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हरियाणा न्यूज़ की सीओओ शीतल लूथरा और चीफ एडिटर उमेश जोशी जल्द हो सकते हैं गिरफ्तार

हरियाणा न्यूज़ के चीफ एडिटर उमेश जोशी

गीतिका शर्मा आत्महत्या केस में संभावना है कि दिल्ली पुलिस किसी भी समय हरियाणा न्यूज़ चैनल की सीओओ शीतल लूथरा और चीफ एडिटर उमेश जोशी को हरियाणा के पूर्व गृह राज्यमंत्री और एमडीएलआर एयरलाइंस के मालिक गोपाल गोयल कांडा को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार कर सकती है.

गौरतलब है कि हरियाणा के पूर्व गृह राज्यमंत्री गोपाल गोयल कांडा गिरफ़्तारी से पहले जिस बेंक्वेट हॉल में छुपा था वहाँ से दिल्ली पुलिस के समक्ष समर्पण करने के लिए जाने के सभी रास्तों पर पुलिस चाक चौबंद थी और नाकाबंदी के ज़रिये हर आने जाने वाली गाड़ी पर पैनी  निगाह रखे थी. ऐसे में गोपाल कांडा को एक ऐसी गाड़ी की जरूरत थी जो उसे रास्ते में गिरफ्तार होने से बचा सके. इसके लिए कांडा के न्यूज़ चैनल हरियाणा न्यूज़ ने अपनी गाड़ी उपलब्ध करवाई थी जिसमें बैठ कर गोपाल कांडा अशोक विहार के डीसीपी ऑफिस तक सुरक्षित पहुंचा था. यह गाड़ी हरियाणा न्यूज़ चैनल ने इस बात को जानते बुझते मुहैय्या करवाई थी कि गोपाल कांडा दिल्ली पुलिस का भगौड़ा घोषित अपराधी है और उसके खिलाफ दिल्ली की रोहिणी अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी कर रखें हैं.

याद रहे कि गोपाल कांडा अदालत में बारम्बार यह राग आलाप रहा है कि “उसे पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया बल्कि वह खुद अशोक विहार के डीसीपी ऑफिस समर्पण करने पहुंचा था, यदि वह अपराधी होता तो खुद समर्पण करने क्यों जाता. वह तो अपनी अग्रिम जमानत के आदेश होने का इन्तजार कर रहा था और अदालत द्वारा उसकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होते ही वह दिल्ली पुलिस के पास पहुँच गया और आत्मसमर्पण कर दिया.”

दिल्ली पुलिस का मानना है कि यदि गोपाल कांडा को हरियाणा न्यूज़ अपनी गाड़ी उपलब्ध नहीं करवाता तो कांडा रास्ते में ही गिरफ्तार हो जाता. यही नहीं उस समय कांडा के साथ आये समर्थकों ने अशोक विहार के डीसीपी ऑफिस के समक्ष जो अफरा तफरी जैसी स्थिति पैदा की थी उसकी जिम्मेदारी भी गोपाल कांडा को अशोक विहार के डीसीपी ऑफिस तक गिरफ्तारी से बचा कर सुरक्षित पहुँचाने वालों की है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.