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सुशासन बाबू के राज में दो साध्वी बहनों के साथ दस लोगों किया सामूहिक दुष्कर्म…

By   /  August 28, 2012  /  3 Comments

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सुशासन बाबू के राज में बिहार के भागलपुर जिले के शिवनारायणपुर सहायक थाना क्षेत्र के रामपुर गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर दुर्गम इलाके में स्थित संतमत सत्संग आश्रम में दो साध्वी बहनों के साथ गैंग रेप किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पीड़िता साध्वी बहनों नीलिमा और नलिनी (दोनों काल्पनिक नाम) ने आश्रम के दो साधु सहित छह लोगों को नामजद व तीन अन्य के खिलाफ थाने में मामला दर्ज कराया है. घटना के बाद स्थानीय लोगों में आरोपियों के खिलाफ भारी गुस्सा है. सभी आरोपी गिरफ्तारी के भय फरार हो गये हैं. पुलिस अपने वरिष्ठ अधिकारियों की देख-रेख में लड़की का मेडिकल जांच करने में जुटी हुई है.

पीड़िता साध्वी बहनों ने मीडिया को बताया कि आश्रम में वे अकेली रहती थीं. रविवार की शाम अंधेरा होने के पश्चात मुंह पर कपड़ा बांधे 9-10 लोग आश्रम में प्रवेश कर गए और उनके साथ करीब छह घंटे तक बारी-बारी से दुष्कर्म किया. नीलिमा ने बताया कि इसमें आश्रम के दो साधु विवेकानंद और अज्ञानंद के अलावा घनश्याम मंडल, पंकज कुमार, प्रेम यादव और रत्ना पासवान थे, जबकि दो-तीन अन्य लोगों को नहीं पहचान पाई. दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने के बाद वे उन्हें बदहवास हालत में छोड़ फरार हो गए.

पीड़िता के मुताबिक आश्रम से सटे आरोपी घनश्याम मंडल की जमीन है. वह आश्रम की जमीन को हड़पना चाहता है. आए दिन दोनों बहनों के उपर छींटाकशी करता रहता था. इस बात को लेकर दोनों ने थानेदार से शिकायत की थी.

थानाध्यक्ष निर्मल कुमार ने बताया कि दोनों बहनों ने थाने पर आकर मौखिक रुप से तंग व परेशान करने की बात कही थी, लेकिन लिखित आवेदन नहीं दिया था. उन्होंने दोनों बहनों से कहा था कि आश्रम के साधु के हरिद्वार से लौटने तक अपने घर चले जाएं, लेकिन उन लोगों ने जाने से इंकार कर दिया था. यहाँ उल्लेखनीय है कि पिछले दो-तीन महीने से आश्रम के स्वामी हरिद्वार की यात्रा पर हैं.

संतमत सत्संग आश्रम में आश्रम के स्वामी राजेश्वरानंद ने दो वर्ष पूर्व मनिहारी (कटिहार) थाना क्षेत्र के बाघमारा गांव से दोनों बहनों को साध्वी बनाने के लिए लाया था और तब से वे आश्रम में रह कर सत्संग करती थीं. भक्तगण दिनभर आश्रम में रहने के बाद शाम अपने-अपने घर चले जाते थे.

केएस अनुपम, एसएसपी, भागलपुर ने मीडिया को बताया कि दोनों पीड़ित बहनों की मेडिकल जांच कराई जा रही है और दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद आरोपियों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. संषद में जो अव्यवहारिक अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है उसके पीछे पि .एम् पद का लालच है !कांग्रेस में तो सब को पता है की अगले पि.एम् के दावेदार राहुल गाँधी होंगे ,पर भाजपा में इसके लिए काफी खीच तन है जिसमे प्रधानमंत्री के लिए एक और दावेदार हो गए हैं जिनका नाम है “मोटा माल”[MOTA MAAL ]अर्थात श्रीमती शुश्मा स्वराज .

  2. long time ago in Bihar return 'JANGALRAJ'?

  3. ये सुच है की जिस सुशां का वादा कर नितीश बाबु सत्ता में आये {नितीश बाबु का नामे इसलिए कह रहा हु की वोते उन्हें ही मिला NDA को नहीं}वो अब बिहार में सपने की तरह हो गया है ,अपराध दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं ,अपराधी बेलगाम हो चुके हैं उन्हें पोलिसे का भय रह नहीं गया है !मुझे यद् आता है सिटी एस .पि.श्री किशोरे कुनाल और डॉ.अजय कुमार जी का समय जब अपराधी खुद सरेंडर कर जाता था या शहर ही नहीं राज्य छोरकर भाग जाता था !वो भी तो इसी सिस्टम का हिस्सा थे फिर उस वक़्त और आज में ऐसा क्या अंतर हो गया की अपराधी में पुलिस का कोई खौफ ही नहीं ?मुख्यमंत्री जी भूल रहे हैं की इसी खौफ ने लालू यादव जी का तख्ता पलट किया ,और नितीश बाबु मुख्यमंत्री बने और कोई कारन नहीं था ,ये वो भी जानते हैं भले स्वीकार न करें .विकाश की बात तो बहुत बाद में आता है ,जनता सबसे पहले अमन और चैन से जीना चाहती है.अभी वक़्त है नितीश बाबु चाहे तो सभाल सकते हैं ?

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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