/भाई की गिरफ्तारी के दवाब में गोपाल कांडा हुआ सरेंडर…

भाई की गिरफ्तारी के दवाब में गोपाल कांडा हुआ सरेंडर…

गीतिका शर्मा सूइसाइड केस में मुख्य आरोपी हरियाणा के पूर्व गृह राज्य मंत्री और  एमडीएलआर एयरलाइंस तथा हरियाणा न्यूज़ के मालिक गोपाल कांडा को आखिर बारह दिनों की लुका छिपी के बाद पुलिस हिरासत में जाना ही पड़ा. दिल्ली पुलिस ने इसके बाद गोपाल कांडा को रोहिणी कोर्ट में पेश किया तो अदालत ने गोपाल कांडा की जमानत की अर्जी ठुकराते हुए उसे सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

इससे पहले शनिवार तड़के लगभग 4 बजे बेहद नाटकीय अंदाज में कांडा ने अशोक विहार स्थित नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के डीसीपी ऑफिस में सरेंडर किया. इसके बाद आगे की कार्रवाई अशोक विहार थाने ने की. दिल्ली के हॉस्पिटल में कांडा का मेडिकल चेकअप कराया गया. दिन में करीब चार बजे उसे रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया.

कोर्ट में कांडा के वकीलों ने गुजारिश की कि उसे तुरंत जमानत दी जानी चाहिए. मगर, अभियोजन पक्ष ने कहा कि कांडा के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप भी हैं. इसके अलावा पुलिस को उससे
इससे पहले रात को ही गोपाल कांडा के भाई गोविंद कांडा को पुलिस ने अशोक विहार स्थित नॉर्थ-वेस्ट जिले के डीसीपी ऑफिस के बाहर हिरासत में ले लिया था. वह वहां लगभग 70 समर्थकों के साथ पहुंचा था. सभी लोग डीसीपी ऑफिस के बाहर गोपाल कांडा के समर्थन में और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारे लगा रहे थे. गोविंद कांडा का कहना था कि उसका भाई निर्दोष है और हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत न मिलने पर ने सरेंडर करने का फैसला लिया है.
गोविंद कांडा ने कहा कि 10 मिनट के बाद उसका भाई पुलिस के सामने सरेंडर कर देगा. कांडा के समर्थक भी अशोक विहार डीसीपी ऑफिस के बाहर पहुंच गए. तब अचानक गहमागहमी बढ़ गई. पुलिस को यह जानकारी मिली तो पुलिस ने अशोक विहार इलाके में आने वाले तमाम प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी. वहां से गुजरने वाली तमाम गाड़ियों की निगरानी की गई. दरअसल, पुलिस चाहती थी कि उसे सरेंडर करने से पहले ही अरेस्ट कर लिया जाए.

यह नाटक रात भर चलता रहा. एक बार यह खबर भी फैल गई कि कांडा सरेंडर नहीं करेगा. उसने पुलिस को चकमा देने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत सरेंडर की खबर फैलाई. इस खबर के बाद जांच में जुट पुलिस कर्मी भी कुछ सुस्त हो गए. इसी बीच लगभग चार बजे कांडा एक मीडिया की स्टिकर-प्रेस- लिखी गाड़ी से डीसीपी ऑफिस के पास उतरा. इस गाड़ी में हरियाणा से उसके साथ आए समर्थक भी थे. उसने अपने समर्थकों के साथ सीधे पुलिस के पास जाकर सरेंडर कर दिया. बताया जाता है कि गोपाल कांडा मीडिया की स्टिकर लगी गाड़ी में अशोक विहार के आसपास ही कहीं छुपा हुआ था.

कांडा की संभावित गिरफ्तारी की पहली खबर दिल्ली पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने अपने ट्वीट के जरिए दी. शुक्रवार रात ठीक 10:40 पर सीपी नीरज कुमार ने अपने ट्वीट में लिखा, V will get kanda soon enough our best boys r on d job. सीपी के ट्वीट से अंदाजा लगाया जा सकता है कांडा को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस नजदीक पहुंच चुकी थी. यह गिरफ्तारी संभव हुई गोपाल कांडा के भाई को हिरासत में लेने के बाद. पूछताछ में जब भाई ने गोपाल कांडा के सरेंडर करने की पुख्ता जानकारी दी तो सीपी ने अपने ट्वीट पर सूचना जारी कर दी थी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.