले अगस्त, 2009 में कसाब ने मटन बिरयानी की मांग करते हुए दिया गया खाना खाने से इनकार कर दिया था.

मुंबई के अखबार ‘मिड डे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, काला चौकी के एटीएस लॉक-अप में बंद जिंदाल हर सुबह भेजा फ्राई और मलाई मांग रहा है. उसकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को डर है कि मांगें पूरी न होने पर कोर्ट में जिंदाल उनके खिलाफ गलत आरोप लगा सकता है. मजबूरी में पुलिसकर्मी उसकी हर मांग पूरी कर रहे हैं.

मुंबई एटीएस के एक अधिकारी ने बताया, ‘लश्कर आतंकी जिंदाल हर सुबह खजूर, दूध, मलाई, कीमा और भेजा फ्राई मांगता है. इनका इंतजाम करना काफी मुश्किल हो जाता है, लेकिन हम किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट नहीं पहुंचाना चाहते, फिर चाहे वहआतंकी ही क्यों न हो. हर रोज पांच बजे से पहले एक कॉन्स्टेबल इन सामानों का इंतजाम करने के लिए बाहर भेजा जाता है. कई बार कॉन्स्टेबल को भिंडी बाजार या मोहम्मद अली रोड तक जाना पड़ता है. कई बार हम अपने ऑफिस के नजदीक मौजूद मुस्लिम संगठनों या रोजा रखने वाले लोगों से भी इंतजाम करने को कह देते हैं. इसमें ध्यान रखा जाता है कि उसका खाना ज्यादा तीखा न हो.’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.