/बिजली चोर पुलिस रंगे हाथों पकड़ी गयी…

बिजली चोर पुलिस रंगे हाथों पकड़ी गयी…

 

-अनिल लाम्बा||

करनाल पुलिस चोर पकड़ती है या खुद चोरी करती है? जी हाँ करनाल पुलिस को चोर साबित किया है हार्ट आफ सिटी में स्थित करनाल पुलिस के ट्रैफिक बूथ ने. इस ट्रैफिक बूथ  पर लंबे अर्से से बिजली का अनाधिकृत कनैक्शन लगा हुआ था. इस बीच लोगों की शिकायत पर बिजली के विजिलैंस विभाग ने पुलिस चौंकी का कनेक्शन भी काट दिया था मगर वहां पदस्थ पुलिसकर्मियों ने उसे दुबारा जोड़ फिर से बिजली चोरी शुरू कर दी.

बिजली चोरी का यह मामला  नगर के हाटआफ सिटी में स्थित करनाल पुलिस के ट्रैफिक बूथ का उजागार हुआ है. जानकारी के मुताबिक जब से ये बूथ यहां पर स्थापित किया गया है, तभी से यहां पर कानून की धज्जियां उड़ाकर सरे आम बिजली चोरी की जा रही है. मजे व हैरानी की बात तो यह है कि जब इस सनसनी खेज मामले का बिजली विभाग को पता चला तो चोरी पकडऩे के नाम पर उनके भी हाथ पैर फूल गए, लेकिन शिकायतकर्ता के दबाव के चलते विभाग के आलाधिकारियों ने विभाग की एक टीम को मौके पर भी भेजा, लेकिन पुलिस बूथ में उपस्थित पुलिस कर्मचारियों ने उनका ही चालान काटने की घमकी देते हुए उन्हें वहां से बैरंग भगाने के लिए मजबूर कर दिया. परंतु विधुत विभाग के एसई एमएस दहिया का दावा है कि पुलिस को किसी भी कीमत पर बिजली चोरी नही करने दी जाएगी.

इधर इस मामले के शिकायतकर्ता एंव एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि वह इस मामले को लेकर चुप रहने वाले नही है और जब बिजली विभाग ने यहां पर बिजली चोरी नही पकड़ी तो वह इस मामले को विभाग के आलाधिकारियों तक तो जाएगें ही साथ में जरूरत पड़ी तो वह इस मामले में पंजाब एंव हरियाणा उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की मांग करेंगे. उन्होंने बताया कि पहले ही उनका प्रदेश बिजली की समस्या से गुजर रहा है और जो थोडी बहुत बिजली आती है, उसे पुलिस वाले भी चोरी कर लेते है. उधर इस मामले के उजागर होने से करनाल पुलिस के भी हाथ पैर फूले हुए थे.
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बिजली कर्मियों ने काटा कनैक्शन : रविवार की दोपहर करनाल पुलिस पर उस समय मुसीबतों का पहाड टुट पड़ा, जब बिजली विभाग की विजीलैंस टीम ने सब्जी मंडी चौंक पर स्थित पुलिस के ट्रैफिक बूथ पर छापामारी करते हुए बिजली चोरी किए जाने का भांडा फौड डाला. बिजली विभाग की टीम ने मौके पर ही बिजली का कनैक्शन काट दिया और समाचार लिखे जाने तक विभाग की टीम अपनी कार्यवाही में लगी हुई थी.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.