Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

चेरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर कारोबार करते हैं बाबा रामदेव – आयकर विभाग

By   /  August 28, 2012  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

क्या बाबा रामदेव ट्रस्ट के नाम पर कारोबार चला रहे हैं? आयकर विभाग की मानें तो योग गुरु का पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट कारोबार कर रहा है. काले धन के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ हल्‍ला बोलने वाले बाबा रामदेव पर आयकर (आईटी) विभाग ने गाज गिराने की तैयारी कर ली है. एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक आईटी विभाग उनके ट्रस्ट का चैरिटेबल संगठन के तौर पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने की तैयारी में है. विभाग ट्रस्ट को दिए जाने वाली सभी छूट भी वापस लेने की तैयारी में है.

सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट बाबा रामदेव पर पहले ही शिकंजा कस चुका है. सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट ने बाबा रामदेव को 4.94 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाते हुए नोटिस भेज चुका है.
इनकम टैक्स विभाग की एक ईकाई को जांच करने पर पता चला है कि बाबा रामदेव का ट्रस्ट पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट 2009-10 के दौरान कई व्यवसायिक गतिविधियों में शामिल था. मतलब साफ है कि पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट चैरिटी के नाम छूट लेने के साथ ही कमाई का जरिया बना हुआ था. इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 12 (ए) के तहत पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को अब तक छूट मिलती रही है.
पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट आयकर विभाग को दी गई जानकारी में यह कहता रहा है कि उसकी कमाई शून्य है. आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के खातों और ब्योरे की जांच करने पर पता चला है कि 72.37 करोड़ की कमाई की जानकारी सामने आई है, जिस पर आयकर बनता है. आयकर विभाग की कर छूट देने वाली ईकाई ने बाबा रामदेव के ट्रस्ट से 100 सवाल पूछे हैं. अब विभाग अंतिम कार्रवाई करने की तैयारी में है.
आईटी विभाग के मुताबिक टैक्स में छूट लेते हुए पतंजलि योगपीठ ने 74.74 करोड़ की आय और 8.71 करोड़ का खर्च दिखाया है. इसका मतलब है कि कुल आय का महज 12 फीसदी ही खर्च किया गया जबकि 66.03 करोड़ रुपये ‘सरप्लस’ है. नियमों के मुताबिक उसी ट्रस्ट को आयकर छूट दी जाती है जो अपनी आय का 85 फीसदी चैरिटी में इस्तेमाल करे.
आयकर विभाग ने अपनी जांच में पाया है कि पतंजलि ट्रस्ट ने वानप्रस्थ आश्रम योजना के तहत 88.73 लाख रुपये की पूंजी दिखाई है. इस योजना के तहत कुटिया 5.5 लाख रुपये से 21 लाख रुपये के बीच बेची गईं. वहीं, ट्रस्ट ने गुड़गांव में दान के तौर पर जमीन पाई. इन जमीनों के दाम और जगह की आयकर विभाग अभी जांच कर रहा है. ट्रस्ट को हरिद्वार में अपने सहयोगी संगठन-दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट से 38.35 करोड़ रुपये का दान मिला है. 2009-10 के दौरान ट्रस्ट को 14.75 करोड़ रुपये बतौर सदस्यता शुल्क मिला. कोई भी व्यक्ति ‘सम्मानित सदस्य’ बनने के लिए 21,000 से लेकर ‘कॉरपोरेट मेंबरशिप’ के लिए 11 लाख रुपये तक की राशि चुका सकता है.
आयकर विभाग को जांच में पता चला है कि पतंजलि योगपीठ को योग शिविरों के आयोजन से 15.41 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई. इन शिविरों में अलग-अलग श्रेणियों में लोगों ने कूपन खरीदकर हिस्सा लिया. इन शिविरों में 2100 में ‘वीआईपी’ कूपन और 1100 में ‘डायमंड’ कूपन मिलता है.
आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को अज्ञात स्रोतों से 13. 69 करोड़ रुपये की दान राशि मिली हुई है. हालांकि, ट्रस्ट ने ऐसे स्रोतों से महज 1.07 कोड़ रुपये की राशि प्राप्त होने की बात कही है. पतंजलि योगपीठ के आपदा राहत फंड के खातों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं. वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान इस फंड में ट्रस्ट ने 4.36 करोड़ की राशि को दान के तौर पर दिखाया गया है. दावा किया गया है कि इस फंड में से 1.58 करोड़ रुपये बिहार में बाढ़ पीड़ितों पर खर्च किया गया. इस फंड में से 1.24 करोड़ रुपये की दवाइयां दिव्य फार्मेसी से खरीदने का दावा किया गया है. लेकिन आयकर विभाग को इस खरीद का कोई दस्तावेजी सुबूत मुहैया नहीं कराया गया.
वित्त वर्ष 2011-12 में बाबा रामदेव ने दिव्य योग मंदिर और पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट का कुल टर्न ओवर 1100 करोड़ रुपये बताया था. लेकिन इसके अलावा भी बाबा के कई प्रोजेक्ट हैं जिनपर करोड़ों रुपये लगने हैं. बाबा की हरिद्वार में दिव्य फार्मेसी से हर साल 50 करोड़ रुपये की आय होती है. बाबा रामदेव का 500 करोड़ की लागत से बनने जा रहा फूड पार्क भी आमदनी का अच्छा स्रोत होगा. हर साल बाबा रामदेव की किताबों और सीडी की बिक्री से 2-3 करोड़ रुपये कमाई होती है. उत्तराखंड के हरिद्वार और हरियाणा में बाबा रामदेव के पास काफी जमीन और प्रॉपर्टी है. योग गुरु को विदेशों में भी जमीन ‘दान’ के तौर पर मिली हुई है.
बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के नाम 34 कंपनियां हैं जिनका टर्न ओवर 265 करोड़ रुपये है. यह जानकारी सरकार की ओर से बजट सत्र में लोकसभा में दी गई थी. इसके मुताबिक बालकृष्ण उत्तराखंड में रजिस्टर्ड 23 कंपनियों के निदेशक हैं जिनका कारोबार 94.84 करोड़ रुपये है. इसके अलावा बालकृष्ण के नाम पर 5 कंपनियां उत्तर प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं जिनका कुल व्यापार 5 लाख रुपये है और 4 कंपनियां दिल्ली में रजिस्टर्ड हैं जिनका कुल कारोबार 163.06 करोड़ रुपये है जबकि पश्चिम बंगाल में भी एक कंपनी है जिसका कुल व्यापार 8 करोड़ रुपये है. इसके अलावा बालकृष्ण महाराष्ट्र की एक कंपनी में भी निदेशक हैं लेकिन इसके कारोबार के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

जौहर : कब और कैसे..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: