/RTI के तहत सूचना ना देना भारी पड़ा IG और SP को…

RTI के तहत सूचना ना देना भारी पड़ा IG और SP को…

सूचना के अधिकार (आर. टी. आई.) के तहत मांगी गयी सूचना न देना करनाल रेंज के आई. जी. बलबीर सिंह  व एस. पी. शशांक आनंद को भारी पड़ गया है, हरियाणा सूचना आयोग ने सख्त रुख इख़्तियार करते हुए उन्हें नोटिस भेज जवाब माँगा है वहीँ उन्हें आयोग में उपस्थित होने के आदेश भी दिए है.
आर.टी. आई. कार्यकर्ता अक्षय कुमार शर्मा ने ३० अप्रैल को करनाल पुलिस से उनके द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे सरकारी वाहनो की आर.सी., बीमा व प्रदुषण पर्चियों की सत्यापित प्रतियाँ मांगी थी. तय समय पर सूचना न मिलने पर अक्षय ने इसकी अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं पुलिस महानिरीक्षक (आई. जी.) करनाल के समक्ष डाली परन्तु वहां से भी कोई जवाब प्राप्त न होने पर अक्षय ने ३० जुलाई को इसकी शिकायत चंडीगढ़ स्थित राज्य सूचना आयोग, हरियाणा को की जिस पर कार्यवाही करते हुए सूचना आयुक्त उर्वशी गुलाटी ने नोटिस जारी कर दोनों अधिकारियो को तलब कर लिया है. उन्हें 28 सितम्बर तक लिखित जवाब देने को कहा गया है वहीँ 24 दिसम्बर को 11 बजे आयोग के सामने उपस्थित होकर अपने बात रखने को कहा गया है. हालकि सूचना आयुक्त ने अधिकारियो को इस बात की छूट दी है की वे अपनी गैरहाजिरी में किसी अन्य अधिकारी को आयोग में भेज सकते है परन्तु उस अधिकारी का पद राजपत्रित अधिकारी (गजटेड आफिसर) से कम न हो.

वहीँ इस बारे में अक्षय का कहना है की पुलिस कर्मचारी को यह अधिकार है की वह अपनी शक्तियों का प्रयोग करके सभी नागरिको के वाहनों को चेक कर सकता है और कागज सही या पुरे न पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के आधीन उनका चालान कर सकता है. इसी प्रकार भारत की प्रत्येक नागरिक को भी अधिकार है की वह सुचना के अधिकार का प्रयोग करके किसी भी विभाग के सरकारी वाहनों के कागजो की जांच कर सकता है. कानून सबके लिए एक है, पुलिस औरो का चालान करती है परन्तु उनकी खुद की गाडियों के कागज पुरे नहीं है इसीलिए सूचना देने में आनाकानी की जा रही है.
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.