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गोपाल कांडा मेरी औलाद का नाजायज़ पिता: अंकिता सिंह

By   /  August 25, 2012  /  6 Comments

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जिस दिन से गीतिका शर्मा आत्महत्या प्रकरण सामने आया है, गोपाल कांडा और उसकी ऐयाशी की रंगबिरंगी कहानियाँ भी सामने आ रहीं हैं. गीतिका शर्मा ने अपने आत्महत्या पूर्व लिखे गए नोट में जिस अंकिता सिंह और गोपाल कांडा से अंकिता की संतान का जिक्र किया था उसकी लब्बो लुआब जानकारी हम आपको मुहैया करवा रहे हैं. यहाँ हम यह भी दर्ज करवा रहें हैं कि अंकिता सिंह और गोपाल कांडा में से दोनों ने कहीं भी नाजायज़ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है. जबकि अंकिता सिंह ने गोपाल कांडा के साथ नाजायज़ सम्बन्धों के चलते ही संतान पैदा की और दो शादी लायक बेटियों के पिता की संतान की बिन ब्याही माँ बनी. हम इस संतान को नाजायज़ नहीं मानते क्योंकि संतान कभी नाजायज़ हो भी नहीं सकती बल्कि नाजायज़ होते हैं वे माता पिता जो जायज़ रिश्तों के बिना नाजायज़ या अवैध तरीके से संतान का बीज बो देते हैं. जब एक बार धरती में किसी भी तरीके से बीजारोपण हो जाता है उसके बाद प्रकृति अपना काम करती है और प्रकृति प्रदत्त कुछ भी शै नाजायज़ नहीं होती. इन्ही सब बातों के मद्देनज़र हमने शीर्षक में गोपाल कांडा को नाजायज़ पिता लिखा है…

गोपाल कांडा की रंगरेलियों हर रोज एक नयी परत खुल रही है. ‘हेडलाइंस टुडे’  न्यूज़ चैनल ने दावा किया है कि गोवा में कांडा का केसिनो चलाने वाली अंकिता सिंह ने कबूल किया है कि गोपाल कांडा से उसे एक संतान है. ‘हेडलाइंस टुडे’ ने अंकिता सिंह के इस दावे से जुड़े दस्‍तावेज अपने हाथ लगने का दावा किया है. चैनल के मुताबिक गोवा पुलिस को लिखे पत्र में अंकिता ने यह सनसनीखेज सच कबूल किया है. अंकिता सिंह गोपाल गोयल कांडा को जी. वी. गोयल के नाम से बुलाती थी. गीतिका के सुसाइड नोट में भी लिखा था कि गोपाल कांडा और अंकिता के बीच रिश्ते थे. नोट में यह भी लिखा था कि गोपाल कांडा से अंकिता की एक बेटी भी है. सतना की रहने वाली अंकिता सिंह इस वक्‍त सिंगापुर में है तथा उसने दिल्ली पुलिस को विश्वास दिलाया है की वह सिंगापुर से लौटते ही गीतिका मामले में दिल्ली पुलिस की जाँच में पूरा सहयोग करेगी.

वहीं, एक मेल के ज़रिये पता लगा है कि है कि गीतिका आत्महत्या मामले में घिरे गोपाल कांडा के रिश्ते सतना से काफी पुराने हैं. मेल में बताया गया है कि अंकिता सिंह के पिता प्रभाकर सिंह रामपुर बाघेलान के महुरछ इलाके में कभी टायर का कारोबार करते थे . मूल रूप से वे बांदा निवासी रहे और उस दौर में वे सतना आ गये थे. इनका रवैया दिखावा भरा होता था और इन्होंने उस दौर में गोया जैसे लाइसेंस हासिल करके अपना ओहदा इतना ऊपर उठा लिया था कि उनके लिये बड़ी बड़ी कंपनियां अपने खास लोगों को उन तक भेजती थी. हालांकि यह पूरा कारोबार कागजी था. दिखावे की दुनिया में जीने वाले प्रभाकर सिहं का रहन सहन उनकी आर्थिक स्थिति से कुछ ज्यादा ही रहा करता था. इसकी चमक दमक से ही वे अपना रसूख बनाते थे.

उनकी तीन बेटियां थी. ये तीनों भी पिता के ही पद चिन्हों पर चलने में विश्वास रखती थी और उस दौर में उनका पहनावा आज के दौर के समतुल्य था. आये दिन पार्टियां करना और रसूखदारों को उसमें बुलाना इनका पसंदीदा शगल था. शहर में दिनभर इस बात की चर्चा रहती थी. इनकी पार्टियों में शामिल होने वालों में सिंह मशीनरी के राजीव सिंह, कभी टीआई रहे और अब नेता बने अखण्ड प्रताप सिंह प्रमुख रहे. इस परिवार का लगाव शराब कारोबारी कुलदीप सिंह से भी काफी रहा और इनके रिश्ते चर्चित भी खूब हुए ( हालांकि यह अभी अपुष्ट है ). बाद में इस परिवार की बड़ी लड़की ने यहीं रामपुर में शादी कर ली. उनके पति का नाम वैभव सिहं बताया जा रहा है जिनका हाल निवास बस स्टैण्ड के पास की कालोनी में होने की बात कही जा रही है. उधर वक्त के साथ यह परिवार बिखराव के दौर से गुजरने लगा और आकांक्षाएं आसमान छू ही रही थी. प्रभाकर दंपति में भी तनाव होने लगा था. स्थितियां संभलते न देख यह परिवार बाद में यहां अपना सबकुछ बेच कर दिल्ली चला गया.

