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संचार राज्यमंत्री मिलिंद देवड़ा का ट्विटर अकाउंट भी सस्पैंड…

फेसबुक के पन्नों और ट्विटर अकाउंटों को बंद करने की बेवकूफाना मारा मारी के बीच में केंद्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के राज्य मंत्री मिलिंद देवड़ा का ट्विटर अकाउंट भी अस्थायी रुप से बंद हो गया है. इस बारे में ट्विटर पर कई बातें चल रही है लेकिन जब पत्रकारों ने मिलिंद देवड़ा से एसएमएस के ज़रिए संपर्क किया तो उनका जवाब था, ” मेरा अकाउंट अस्थायी रुप से सस्पेंड हुआ है. सत्यापन प्रक्रिया के लिए. ये ब्लॉक नहीं हुआ है.”

अभी ये साफ नहीं है कि मिलिंद देवड़ा का ट्विटर हैंडल सरकारी आदेश से सस्पेंड हुआ है या ट्विटर ने ही उनके अकाउंट को निलंबित किया है लेकिन ये साफ है कि मिलिंद देवड़ा का ट्विटर हैंडल निलंबित यानी संस्पेंडेड है.  मिलिंद देवड़ा ने गुरुवार को ही ट्विटर पर सरकार की ओर से कुछ ट्विटर अकाउंटों को बंद करने के फैसले का बचाव किया था जिसके बाद ट्विटर पर मिलिंद देवड़ा की कड़ी आलोचना हुई थी.

अब शुक्रवार को मिलिंद देवड़ा का ट्विटर हैंडल @milinddeora काम नहीं कर रहा है. अगर आप ट्विटर पर मिलंद देवड़ा को खोजते हैं तो वो संदेश देता है कि ये अकाउंट निलंबित कर दिया गया है.

वाल स्ट्रीट जर्नल अखबार से बातचीत में गृह मंत्रालय के प्रवक्ता कुलदीप धतवालिया ने कहा है कि उन्हें मिलिंद देवड़ा का ट्विटर बंद किए जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन इस मुद्दे पर ट्विटर में काफी बात चल रही है.

लोग इस बारे में लगातार ट्विट कर रहे हैं और सरकार की एक बार फिर कड़ी आलोचना हो रही है. इससे पहले असम मामले में सरकार ने कुछ ट्विटर अकाउंट बंद करवाए थे जिसमें पत्रकार शिव अरुर और कंचन गुप्ता के ट्विटर अकाउंट भी शामिल हैं और अल जजीरा का ट्विटर एकाउंट भी.

हालांकि मिलिंद देवड़ा ने कल के अपने ट्विट में कहा था कि सरकार की मंशा सोशल मीडिया की आज़ादी छीनने की नहीं है. उनके इस बयान पर ट्विटर पर लोगों ने उनकी आलोचना की थी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.