/कांग्रेसी नेता अरूण गोठी के घर से बेशकीमती सागौन की चरपट का भंडार बरामद..

कांग्रेसी नेता अरूण गोठी के घर से बेशकीमती सागौन की चरपट का भंडार बरामद..

कांग्रेस नेता अरूण गोठी आजकल लूप लाइन मे हैं. प्रदेश में भाजपा की सरकार है इस वजह से कांग्रेसी दूसरे कामों मे व्यस्त हो गए हैं. जैसे कि सागौन की तस्करी. कांग्रेस के नेता अरूण गोठी के घर से बेशकीमती सागौन की चरपट का भंडार मिलने से साफ हो गया है कि इन सेठों का असल धंधा कौन सा है. यहां लाखों रूपये मूल्य की सागौन की लकड़ी मिलने से कांग्रेस पार्टी का मुखौटा उतर गया है. हालांकि गोठी वहां नही रहते. किन्तु जिस मकान से लाखों रूपये की यह लकड़ी पकड़ी गई है वह निर्माणधीन है.

अरुण गोठी के यहाँ से बरामद सागौन

वन विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई मे यह साफ हो गया कि राजनेताओं ने नया कारोबार शुरू कर दिया है. जानकारों की राय मे यह अवैध कार्य लंबे समय से चल रहा था. अधिकारी राजनीति के दबाव वश आगे कार्रवाई करने से कतराते रहे. अब चूंकि कलक्टर, एसपी और फारेस्ट की टीम नई है सो प्लानिंग के आधार पर नेताओं पर नकेल कसने की तैयारी की गई. पहला निशाना गोठी पर साधा गया.

अरूण ने चक्कर रोड गोठी कालोनी मे 25 डुप्लेक्स बनाये हैं. इन्ही डुप्लेक्स मे सागौन का भंडार मिला है. चरपट के अलावा दरवाजे व चौखट भारी मात्रा मे मिली है. वन विभाग के एसडीओ राजेश राय के अनुसार सामग्री कीमती है.

तहसीलदार शैलेन्द्र हनोतिया, रेंजर एलपी गौतम के अलावा सैकड़ों जवान इस कार्रवाई को अंजाम दे रहे है. हालांकि विभाग इस कार्रवाई मे कही न कही राजनेता को बचाने की कोशिश करते दिख रहे है. सागौन की कीमत बताने मे कोताही बरती जा रही है. आश्चर्य की बात तो यह है कि अभी तक किसी को आरोपी नही बनाया गया है. यही सामग्री आम व्यक्ति के पास बरामद होती तो उसे हवालात पहुंचा दिया गया होता.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.