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राजस्थान के मुख्यमंत्री बनाये जा सकते हैं सी पी जोशी…

By   /  September 2, 2012  /  1 Comment

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-तेजवानी गिरधर||

केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री डॉ. सी. पी. जोशी के एक बार फिर राजस्थान में सक्रिय होने के आसार नजर आ रहे हैं तथा उन्हें प्रदेश में मुख्यमंत्री का पद भी सौंपा जा सकता है. राजस्थान वापसी में न केवल खुद जोशी की रुचि है, अपितु हाईकमान की भी यही इच्छा बताई जा रही है. विशेष रूप से पिछले दिनों कांग्रेस सुप्रीमो श्रीमती सोनिया गांधी के दौरे में जोशी को मिली अहमियत को इसी अर्थ में लिया जा रहा है. साथ ही हाल में नाथद्वारा विधानसभा सीट के चुनाव को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट में पेश जोशी की याचिका के तहत मौजूदा विधायक कल्याण सिंह चौहान का चुनाव रद्द कर दिए जाने फैसले के बाद इस आसार को और बल मिला है.
ज्ञातव्य है कि जोशी केन्द्रीय मंत्री होने के बावजूद राजस्थान में सदैव विशेष रुचि लेते रहे हैं. उनकी रुचि कई बार सत्ता से टकराव की नौबत तक पहुंच चुकी है. पिछले दिनों जब वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब तो सीधे तौर पर उनका दखल था ही. हालत ये थी कि वे प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समानांतर एक शक्ति केन्द्र के रूप में काम करते रहे. नतीजतन न तो गहलोत खुल कर काम कर पाए और न ही लंबे समय तक राजनीतिक नियुक्तियों पर सत्ता व संगठन में आम राय बन पाई. आखिरकार एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. बावजूद इसके वे लगातार राजस्थान में मामलों से सीधे जुड़े रहते हैं. अमूमन हर हफ्ते शनिवार व रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र भीलवाड़ा में डेरा डाल देते हैं और वहीं से स्थानीय सांगठनिक तंत्र से संपर्क में रहते हैं. संगठन व सत्ता से जुड़ा शायद ही ऐसा कोई विषय हो, जिसमें कहीं न कहीं जोशी की टांग न फंसी हुई हो. इस कारण यह संभावना बनी रही है कि जब भी उन्हें मौका मिलेगा, वे राजस्थान चले आएंगे.

हाल ही जब सोनिया गांधी ने अपने दौरे में मौजूदा अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान को तवज्जो नहीं दी, जबकि जोशी को ऐन वक्त पर भी बाड़मेर की सभा में बोलने दिया, उससे हाईकमान में उनकी पकड़ को बड़े गौर से महसूस किया गया था. माना जाता है कि विशेष रूप से कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी से उनकी ट्यूनिंग अच्छी है. और यह सर्वविदित ही है कि आने वाले दिनों में राहुल सक्रिय रूप से महत्वपूर्ण भूमिका में आने वाले हैं. डॉ. चंद्रभान की कमजोरी उजागर होने और हाल ही नाथद्वारा विधानसभा सीट का फैसला आने के बाद इस बात की संभावना को और बल मिला है कि उन्हें राजस्थान की कमान फिर से सौंपी जा सकती है. संभावना इस बात की भी है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा से मुकाबले के लिए मुख्यमंत्री पद का दायित्व तक सौंप दिया जाए. उसके पीछे तर्क ये दिया जाता है कि अशोक गहलोत को उनकी लुंज पुंज शैली की वजह से यहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उन्हें कई बार झिंझोड़ चुकी हैं, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ता काफी आहत हैं. मुख्यमंत्री के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल उपलब्धियां गिनाने लायक भले ही हो, मगर खुद का व्यक्तित्व प्रभावहीन होता नजर आता है. विशेष रूप से कांग्रेस का पूरा जातीय समीकरण गड़बड़ा गया है, जिसका कि भाजपा फायदा उठाने की भरसक कोशिश कर रही है. वैसे भी उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस हाईकमान की राजस्थान पर विशेष नजर है. वह इस बात का मानस बना चुका है कि आगामी चुनाव में जीतने के लिए यहां व्यापक फेरबदल किया जाए. उसके लिए कड़ा से कड़ा निर्णय भी लिया जा सकता है. उसी की रोशनी में समझा जाता है कि केन्द्रीय मंत्रीमंडल में आगामी फेरबदल में जोशी को वहां से मुक्त करके राजस्थान की कमान सौंपी जा सकती है. वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अथवा मुख्यमंत्री, दोनों में से कोई एक हो सकती है. बताया जाता है कि राजस्थान को संभालने बाबत जोशी की राहुल गांधी से लंबी चर्चा भी हुई है. इसके अतिरिक्त प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की राहुल से मुलाकात के दौरान यह पूछे जाने पर कि किसे प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए तो अधिसंख्य की राय यही थी कि जोशी ही बेहतर रहेंगे.

गौरतलब है कि सी पी जोशी सीधे राहुल गांधी के निजी संपर्क में हैं और उन्हें राहुल गांधी से मिलने के लिए सीधे उनसे ही पूछना होता है, जबकि अशोक गहलोत को हमेशा राजनैतिक सलाहकारों के ज़रिये ही मुलाकात का मौका मिलता है. यही नहीं सी पी जोशी की बेबाकी, कार्य के प्रति लग्न और ईमानदारी से राहुल गाँधी खासे प्रभावित हैं. दस जनपथ से अपनी इन्हीं नजदीकियों के चलते सी पी जोशी के राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं ज्यादा प्रबल हैं.

यहां उल्लेखनीय है कि जोशी नाथद्वारा के चुनाव में मात्र एक वोट से हार गए थे. माना यही जाता है कि अगर वे नहीं हारते तो राजस्थान के मुख्यमंत्री सी पी जोशी ही होते. गहलोत को तो मौका ही इस कारण मिला कि जोशी का, उनके भाग्य ने तब साथ नहीं दिया. अब जब कि कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आ गया है, उनका राजनीतिक कद और बढ़ा है. कहने की जरूरत नहीं है कि इससे उनका आत्मविश्वास और पुष्ट हुआ है.
हालांकि मौजूदा भाजपा विधायक कल्याण सिंह हाई कोर्ट के फैसले को एक माह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं और संभव है, वे जाएं भी. मगर संभावना यही मानी जा रही है कि वहां भी जोशी कामयाब हो जाएंगे. ऐसे में उनके पास यह विकल्प खुला रहेगा कि लोकसभा सीट छोड़ कर राजस्थान आ जाएं. जैसी कि उनकी राजस्थान में रुचि है, वे ऐसा करने को ही प्राथमिकता देंगे. इसकी वजह यह है कि यहां आज भी उनको गहलोत का सशक्त विकल्प माना जाता है. कुल मिला कर फिलहाल संकेत यहीं हैं कि जोशी की राजस्थान वापसी हो सकती है.

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About the author

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

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