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जारी है राजस्थान प्रदेश कांग्रेस व सत्ता में खींचतान…

By   /  August 29, 2012  /  No Comments

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राजस्थान में कांग्रेस संगठन व सत्ता के बीच खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। पहले पूर्व अध्यक्ष सी पी जोशी के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलाते सदैव संगठन के निशाने पर रहते थे और अब डॉ. चंद्रभान के समय में भी स्थिति जस की तस है। पहले राजनीतिक नियुक्तियां न होने के कारण जो नेता असंतुष्ट थे, उन्हें तो लंबे अरसे बाद नियुक्तियां करके राजी किया गया, मगर कार्यकर्ता आज भी रो ही रहा है कि न तो मंत्री उनके काम करते हैं और न ही सरकार अफसर उन्हें गांठते हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इस गुस्से का इजहार यूं तो आए दिन होता ही है, हाल ही मुख्यमंत्री गहलोत व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान की मौजूदगी में कांग्रेस के नगर अध्यक्षों ने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और मंत्री, अफसरों की कार्यशैली को लेकर खुलकर गुस्सा जाहिर किया।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में नगर अध्यक्षों के सम्मेलन में खुले सत्र के दौरान नगर अध्यक्षों ने मंत्रियों और अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कुछ नगर अध्यक्षों ने तो यहां तक कह दिया कि आज जैसे हालात बन गए हैं, उनमें पार्टी फिर से सत्ता में नहीं आ सकती। अफसर बेलगाम हैं और कार्यकर्ता हताश हैं, ऐसे में फिर से राज आना तो दूर चुनावों में बूथ पर कार्यकर्ता तक नजर नहीं आएगा। तल्खी का आलम ये था कि कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि अफसरों को इतना माथे चढ़ा रखा है, क्या चुनाव के वक्त ये अफसर पार्टी का काम करेंगे?
ऐसा नहीं है कि इस प्रकार असंतोष का खुला इजहार पहली बार हुआ है। इससे पहले भी ऐसे अनेक प्रसंग हुए हैं, जिनमें गहलोत सरकार के प्रति भारी रोष सामने आया है। आपको ख्याल होगा कि पिछले दिनों तबादलों को लेकर पंचायतराज मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय पर डीडवाना के विधायक ने गंभीर आरोप लगाए थे, हालांकि बाद में मुख्यमंत्री के दबाव में वे पलट गए। दैनिक भास्कर के संवाददाता ने तो बाकायदा डूडी का बयान रिकार्ड कर लिया और डूडी के मुकरने पर उसे छाप भी दिया। उसमें डूडी ने खुल्लम खुल्ला रिश्वत के आरोप लगाए थे।
सरकार के प्रति असंतोष तब भी सामने आया था, जब छह असंतुष्ट विधायकों ने कैबिनेट मंत्री अशोक बैरवा के घर की बैठक कर अपना दुखड़ा रोया था। विधायक सी एल प्रेमी ने कहा था कि विधायक बनने बाद भी जब परिवार के काम ही नहीं होते हैं तो दुख होता है। विधायक उदयलाल आंजना ने कहा कि असंतुष्ट कोई व्यक्तिगत काम लेकर शिकायतें नहीं कर रहे हैं। हम क्षेत्र की समस्याएं सुलझाने और जनता के काम होने की आवाज उठा रहे हैं। अब राजनीति में हैं तो जनता के काम भी होते हैं और व्यक्तिगत काम भी। अब घर के काम भी नहीं करा सके तो फिर क्या मतलब है? विधायक दौलतराज नायक, गंगासहाय शर्मा, गंगाबेन गरासिया, रामलाल मेघवाल आदि ने भी इसी प्रकार की शिकायतें कीं। स्वयं बैरवा ने भी कहा कि हमारे विधायकों में नाराजगी है। कार्यकर्ताओं के काम होने चाहिए, यह विधायकों की भी पीड़ा है और हमारी भी। 25-30 विधायकों की नाराजगी पार्टी में बहुत बड़ा मामला है।
सरकार के प्रति कांग्रेस विधायकों, नेताओं व कार्यकर्ताओं के गुस्से का खुलासा तब भी हुआ था जब कांग्रेस प्रवक्ता व राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी ने यह कह कर कि राजस्थान में बदलाव की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता, यह संकेत दे दिया है कि दिल्ली दरबार में यहां के बारे में कुछ न कुछ तो चल ही रहा है। वरना उन्हें यह कहने का जरूरत ही क्यों पड़ी? साफ है कि कांग्रेस हाईकमान को अच्छी तरह से पता है कि राजस्थान में सत्ता व संगठन के हालात क्या हैं? उसके बाद भी अगर कोई हल नहीं निकाला जा सका है तो इसका मतलब ये है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आगामी चुनाव में हारने की आशंका गलत नहीं है।
-तेजवानी गिरधर

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About the author

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

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