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संघोई गाँव के सरपंच को बचा रहे हैं अफसर…

By   /  August 24, 2012  /  1 Comment

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डी.डी.पी.ओ. की टेबल पर धूल फांक रही है समाज कल्याण अधिकारी और बी.डी.पी.ओ. की रिपोर्ट
मृत लोगों क़ी पेंशन तक खाई गई सरपंच के द्वारा किन्तु डिप्टी कमिश्नर रेनू एस. फुलिया सबूत होते हुए भी नही कर रहीं सरपंच के खिलाफ कोई कारवाई ?

करनाल, (अनिल लाम्बा) : आरोपों के बीच फसनें के बाद भी संघोई गांव के सरपंच के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई है. डी.सी. को आवेदन दिए 4 माह से अधिक लंबा समय गुजर चुका है, लेकिन सरकारी कार्रवाई मंथर गति से खिसक रही है. डी.डी.पी.ओ. की टेबल पर सरपंच के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बी.डी.पी.ओ. ने रिपोर्ट पेश कर दी, लेकिन यह रिपोर्ट फाईलों में धूल खा रही है. डी.सी. के पास अभी तक डी.डी.पी.ओ. ने रिपोर्ट नही भेजी. इसके साथ ही सरपंच के खिलाफ जिला समाज कल्याण अधिकारी ने भी रिपोर्ट तैयार कर दी है. जिसमें मृत व्यक्तियों क़ी पैंशन को सरपंच द्वारा खा लिए जाने के घोटाले का भी उल्लेख है. इसके बाद भी प्रशासन सरपंच को बचा रहा है. इसके कारण लोगों का भरोसा सरकारी मशीनरी पर से उठता जा रहा है. सरपंच के कार्यकाल में खरीद के साथ-साथ निर्माण कार्यों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई है.

शिकायतकर्ता ने इसकी रिपोर्ट डी.सी. सहित तमाम अधिकारियों को भी दी, लेकिन सरकारी कार्यवाही जिस गति से चल रही है उसके चलते आने वाले समय में भी सरपंच के खिलाफ कार्रवाई होने के आसार नही है. शिकायतकत्र्ता सुभाष ने बताया कि 4 माह से वह सरकारी अधिकारियों के यहां हाजिरी लगाते-लगाते परेशान हो गए, लेकिन गांव के लोगों को न्याय नही मिल पा रहा है. सरपंच के खिलाफ सबूत के साथ उन्होंने आरोप पत्र अधिकारियों को दिए. अधिकारी भी आरोपों की पुष्टि करते है. अधिकारियों का मानना है कि सरपंच के खिलाफ पर्याप्त सबूत है इसके बाद भी सरपंच के खिलाफ कार्रवाई न होना सरकारी मशीनरी की विफलता को साबित करती है.

इस संबध में जब जिला समाज कल्याण अधिकारी बलजीत सिंह से बात की तो उन्होने कहा कि उन्होने रिपोर्ट तैयार कर डी.सी. कार्यालय को भेज दी है. उन्होनें पैंशन घोटाले में सरपंच से रिकवरी की भी सिफारिश की है. इसके बाद जब डी.डी.पी.ओ. दिलीप सिंह खत्री से बातचीत की तो उन्होनें बताया कि वह मीटिंग में व्यस्त है. इसलिए वह इस मामले में कोई जानकारी नही दे पाऐगें. इससे पहले बी.डी.पी.ओ. नरेश शर्मा व समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि उन्होनें अपनी तरफ से रिपोर्ट डी.डी.पी.ओ. को भेज दी है.

इस मामले में जब डी.सी. रेणू. एस. फुलिया से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने सरपंच को सस्पेंड कर दिया है किन्तु जब उनसे ये पूछा गयाकि सरपंच जिसको सस्पेंड किया है आपने उसका नाम बताइए इस सवाल पर वो बगलें झांकते हुए अपना फोन काट गयीं अब यहाँ ये सवाल उत्पन्न होता है कि जब सस्पेंड किया ही नहीं तो ड़ी. सी. रेनू एस. फुलिया ने झूठ क्यों बोला | यहां उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त के आदेशों का अफसरों पर कोई प्रभाव नही पड़ रहा है. अधिकारी अपनी तरफ से मनमानी कर रहे है. अनियमितताओं में लिप्त सरपंचों को बचा रहे अधिकारियों पर भी सरकारी गाज गिरने की संभावना बनी हुई है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Kunwar Sen says:

    uper se lekr neeche tk sb currapt baithe h.

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