/एचयूजे पंचकूला इकाई पुनर्गठित, सुखजीवन शर्मा बने अध्यक्ष

एचयूजे पंचकूला इकाई पुनर्गठित, सुखजीवन शर्मा बने अध्यक्ष

जयश्री राठौड़
पंचकूला: हरियाणा यूनियन आफ  जर्नलिस्ट्स (एचयूजे) की पंचकूला इकाई को पुनर्गठित किया गया है। यह बदलाव एचयूजे के प्रदेशाध्यक्ष संजय राठी के आदेश और उनकी सहमति से किया गया है।
शनिवार को इस बाबत सेक्टर-16 के अग्रवाल भवन में एचयूजे के सदस्यों की बैठक हुई। बैठक में फैसला किया गया कि पंचकूला इकाई को पहले से बेहतर बनाने और ज्यादा सक्रिय करने के लिए इसके पुनर्गठन की जरूरत है। जो सदस्य सक्रिय रूप से संगठन के लिए काम कर सकते हैं उन्हें आगे आने का आह्वान किया गया। सभी सदस्यों को सर्वसम्मति से चुना गया। संरक्षक-सत्यनारायण गुप्ता, अध्यक्ष- सुखजीवन शर्मा , वरिष्ठ उपाध्यक्ष रुपेश कुमार व इंदिरा राय, उपाध्यक्ष उमंग श्योराण, महासचिव एमएस राठौड़, सचिव जगदीप शर्मा, संयुक्त सचिव अजीत कौशल, समन्वयक अजय गुप्ता और कैशियर विनोद शर्मा को बनाया गया है। विजय श्योराण, विपिन लूथरा, भरत भंडारी, कमलकलसी और दीपक कुमार कार्यकारिणी के सदस्य हंै। एचयूजे के प्रदेशाध्यक्ष और नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के सचिव संजय राठी ने पंचकूला इकाई के पुनर्गठन के फैसले पर सहमति प्रदान कर इकाई को ज्यादा सक्रिय करने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि एचयूजे हरियाणा में पत्रकारों के हितों और कल्याण के लिए संघर्षरत है। प्रदेश में इसके ढाई हजार से ज्यादा सदस्य है। संगठन ने हरियाणा में मीडिया प्रोटेक्शन बिल लाने के अलवा पत्रकारो के कल्याण के लिए कई योजनाओं को मूर्त रूप दिया है। एचयूजे के वरिष्ठ सदस्य संजय राय ने उ मीद जताई कि पुनर्गठन से जिला इकाई और ज्यादा मजबूती से पत्रकारों के मुद्दों को उठाएगी। बैठक में फैसला हुआ कि पंचकूला इकाई के सदस्य जल्द ही संगठन के दो पत्रकारों अजय गुप्ता और कमल कलसी के साथ हुई आपराधिक वारदातों में पुलिस की निष्क्रियता को लेकर उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर ठोस कार्रवाई के लिए कहेगी।
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.