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अमरनाथ यात्रा कश्मीर में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक बनाने की साज़िश – सैयद सलाहद्दीन

By   /  September 3, 2012  /  3 Comments

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अब ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के आला कमांडर सैयद सलाहद्दीन ने भी अमरनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या पर कड़ा एतराज जताया है. उसने कहा कि यह कश्मीर की मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश है.

गौरतलब है कि हिजबुल मुजाहिद्दीन जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी गुटों में स्थानीय कैडर के आधार पर सबसे बड़ा आतंकी गुट है. गुलाम कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद से जारी अपने बयान में सलाहुद्दीन ने कहा कि पहले ही कश्मीर में तमाम बाहरी लोग जाली स्टेट सबजेक्ट के आधार पर बस गए हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली समेत देशभर से श्रमिकों को कश्मीर में धीरे-धीरे स्थायी तौर पर बसाया जा रहा है. इसी साजिश के तहत श्री अमरनाथ की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बीते कुछ सालों में ही छह लाख से ऊपर पहुंचाई गई है. अब यात्रामार्ग पर पक्की सड़क और कुछ दूसरी इमारतों के निर्माण की साजिश की जा रही है.

हिज्बुल कमांडर ने कहा कि हम अमरनाथ यात्रा के खिलाफ नहीं हैं. यह हमारी परंपरा का हिस्सा है. पर जिस तरह से इस यात्रा को कश्मीरियों के हक-ए-आजादी आंदोलन के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है, वह हमें कुबूल नहीं है. अमरनाथ यात्रा बहुत मुश्किल है, इसलिए कई यात्रियों की यात्रा के दौरान मौत स्वाभाविक है. उन मौतों की आड़ में नई दिल्ली पर्यावरण को बिगाड़ने और बालटाल में बाहरी लोगों को स्थायी तौर पर बसाने की साजिश कर रही है.

वहीं पंजाब की पूर्व मंत्री और समाज सेविका प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा है कि यदि बाबा अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई और पवित्र गुफा तक स्थायी मार्ग का निर्माण नहीं हुआ तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक 2008 जैसा आंदोलन होगा.

वे रविवार को जम्मू में 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को सम्मानित करने के लिए आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि थीं. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व हैं, जो राष्ट्र को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. अमरनाथ श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधाएं न मिलने से हर वर्ष श्रद्धालुओं की मौत हो रही है. इस वर्ष भी करीब सौ श्रद्धालुओं की मौत हो गई है. हरिद्वार में कुंभ के दौरान सरकार आठ करोड़ लोगों को संभालती है तो क्या जम्मू कश्मीर में बाबा अमरनाथ यात्रा के लिए चार-पांच लाख यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती? यात्रियों को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध न कराना, साजिश का हिस्सा है ताकि यात्रियों की संख्या में कमी आए.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Sardar Jeet says:

    Yes muslims Haj ke liye di gayi khairat to kabul kar lete hai jo Hinduo dvara Tax ke roop me diya jata hai.Par J&K jo Hindustan ka atut hissa hai, men Hindu nahi ja sakta? Yes separist bhool jay azad J&K.Bharat me rahega poora J&K including Gulam Kashmir.

  2. क्या विडम्बना है की एक तरफ हमारे देश के नेता देश को लूट रहे हैं और दूसरी तरफ आतंकवादी हम जनता को लूट रहे हैं फिर भी हम कुछ नहीं करते क्यों ?क्या १२५ करोड़ की आबादी में ये मुठी भर नेता और मुठी भर आतंकवादी हमें लूटते रहेंगे और हम देखते रहेंगे ?आखिर कब तक ?हमने देखा है १९८४ तक का वो नेत्रित्व जिससे ये आतंकवादी ही नहीं दुनिया की वो देश भी डरती थी हमारे देश पर तिरछी नजर करने से जो आज सुप्पेर पॉवर बना हुआ है !समूचा देश जिसमे कश्मीर भी शामिल था शांति और अमन चैन से जी रहा था और जब भी किसी ने आँख तरेरी उसे धुल छठा दी गई !हम उस नेत्रित्व करने वाली स्ट्रोंग लेडी श्रीमती इंदिरा गाँधी को नमन करते हैं !सौ टके का सवाल है की क्या वैसा मजबूत नेतृत्व अब हमारे देश को नहीं मिल सकता ?मिल सकता है अगर हम कोशिस करें ,अगर हम देश भावना को समझें ,और जाती और धरम को पीछे छोड़ ,खंडित जनादेश न देकर एक मजबूत नेतृत्व करता को चुने !हमारे सामने दो ही आप्शन है भाजपा और कांग्रेस !पहले तो ये दोनों पार्टी इंदिराजी और अटलजी जैसे किसी एक नेता का नाम चुनाव पूर्व घिषित करे फिर जनता उंहें मौका दे जिनमे इंदिरा और अटल जी जैसे क्षमता दिखाए !शायद कोई मिल जाये जो १९८४ से पहले वाला अमन चैन वाला भारत दे सके ?

  3. Kunwar Sen says:

    Hridwar smtl area h or Amarnath charo or se phado se ghira hua area h fir bhi jitni ho skti h Govt. force ki suvidha deti h.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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