/गोपाल कांडा पुलिस से डर भी रहा है और सहयोग भी नहीं कर रहा..

गोपाल कांडा पुलिस से डर भी रहा है और सहयोग भी नहीं कर रहा..

एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा आत्महत्या केस के मुख्य आरोपी, हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा से दिल्‍ली पुलिस पूछताछ कर रही है. सूत्रों के मुताबिक गोपाल कांडा पूछताछ में पुलिस का सहयोग नहीं कर रहा है. ऐसे में पुलिस के हाथ अब तक जो सबूत हाथ लगे हैं, उसके आधार पर कांडा से पूछताछ की जाएगी. कांडा से उसके दुबई दौरे के बारे में पूछताछ की जा रही है. रविवार को दिल्‍ली पुलिस कांडा को लेकर एमडीएलआर के गुड़गांव स्थित उसके दफ्तर ले गई. सूत्र बताते हैं कि कांडा ने शुरू में गुड़गांव स्थित अपने दफ्तर जाने से मना कर दिया था मगर पुलिस के आगे कांडा की दाल नहीं गली. डीसीपी, एसीपी सहित पुलिस के पांच अधिकारियों की टीम कांडा से पूछताछ कर रही है. दिल्‍ली पुलिस कांडा से सात दिनों में 18 अहम सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करेगी. गीतिका केस में कांडा और सह आरोपी अरुणा चड्ढा को आमने-सामने बैठा कर पूछताछ की तैयारी है. कांडा ने पिता मुरलीधर लखराम के नाम पर एमडीएलआर एयरलाइंस कंपनी बनाई थी जो अभी बंद हो चुकी है. गीतिका की पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है. इसमें गीतिका की मौत फांसी पर लटकने की वजह से हुई बताया गया है.

गिरफ्तार करने के पुलिस के तमाम इंतजामों को धता बताते हुए कांडा अपने न्यूज चैनल की गाड़ी में सवार होकर शनिवार तड़के चार बजे अशोक विहार डीसीपी ऑफिस पहुंचा था. उसका कहना था कि वह स्‍वेच्‍छा से जांच में शामिल होने पहुंचा था, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने उसे डीसीपी ऑफिस पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया था. शनिवार दोपहर पुलिस उसे मेडिकल जांच के लिए बाबू जगजीवन राम अस्पताल ले गई. उसके बाद शाम लगभग सवा चार बजे उसे रोहिणी कोर्ट में एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट डीके जांगला के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.

पुलिस द्वारा गोपाल कांडा को अदालत में पेश करने पर कांडा की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने अदालत में कहा कि उनका मुवक्किल कोई भगोड़ा नहीं है, जैसा कि पुलिस बार बार कह रही है. वह खुद जांच में सहयोग देने के लिए पुलिस के पास आया है. वह सिर्फ हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा था और जैसे ही उसकी जमानत अर्जी खारिज हुई, वह पेश होने आ गया. वह अदालत में पेश होना चाहता था लेकिन समय निकल चुका था, इसलिए वह पुलिस के समक्ष ही सरेंडर करने आ गया. पुलिस पहले ही उसके घर, दफ्तर आदि जगहों पर छापेमारी कर तमाम दस्तावेज आदि बरामद कर चुकी है. इसलिए उसे पुलिस रिमांड में दिए जाने की कोई जरूरत नहीं है.

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एसीएमएम ने लगभग दस मिनट के लिए फैसला सुरक्षित रखा, जिसके बाद कांडा को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया . सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम को बंद रखा गया ताकि बाहर एकत्र कांडा समर्थक कोई परेशानी न पैदा कर सकें.

कांडा जब दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आया तो उसके चेहरे पर डर और खुद के फंसने को लेकर आश्चर्य दोनों ही भाव देखने को मिले. फंसने को लेकर आश्चर्य इसलिए था कि उसने कभी सोचा भी नहीं होगा कि किसी दिन उसके पाप का घड़ा फूट जायेगा और उसकी दौलत और राजनैतिक ताकत धरी रह जाएगी और जिस पुलिस को वह अपनी अँगुलियों पर नाचता था, एक दिन उसे गिरफ्तार कर मुजरिम साबित करने के लिए अपना दम खम लगा देगी.

डॉ. जितेंद्र नागपाल (वरिष्ठ मनोचिकित्सक) कहते हैं कि जहां तक डर की बात है तो कांडा की ओर से अदालत से अग्रिम जमानत पाने की कोशिश और तब तक फरार रहना साबित करता है कि वह जानता है कि उसने गलत किया है और वह अब फंस चुका है. अमूमन ऐसे मामलों में व्यक्ति के मन में विरोधाभास पैदा होता है और वास्तविकता को वह स्वीकार नहीं कर पाता है, लेकिन धीरे-धीरे उसमें स्वीकार्यता का भाव आता है.

इस बीच गीतिका के भाई अंकित शर्मा ने कहा है कि ‘गोपाल का सरेंडर पहले से तय ड्रामा था. सरकार उसकी मदद कर रही है. गोपाल ने फरारी के दौरान अधिकांश सबूत मिटा दिए हैं.’ अंकित ने कहा कि कैमरे के सामने कांडा की पूछताछ होनी चाहिए, ताकि वह बाद में बयान न बदले. उसने कहा कि गीतिका का फेसबुक एकाउंट डिएक्टिवेट किया गया था.

डीसीपी ऑफिस के बाहर पहुंचने पर कांडा ने मीडिया को बताया कि वह फरार नहीं था, बल्कि हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा था. जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उसने सरेंडर करने की ठान ली और खुद पुलिस के समक्ष पेश हो गया, लेकिन पुलिस जबरदस्ती क्रेडिट लेने के चक्कर में उसे गिरफ्तार करने की कोशिश में लग गई और जगह-जगह पर चेकिंग शुरू कर दी. उसने यह भी कहा कि उसे इस मामले में राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है.

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हमारे पास कांडा के बेड़े में शामिल बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, ऑडी आदि महंगी कारों के नंबर थे और हम लगातार उन्हीं गाड़ियों को ट्रैक कर रहे थे. हमारा मानना था कि वह इन्हीं गाड़ियों में सफर करेगा लेकिन इसके उलट वह छोटी गाड़ियों में घूमा. हमें यह कतई उम्मीद नहीं थी कि वह न्यूज चैनल की कैब में भी सफर कर सकता है. इससे यह भी पता चलता है कि वह कितना शातिर है.

शुक्रवार रात गोपाल कांडा के सरेंडर का नाटक जोर-शोर से चला. आधी रात 12 बजे से शनिवार सुबह चार बजे तक हर पल पुलिस व मीडियाकर्मी बेसब्री से उसके पहुंचने या फिर उसके गिरफ्तार होने का इंतजार करते रहे. इस बीच उसके भाई गोविंद के साथ पहुंचे लगभग सौ समर्थक डीसीपी ऑफिस के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी करते रहे. सुबह चार बजे जब कांडा के पहुंचने की खबर वहां मौजूद मीडियाकर्मियों, पुलिसकर्मियों व समर्थकों को लगा तो अफरातफरी मच गई.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.