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कसाब को फांसी पर लटकाने के लिए सालों इंतजार करना पड़ सकता है…..

By   /  August 30, 2012  /  4 Comments

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कसाब को फांसी पर चढाने में अभी सालों लग सकते हैं क्योंकि अजमल आमिर कसाब की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बाद भी कसाब के पास पुनर्विचार याचिका दाखिल करने, उसके बाद क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने और क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा है. राष्ट्रपति के पास लंबित दया याचिकाओं के चलते कसाब को तुरंत फांसी लटकाए जाने की उम्मीद नहीं हैं. 2001 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु समेत अन्य दोषियों की दया याचिकाओं के निपटारे तक कसाब को फांसी पर लटकाने में लंबा वक्त लग सकता है. ऐसे में अजमल कसाब की फांसी के लिए देशवासियों को सालों इंतजार करना पड़ सकता है.

वहीं पूरे देश से उसे जल्द फांसी देने की मांग उठने लगी है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि कसाब की सजा पर जल्द से जल्द अमल किया जाना चाहिए. भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि देश के खिलाफ जंग छेड़ने वाले और मासूम लोगों की हत्या करने वालों के साथ दया नहीं की जानी चाहिए. कसाब को बहुत चिकन बिरयानी खिलाई जा चुकी है. अब उसे बिना देरी किए फांसी दे देनी चाहिए. पाकिस्तान को आतंकवाद की फैक्ट्री बताते हुए नकवी ने कहा कि सरकार को आतंकी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकवाद से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अलग से कानून बनाना चाहिए.

कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह अपेक्षित फैसला है. इसके साथ ही उन्होंने कसाब के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया में देरी के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैंने बांबे हाई कोर्ट का फैसला देखा है. यह न्यायपालिका के लिए बहुत ही कठिन फैसला था. उन्हें इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी होगी. मुंबई हमले में शहीद हुए सब-इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबले के भाई एकनाथ ने कहा कि अगर अफजल गुरू को 10 साल पहले ही फांसी दे दी जाती, तो 26/11 और 13/7 जैसी घटनाएं नहीं होतीं. उन्होंने कहा कि हम फैसले से खुश हैं. अब हमें इस पर अमल का इंतजार है. 26/11 हमले की जांच करने वाली मुंबई क्राइम ब्रांच ने फैसले को आतंक के खिलाफ लड़ाई में मील का पत्थर बताया है. महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कहा कि फैसले पर पूरी दुनिया की नजर थी. हमारी जांच एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों की आतंकी हमले में भूमिका उजागर करने में कामयाब रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कसाब के पास राष्ट्रपति से दया याचिका दायर करने का विकल्प खुला है और इस पर फैसले तक उसकी फांसी की सजा लंबित रहेगी. गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार दया याचिका की सुनवाई की प्रक्रिया लंबी होने के कारण उसे निपटाने में कई महीने लग सकते हैं. नियम के मुताबिक दया याचिका पर फैसला लेने के पहले राष्ट्रपति उसे गृह मंत्रालय के पास विचार के लिए भेजते हैं, जिसे गृह मंत्रालय संबंधित राज्य सरकार को आगे भेज देता है. राज्य सरकार की राय वापस आने के बाद गृह मंत्रालय उस पर विचार करता है और राष्ट्रपति को उचित सुझाव देता है. गृह मंत्रालय के सुझावों पर विचार करने के बाद ही राष्ट्रपति संबंधित दया याचिका पर फैसला लेते हैं.

लंबी प्रक्रिया के साथ ही कसाब की दया याचिका पर फैसला पुरानी दया याचिकाओं को निपटाने के बाद ही लिया जा सकेगा. हालत यह है कि इस समय राष्ट्रपति के पास एक दर्जन दया याचिकाएं लंबित हैं. इनमें छठे नंबर पर मो. अफजल की याचिका है. जबकि 2001 में संसद में हमले के दोषी अफजल की फांसी की सजा पर सुप्रीम कोर्ट 2005 में ही अपनी मुहर लगा चुका है. ऐसे में कसाब की फांसी के लिए सालों इंतजार करना पड़ सकता है.

