/धवल और आरती बने ‘खतरों के खिलाड़ी टौर-4’ के चैम्पियन, लेकिन दर्शकों का रिस्पॉन्स रहा फीका

धवल और आरती बने ‘खतरों के खिलाड़ी टौर-4’ के चैम्पियन, लेकिन दर्शकों का रिस्पॉन्स रहा फीका

आरती छाबड़़िया और धवल ठाकुर

कलर्स टीवी पर प्रसारित हुए रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी – सीजन -4 यानि टौरचार में बॉलीवुड अभिनेत्री आरती छाबड़िया और मॉडल धवल ठाकुर की जोड़ी विजेता बन गई है। शनिवार को प्रसारित इस शो के फाइनल में दोनों ने आखिरी स्टंट को अपनी प्रतिद्वंदी जोड़ी से लगभग आधे समय में पूरा कर अपनी जीत पक्की की।

इस शो में इस बार 13 हसीनाओं और उनके पार्टनरों ने हिस्सा लिया था। सुपर मॉडल डायन्ड्रा सॉरेस के साथ थे आहरण चौधरी और वीजे मिया का साथ संग्राम सिंह ने दिया था। बोल्ड एंड सेक्सी कश्मीरा शाह का साथ दिया था सुमित सूरी ने जबकि उनकी खास दोस्त और बड़बोली के नाम से टीवी जगत में मशहूर संभावना सेठ का साथ दिया था स्टंटमैन खालिद चौधरी ने। प्रसिद्ध रोडी वी.जे. बानी का साथ अमित मेहरा ने दिया था और महिला क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा के साथ थे संदीप सचदेव। भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने पर कपड़े उतारने के लिए बेकरार पूनम पांडे ने भी इस शो में प्रवीण जैन के साथ हिस्सा लिया था, लेकिन किसी की भी दाल नहीं गल पाई। आखिरी राउंड तक पहुंची इंडियन शकीरा कहलाने वाली मौली दवे और धीरज आमोनकर की जोड़ी जिसे रनर्स का ओहदा मिला।

इनके अलावा शो में दीना सिंह-अमित मेहरा, एलिसिया राउत-शाश्वत सेठ, अश्का गोर्डिया-सुनीत भाटिया, स्मिता बंसल-सौरभ रॉय भी नजर आए, लेकिन दर्शकों का रिस्पॉन्स कुछ फीका ही रहने की खबर है। हालांकि इस सीजन में यह शो पहले की तुलना में ज्यादा खतरनाक था और प्रतियोगियों के लिए यह किसी टार्चर से कम नहीं था। उन्हें शारीरिक और मानसिक स्तर पर ज्यादा कठिन चुनौतियों का मुकाबला करना पड़ा। शो की पूरी शूटिंग दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में हुई थी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.