/अखिलेश राज में सामने आया यूपी पुलिस का असल चेहरा..

अखिलेश राज में सामने आया यूपी पुलिस का असल चेहरा..

ये है यूपी पुलिस का असल चेहरा..

-इलाहाबाद से प्रभात कुमार वर्मा||
अखिलेश यादव के राज में ताकतवर लोगों के सामने नतमस्तक हो जाने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस गरीबों पर जुल्मों सितम ढहाने में कितनी आगे है इसका दिल दहला देने वाला नमूना इलाहाबाद में सामने आया है. यहाँ फल और सब्जी की ठेलिया लगाकर अपना जीवन यापन कर रहे एक दुकानदार से वसूली के नाम पर 50 रुपये न मिलने पर दो सिपाहियों ने पहले उसकी जमकर लात घूंसों से पिटाई की और जब इस पर भी इन पुलिसवालों का दिल नहीं भरा तो उसके सीने पर मोटर साइकिल चढ़ा दी.

घटना 18 अगस्त 2012 की है जब रामबाग रेलवे स्टेशन के गेट नंबर एक के सामने फल और सब्जी का ठेला लगाने वाले रोहित से दो सिपाहियों ने 50 रुपये की मांग की. रोहित ने जब उन्हें पैसा देने से मना कर दिया तो सिपाही बेचूराम व एक अन्य सिपाही ने पहले तो रोहित की जमकर लात- घूंसों व लाठी से पिटाई की. जब रोहित बेसुध होकर ज़मीन पर गिर पड़ा सिपाहियों ने उसके ऊपर मोटर साइकिल चढ़ा दी. मौके से गुजर रहे मनीष राजपूत के मुताबिक, उन्होंने जब हिम्मत कर घटना की तस्वीर अपने मोबाइल से ले ली तो पुलिस वालों ने उन्हें भी धमकाया. मनीष के मुताबिक इस दौरान एक स्थानीय इंस्पेक्टर दल-बल के साथ पहुंचे. मनीष को धमकाया और पुलिस के साथ कापरेट करने की सलाह दी.

पुलिस के हाथों सरे बाज़ार पिटने और सीने पर मोटर साइकिल चढ़ाये जाने के बाद रोहित को अहसास हुआ कि उसने पुलिस से उलझ कर भारी भूल की है. अब रोहित बेहद डरा हुआ है वो आप बीती बताने से भी डर रहा है. वो आधी बात बताता है और फिर कहता है उसे किसी से कोई शिकायत नही उसकी सबसे बस इतनी गुजारिश है कि उसे और उसके परिवार को चैन से जीने दिया जाये, उसकी रोज़ी-रोटी चलती रहे और उसे कुछ नही चाहिए. मोटर साइकिल सीने पर चढ़ाये जाने के मुद्दे पर वो कहता है पुलिस की पिटाई से वो बेहोश हो गया फिर उसके सीने पर किसने मोटर साइकिल चढ़ाई उसे पता नही. उसके जवाब से साफ़ जाहिर होता है उसके अन्दर खाकी का खौफ भरा हुआ है.

रोहित के साथ हुए पुलिसिया जुर्म की कहानी जब मीडिया तक पहुंची तो इलाहाबाद पुलिस के एसएसपी ने मामले की जांच एक एएसपी को सौंप दी. हालाकि मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस मामले की लीपा पोती में जुट गयी है. वहीँ अगर सूत्रों की माने तो, इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की गयी है जिसपर कोर्ट ने प्रदेश सरकार, डीजीपी और इलाहाबाद के एसएसपी को नोटिस भेज उनसे जवाब तलब किया है इसके अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को संज्ञान में लिया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.