/यूपीए सरकार ने ट्विटर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अकाउंट्स भी ब्लाक करवाए….

यूपीए सरकार ने ट्विटर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अकाउंट्स भी ब्लाक करवाए….

भारत सरकार ने माइक्रो ब्लॉगिंग साईट ट्विटर को उसके खिलाफ कार्रवाई की धमकी देकर झूठी अफवाहें फ़ैलाने वाले अकाउंट्स के साथ साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के ट्विटर अकाउंट्स भी ब्लाक करवा दिए हैं.  पूर्वोत्तर के नागरिकों के खिलाफ फैल रही अफवाहों को रोकने की आड़ में ब्लाक किए गए अकाउंट्स में संघ परिवार के मुखपत्र पाचजन्य और प्रवीण तोगड़िया के अकाउंट भी शामिल हैं.

दूरसंचार मंत्रालय ने 18 अगस्त से 21 अगस्त के बीच इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों को कई ट्विटर अकाउंट्स ब्लाक करने के निर्देश दिए हैं. मंत्रालय ने फेसबुक और यूट्यूब पर सैकड़ों वेबपेज और ब्लाग पोस्ट्स को ब्लाक करने के भी निर्देश दिए हैं. माना जा रहा था कि पूर्वोत्तर के नागरिकों के खिलाफ अफवाहें फैलाने और साप्रदायिक तनाव बढ़ाने में इनका इस्तेमाल किया जा रहा था. 18 अगस्त को मुंबई में विरोध के हिंसक हो जाने के बाद सरकार ने कहा था पाकिस्तान स्थित समूहों द्वारा घृणा पैदा करने वाली सामग्री फैलाई जा रही है.

दूरसंचार मंत्रालय ने जिन अकाउंट्स को बंद करने के निर्देश दिए हैं, उनमें अधिकतर प्रधानमंत्री कार्यालय के फर्जी अकाउंट्स है. ट्विटर और फेसबुक को भेजे दिशा-निर्देश में सरकार ने कुछ शब्दों को सर्च कर उसे ब्लॉक करने को कहा है. निर्देश में सिर्फ यह कहा गया है कि इन अकाउंट्स को बंद करने का फैसला लिया गया है. अकाउंट्स बंद करने की वजह नहीं बताई गई है.

विभिन्न सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइटों ने गृह मंत्रालय के निर्देश पर 282 वेबसाइटों व वेबपेजों को प्रतिबंधित कर दिया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.