इस दौर तक परिवार की सबसे छोटी बेटी अंकिता भी दुनियादारी समझने लगी थी और आसमान की उंचाइयों में अपना अक्स देखने लगी थी. दिल्ली जाते ही इसके परों को और फैलाव मिल गया और वह सतना की पार्टियों का और बड़ा कद करके वहां की पार्टियां ज्वाइन करने लगी. इसी बीच इनकी पहचान बढ़ी और एक दिन अंकिता गोपाल कांडा के गुड़गांव स्थित फार्महाउस की पार्टी की ज्वाइन करने गई. वहां जैसे जैसे मस्ती का दौर और सुरूर बढ़ता गया अंकिता के कदम भी थिरकने लगे. यह थिरकन उसे गोपाल कांडा तक ले गई. खूबसूरत और हसीन जिस्म का शौकीन कांड़ा यहीं पर अंकिता से पहली बार रू-ब-रू हुआ और फिर उसे अपनी एअर लाइन कंपनी में ज्वाइन करने का आफर दे दिया. अंकिता को यह ऊंचाई रास आई और उसने कांडा की कंपनी के साथ उसे भी ज्वाइन करना शुरू कर दिया. कांडा की नजदीकी का लाभ उसे मिलने लगा और कांडा ने उसे गोवा में न केवल काफी संपत्ति दी बल्कि उसे अपने केसीनो का भी हेड बना दिया.

(इस लेख में सतना पोस्टमार्टम को मिले मेल के तथ्य उल्लेखित किये गए हैं)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

6 Comments

  1. in netaon ka kooch nahi hoga saale dhan ke bal par nikal jaayenge.

  2. Ashok Goel says:

    aisae logo ko rajniti mae aanae sae roka jana chahiyae.

  3. subodh chansoriya advocate RHC jaipur says:

    दुनिया कितनी गलत हो गयी ह आज जिनको अपराधी ख रही हो क्या उन ओरधो म किसी और का साथ नि था कोई बिना मर्जी क क्या माँ बन सकती ह अपने ऐसोआरम क लिए सेक्स करने वाली औरत अब क्यूँ मीडिया म पुकार रही ह क्या वो दोषी नही हai

  4. VIJAY KUMAR MEHTA says:

    अंकिता का सम्बन्ध, नुपुर मेहता का बयां व गीतिका sucide साफ़ दर्शा रहा है की गोपाल कंदा बहुत हे शौक़ीन व अयाश vayaktive है खुशबु को भी तो खुश किया होगा? परन्तु एक बात तो है ऐसे व्यक्ति की रेमंड कोर्ट को ७ दिन की देनी चाहेये थी, ३ दिन की नहीं. बहुत काम है Delhi Police के पास, पर एक बात क्यों नहीं बुलाते अंकिता को एक दम तीन दिन हो गए हैं और वोह आ रही है नेपाल मैं है, कहाँ है खुशबू? नुपुर मेहता का बयां क्यों नहीं लिया अभी तक? और ओवर & Above कंदा को तगड़ा डंडा क्यों नहीं देते, काया आम आदमी को हे पोलिसे डंडा दे सकती है, अरे सख्ती से कम लेते तो १९ दिन मे यह केस सोल्व हो जाता. १२ दिन पकड़ा नहीं गया या पकड़ा नहीं? ७ दिन मे रिमांड सख्ती से नहीं हुए, कुछ तो है? अगर अब भी जुदिसरी नै ७ दिन की रिमांड नहीं दी तो इसका मतलब साफ़ है कोर्ट सतिस्फ़िएद नहीं है डेल्ही पोलिसे से. कंदा निकल जाये गा मक्खन से बल की तरेह, पता नहीं क्यों ऐसा लगता है. परन्तु पोलिसे बड़ी बड़ी बाते कर रही है और कांफिडेंट है पर दिल है की मानता नहीं क्यों की पोलिसे भी गोवत. मचिनेरी का हिस्सा है, उन पर भी बहुत प्रेसुरे है इन राज नेताओ का क्यों की यह सारे मिले ही हैं चाहे वोह स्टेट या सेंटर govt हो.

  5. Giteeka ko insaf milna chayae.

  6. madam ab kyin bta rhe ho pahle kyon chup the aap.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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