/पेट्रोल, डीज़ल तथा रसोई गैस महंगे होंगे…

पेट्रोल, डीज़ल तथा रसोई गैस महंगे होंगे…

महंगाई की मार से हाहाकार कर रही जनता की फिर से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमते बढ़ा कर कमर तोड़ने का इंतजाम इसी मानसून सत्र के तुरंत बाद कभी भी हो सकता है. सूत्रों के अनुसार सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अगले महीने डीजल व पेट्रोल के दामों का बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है. उनकी योजना पेट्रोल की कीमत पांच रुपये और डीजल की तीन रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने की है. इस वृद्धि के पीछे कच्चे तेल के दाम ऊंचाई पर पहुंचने और कमजोर मानसून और बिजली कटौती के चलते डीजल की खपत बढ़ने के तर्क दिए जा रहे हैं.

सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोलियम मंत्रालय पर जबरदस्त दबाव बनाए हुए हैं. लागत से कम मूल्य पर पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री के चलते सबसे बड़ी तेल मार्केटिंग फर्म इंडियन ऑयल ने पिछली तिमाही में देश की किसी कंपनी द्वारा दर्ज सबसे बड़ा घाटा दिखाया है. भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम समेत तीनों तेल कंपनियों का सम्मिलित घाटा पिछली तिमाही में बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये के पार चला गया.

अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल व डीजल के दामों में वृद्धि से अब किसी सूरत में बचना मुश्किल है. संसद के मानसून सत्र के बाद राजनीतिक नेतृत्व को केवल यही फैसला करना है कि यह बढ़ोतरी कब और कितनी की जाए. मानसून सत्र सात सितंबर को समाप्त हो रहा है. डीजल, रसोई गैस और केरोसीन के दाम पिछले 14 माह से नहीं बढ़े हैं. वहीं, कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन माह के ऊंचे स्तर 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है.

सरकार केरोसीन को भले ही छोड़ दे, लेकिन रसोई गैस के दामों में भी वह 50 से 100 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर सकती है. इतना ही नहीं, सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या भी प्रति परिवार एक साल में चार से छह तक सीमित करने का एलान किया जा सकता है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) ने भी बीते हफ्ते आई अपनी रिपोर्ट में पेट्रो उत्पादों के दामों में वृद्धि की वकालत की है. इतना ही नहीं, पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) ने भी सरकार को अर्थव्यवस्था का डीजलीकरण होने की चेतावनी दी है. पीपीएसी का कहना है कि डीजल अब पेट्रोल और फर्नेस ऑयल ही नहीं, बल्कि सीएनजी की जगह इस्तेमाल होने लगा है. इसके चलते डीजल की खपत बड़ी तेजी से बढ़ रही है. इस साल जून में इसकी खपत में 13.7 फीसद का इजाफा दर्ज हुआ है. देश के कई हिस्सों में सूखे व बिजली की कमी के चलते जुलाई के बाद से डीजल खपत में और तेज बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.