/मतंग के पूर्व कर्मचारी का गंभीर आरोप, देर रात घर बुलाता था महिला कर्मचारी को

मतंग के पूर्व कर्मचारी का गंभीर आरोप, देर रात घर बुलाता था महिला कर्मचारी को

(यह पत्र मतंग सिंह के एक पूर्व कर्मचारी होने का दावा करने वाले शख्स ने कमेंट के जरिए भेजा है। मीडियादरबार.कॉम ने मतंग सिंह से संपर्क करने की बहुत कोशिशें की, लेकिन वे जवाब देने के लिए लाइन पर नहीं आए)

क्रूर वहशी राजा और पॉजीटिव मीडिया ग्रुप के चेयरमैन मतंग सिंह, की सच्चाई को उजागर करने के लिए मीडिया दरबार को पूर्व कर्मचारी के तरफ से बहुत- बहुत बधाई .. मैं उन बंधुओं जो बहशी मंतंग सिंह की मुखालफत करतें हैं या उनके बारे में सच को जानने के बाद भी सच से मुह मोड़ रहें उससे निवेदन है कि सच से मुकाबला करने की हिम्मत रखें, जुर्म करने से ज्यादा जुर्म को सहना बड़ा पाप है, इसलिए आप इस जुर्म का भागीदार मत बनें… क्योंकि आपको नौकरी कंही भी मिल जाएगी लेकिन जिनके साथ ना इन्साफी हो रही है उनको इन्साफ नहीं मिल पाएगी…

यह बात जग जाहिर है कि मतंग सिंह ने बिहार के हाजीपुर से छपरा और फिर असम से लकड़ी और कई गैर कानूनी चीजों (जिसका जिक्र यंहां करना सही नहीं है ) की तस्करी कर अपने जीवन की ओछी राजनीति शुरू की… जिसका फायदा उन्होंने नरसिम्हा राव सरकार में खूब किया पीएमओ से लकेर शाख पत्र घोटाला तक।

ना सिर्फ घोटाला और पैसे के बल पर इन्होने काले धन का साम्रज्य खड़ा किया बल्कि… नरसिम्हा राव से लेकर पीएमओ तक को अपने घटिया नज़रों का शिकार बनाया… गौर करें की उस मंत्रालय में उस वक़्त कितने कर्मचारी थे और उस कर्मचारी में आईएएस से लेकर छोटे कर्मचारी में किन लोगो की तरक्की की गई और किन्हें निकाल बहार किया गया…?

यहां नजरों का मतलब आप समझ सकते हैं… और उस जमीर को फोकस तक जारी रखा है… क्या रात के सानात्ते में अपने आवास में बुलाकर बंद कमरों में कम कपड़ो में.. आइटम सोंग पर अपने सामने महिलाओं कर्मचारी से डांस करवाना, यह पत्रकार या चैनल मालिक और बहशी राजा का अच्छा करतूत मान रहें हैं…? सवाल यही कि कब तक हम शोषित होना चाहतें हैं? अगर ऐसा है तो आपकी जमीर में.. इंसानियत वहशी और लालची को समझने और सोचने की शक्ति खत्म हो गई है.. और जब यह सारी चीज़े खत्म हो जाती है तो हमें एक मानसिक बीमारी सामने नजर आती है (?)

और इस बार कांग्रेस में द्दिगी राजा को प्रोलोभन और झूठा सब्जबाग दिखाकर इन्होने कैमरे की सामने वैसी बात रखा और दुष्प्रचार कर दिया की वो कांग्रेस में शामिल हो गए हैं… ताकि इसका गलत इस्तेमाल किया जाय.. खैर यह बात सोनिया से लेकर राहुल तक अच्छी तरह जानतें हैं इसलिए मनीष तिवारी को यह सफाई देनी पड़ी कि यह बात झूठी है और गलत फायदे के लिए यह हथकंडे अपना रहें हैं बाबा मतंग…

इसलिए अब मतंग की कट गई है पतंग… मतंग जी मेरा आपसे यही सुझाव है की हवा में लहराने की लालसा है तो आसमान और हवा की रुख को समझने की जरूरत है… भले इंसान की तरह जीना सीखिए ईमानदारी और मेहनत से बनाई गई सत्ता और नाम कभी नहीं बिखरते… वैसे भी… हमें तो अपने सारे भले और बुरे कामों का हिसाब देना पड़ता है.. हलाकि यंहा आपसे कोई हिसाब नहीं मांगेगा लेकिन वंहा बिना हिसाब मांगें ही आपको सब कुछ बताना है… वैसे में पूर्व कर्मचारी हूँ और इस वादे के साथ अपनी बातें को बिराम देता हूँ की तेरी गलियों में ना रखेंगें कदम….. के साथ आपकी उज्जवल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ …. जय हिंद जय मानव …

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.