लंबित दया याचिकाएं

1. गुरमीत सिंह, 2. धरम पाल, 3. सुरेश और रामजी- (यूपी), 4. सिमोन, ज्ञानप्रकाश मदायाह और बिलावेंदर (कर्नाटक), 5. प्रवीण कुमार (कर्नाटक), 6. मो. अफजल (दिल्ली), 7. सायबन्ना (कर्नाटक), 8. जफर अली (यूपी), 9. सोनिया और संजीव (हरियाणा), 10. सुंदर सिंह (उत्तराखंड), 11. अतबीर (दिल्ली), 12. बलवंत सिंह राजोआना (चंडीगढ़)

[ये आंकड़े 23 जुलाई 2012 तक के हैं.]

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. mahendra gupta says:

    abhi itna uchal kood karne aur shor machane ki jaroorat nahin hae,Abhi “KASABJI” ko yeh saja agar milegi bhi to do sal ka intjar karna hoga hamare savendhanik pravdhan hi kuch aise haen,aur phir is sarkar ke karyakal men to ho bhi nahi sakta,akhir vote bank aur pakistan ke naraj hone ka khatra bhi hae.phir chune jayenge to dekhenge. Abhi to ” KASABJI” ko huron se milne ke khwab hi dekhne honge, hamare sarkari mehmah ko kuch din aur BIRYANI aur chicken khane do, abhi tak to 19 carore hi kharch huen haen.

  2. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अजमल कसाव की फासी की सजा बरक़रार रखने के बाद अब केंद्र सर्कार बताए की उसे कितनी जल्दी फासी होगी जिससे की आतंक-बादिओं में खौफ हो ,देश की जनता जानना चाहती है !कुछ वर्ष पहले कोल्कता में एक लड़के ने एक नाबालिग लड़की का बलात्कार कर उसे गला दबाकर मर डाला था तोउस लड़के को शिग्रह क़ानूनी करवाई के तहत उसे फाशी दे दी गई जबकि उस लड़के के माता-पिता ने राष्ट्रपति से भी माफीनामा की अपील की थी और फासी के वक़्त भी लड़का कहता रहा की उसने कुछ नहीं किया !हमें उस लड़के से कोई हमदर्दी नहीं है पर देश को ये जानने का हक है की क्या अजमल कसब और अफज़ल गुरु से भी ज्यादा बड़ा अपराधी वो लड़का था जिसे आनन् -फानन तुरंत फासी दे दी गई और अफज़ल गुरु और कसब जैसे कई खूंखार अपराधी जिसे फासी की सजा होने के बाद भी जिन्दा है और जेल में ऐसो-आराम की जिदगी जी रहा है तथा सर्कार का लाखो रूपया उसपर खर्च हो रहा है ?वो लड़का जो गरीब परिवार का था उसमे सर्कार को कोई कानूनी अड़चन नहीं थी लेकिन कसब और अफज़ल जैसे लोगो को फासी देने के लिये सर्कार को कानूनी अड़चन दिखाई दे रहा है ?क्या देश की जनता को इसका जबाब मिलेगा ?

  3. ramesh kumar sharma says:

    PRATI VARSH 25 LAKH SE JYADA BACHCHE VRIDH MAHILAAYE KUPOSHAN VOOKH BEEMARI KUPOSHAN SE MAR JAATE HAIN AVI TAK AATANKWADI HAMALO ME LAAKHO LOG MAR CHUKE HAIN HAZARO HAMALE HO CHUKE HAIN FIR VI SARKAR AATANKWADIYON PAR SYMPATHY DIKHATI HAI CARODO RS UNHE JAIL ME RAKHKAR KHARCH KAR DETI H SHIKSHA SWASTHYA PAR KHARCH KARANE KE LIYE SARKAR KE PAAS PAISE NAHI LEKIN CHORO GHOTALEBAAJO LOOTERO AATANKWADIYON KI SURAKSHA AUR SEVASUSHRUSA PAR HAZAARO CAROD KA KHARCH AAKHIR YAHVOTE BANK KACHAKKARKB SMAPATHOG

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