/प्रधानमंत्री पद का मुकाबला राहुल गाँधी और नरेन्द्र मोदी के बीच – बेनीप्रसाद वर्मा

प्रधानमंत्री पद का मुकाबला राहुल गाँधी और नरेन्द्र मोदी के बीच – बेनीप्रसाद वर्मा

केंद्र सरकार में इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने पहले तो सुरसा के मुंह की तरह बढती महंगाई को ख़ुशी की बात बताया और बाद में अपने बयान से मचे सियासी घमासान के बाद सफाई देने का तो प्रयास किया लेकिन इस के साथ ही उन्‍होंने 2014 के लोकसभा चुनावों से जुड़ी भविष्‍यवाणी भी कर डाली तथा कहा कि 2014 में यदि राहुल गांधी कांग्रेस के  उम्‍मीदवार हुए तो पीएम पद के लिए राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच मुकाबला होगा.
महंगाई पर अपने बयान पर कायम रहते हुए वर्मा ने कहा कि उन्‍हें इसकी कोई परवाह नहीं है कि कोई भी उनके बयान को किस नज़र से देखता है. अपनी सफाई में उन्‍होंने बस इतना ही कहा कि महंगाई पर उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. बेनी ने कहा, ‘मैं अपने बयान पर कायम हूं. मुझे किसी की परवाह नहीं. मुझे केवल सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस की परवाह है.’

लगातार महंगाई की मार से परेशान जनता और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ‘चिंता’ को एक तरफ रखते हुए वर्मा ने कहा कि वह बढ़ती महंगाई से खुश हैं. वर्मा इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं . वर्मा ने एक कार्यक्रम में कहा,  ‘महंगाई पर लोग हमेशा यही चिल्लाते हैं…दाल महंगी हो गई, आटा महंगा हो गया, चावल महंगा होगया, सब्‍जी महंगी हो गई… जितना महंगा होगा किसान को उतना फायदा होगा… हम तो खुश हैं इस महंगाई से.’

‘कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ’ के नारे से बेनीप्रसाद वर्मा का यह बयान कांग्रेस की पार्टी लाइन और प्रधानमंत्री की राय के उलट है. गौरतलब है कि 15 अगस्‍त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि बढ़ती महंगाई से जनता परेशान है और यह चिंता की बात है. कांग्रेस के नेता सत्‍यव्रत चतुर्वेदी ने भी राष्‍ट्रीय न्‍यूज चैनल दूरदर्शन पर स्‍वीकार किया था कि उनकी सरकार महंगाई रोकने में नाकाम रही है. उन्‍होंने कहा था, ‘ये बात सही है कि महंगाई रोकने में हम सफल नहीं हो पाए हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है.’ प्रधानमंत्री महंगाई रोकने के वादे कई बार कर चुके हैं, लेकिन इसे पूरा करने में हर बार नाकाम रहे हैं. बेकाबू महंगाई को रोकने में विफल हो चुकी मनमोहन सरकार के मंत्री वर्मा एकदम अलग और नए फॉर्मूले के आधार पर महंगाई को सही ठहरा रहे हैं. जिन किसानों का हवाला देकर उन्‍होंने बढ़ती महंगाई पर खुशी जाहिर की है, उनके नेता मंत्री के बयान को बेतुका और सच्‍चाई से परे बताते हैं. किसान नेता सतपाल मलिक का कहना है, ‘बढ़ती महंगाई से हम भी खुश होते अगर हमें उतने भाव मिल जाते, जिस भाव पर खुदरा ग्राहकों तक चावल-सब्‍जी आदि पहुंच रही है.’ वर्मा को किसानों की वह तस्वीर भी याद नहीं रही जब खेतों से नई फसल मंडी पहुंचती है तो किसानों का क्या हाल होता है? कई ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं जब किसानों को अपनी फसल फेंकनी पड़ी है. उन्‍हें उस समयन तो अच्‍छी कीमत मिलती है और न उनके पास ज्‍यादा समयतक फसल सुरक्षित रखने का इंतजाम है. सच यह है कि गत दो वर्षों के दौरान देश का किसान और अधिक गरीब हुआ है जबकि उसके द्वारा उत्पादित खाद्य पदार्थों के दामों में भारी इजाफा दर्ज किया गया. यह समूचा मुनाफा अमीरों/बिचौलियों की जेबों में चला गया.

केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद भी बेनी प्रसाद के बचाव में उतर आये है. खुर्शीद ने कहा कि इस्‍पात मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है. केंद्र में मुख्‍य विपक्षी दल बीजेपी ने बेनीप्रसाद वर्मा के बयान पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे आम आदमी के साथ ‘क्रूर मजाक’ करार दिया है. पार्टी नेता शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस के नेताओं को आज महंगाई भी दिखाई नहीं दे रही है. महंगाई बढ़ने को ये उपलब्धि के तौर पर गिन रहे हैं. इससे उनकी सोच का पता चलता है. इससे बढ़कर कोई बुरी बात नहीं हो सकती है. आज खाद, बीज, बिजली सभी महंगे हो गए हैं. कांग्रेस आम आदमी की बात तो करती है लेकिन आम आदमी से काफी दूर चली गई है. बीजेपी नेता मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा कि ‘केंद्र की मौजूदा सरकार महंगाई माफियाओं को संरक्षण देती है. महंगाई बढेगी तो किसान आत्‍महत्‍या करेंगे. आम आदमी त्राहि त्राहि करेगा तो सरकार खुश होगी. महंगाई का मोगैंबो खुश हुआ.’

यूपीए को समर्थन दे रही सपा ने केंद्रीय मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की है. सपा नेता आजम खान ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री का बयान दुर्भाग्‍यपूर्ण है. उनके बयान की जांच होनी चाहिए. जद(यू) नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, कांग्रेसियों का सिद्धांत है कि महंगाई का बढ़ना तरक्‍की का लक्षण है. बेनी प्रसाद कहते हैं कि महंगाई बढ़ने से किसानों को फायदा होगा. उन्‍हें इसकी जानकारी होनी चाहिए कि किसान सिर्फ विक्रेता ही नहीं है, बल्कि खरीदारी भी करते हैं. महंगाई बढ़ने से किसानों की जरूरत की चीजें भी महंगी हो रही हैं. बीएसपी नेता सुधीन्‍द्र भदौरिया ने कहा कि महंगाई से गरीबों का जीना मुश्किल हुआ है. जिनकी जेब में पैसा है, उन पर महंगाई बढ़ने का कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जिनकी जेबें खाली हैं, उन पर बुरा असर पड़ता है.

बेनी ने महंगाई पर बयान देते समय सपा मुखिया मुलायम सिंह को भी आड़े हाथ लिया. मुलायम ने ने कहा था कि अगले आम चुनाव में केंद्र में कांग्रेस या बीजेपी की नहीं बल्कि तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी और इसमें सपा की अहम भूमिका होगी. बेनीप्रसाद ने मुलायम सिंह को  पगलाया और सठियाया हुआ भी बताया. दिल्‍ली में सरकार बनाने का मुलायम का सपना कभी पूरा नहीं होगा.’ सपा नेता मोहन सिंह ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि केंद्रीय मंत्री को कैबिनेट से हटाया नहीं गया तो वह केंद्र सरकार को अपने समर्थन पर फिर से विचार करेंगे.

फिलवक्त महंगाई पर काबू पाना तो दूर, सरकार ने अभी इसके और बढ़ने के संकेत दिए हैं. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था की मध्यावधि समीक्षा देश के सामने रखते हुए यह साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ेगी. परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने इसके लिए कमजोर मानसून को जिम्मेदार बताया. और कहाकि ग्‍लोबल मंदी ने भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी कर दी है.

रंगराजन ने कहा, इस वर्ष मानसून सामान्य से 16 फीसदी कम रहा है, जिसमें सुधार न आने पर लोगों की चिंता बढ़ेगी. मतलबखाद्य पदार्थो का महंगा होना तय है. इसके साथ ही अन्य वस्तुओंपर भी इसका असर पड़ेगा. परिषद ने अर्थव्यवस्था को धीमेपनसे उबारने के लिए डीजल व रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने जैसे सुझाव भी दिए. रंगराजन ने पत्रकारों से बातचीत मेंअर्थव्यवस्था को उबारने में तीन चुनौतियां (मुद्रास्फीति,राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा) बताईं. ब्याज दरों मेंकटौती के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल महंगाई स्थिर है, अगर आगे भी यह स्थिर रहती है तो आरबीआई के पासब्याज दर घटाने की गुंजाइश होगी.

एक तरफ सरकार महंगाई के और बढ़ने के संकेत दे रही है वहीँ आंकड़ों में वह महंगाई को घट रहा बता रही है. बाजार में आज चीजें भले ही पहले से महंगी मिल रही हों, लेकिन सरकारी आंकड़ों में जून महीने के मुकाबले जुलाई महीने में महंगाई कम रही. पिछले सप्‍ताह जारी हुए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून में महंगाई दर 7.25 फीसदी थी जो जुलाई में 6.87 फीसदी हो गई. थोक मूल्यसूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति जून में 7.25 फीसदी और पिछले साल जुलाई में 9.36 फीसदी रही थी. अगर खाद्य मुद्रा स्फीति की बात की जाए तो यह जुलाई महीने में घटकर 10.06 फीसदी रहीजो जून में 10.81 फीसदी पर थी. पिछले साल जुलाई में इस वर्गमें मुद्रा स्फीति 8.19 फीसदी पर थी. थोक मूल्य सूचकांक मेंखाद्य जिंसों का हिस्सा 14.3 फीसदी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.