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फर्जी शिकायतों के जरिये चौथवसूली की कोशिश

By   /  September 5, 2012  /  No Comments

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-भंवर मेघवंशी||

जिला यूथ कांग्रेस के महामंत्री और अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के आसीन्द ब्लॅाक के पूर्व अध्यक्ष के लैटरहेड पर अवैध खनन बंद करवाने के लिये एक शिकायत खनिज अभियंता भीलवाड़ा को भिजवाई गई, शिकायत की भाषा एकदम सधी हुई और कानूनी है, यहां तक कि शिकायतकर्ता ने स्वयं लिखा कि उपरोक्त सभी बिन्दु राजस्थान अप्रधान (गौण) खनिज अधिनियम 1986 को ध्यान में रखते हुये लिखे गये है।
शिकायती पत्र यहीं समाप्त हो जाता तो ठीक था, मगर इसके नीचे लिखे नोट को पढ़कर आपका माथा ठनक सकता है। खनिज अभियंता को सम्बोधित नोट कहता है – ‘‘18 दिसम्बर 2011 तक उपरोक्त कार्यवाही नहीं होने पर आपके विरूद्ध पद एवं अधिकारो के दुरूपयोग तथा ‘अवैध खनन में सहयोग’ करने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत की जायेगी, जिसके लिये आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।’’
अब सवाल यह उठता है कि कोई भी शिकायतकर्ता चाहे वह किसी विभाग को शिकायत करे अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत करे वह इसकी लिखित धमकी सम्बन्धित को पहले क्यों देगा ? क्या इसमें उसकी कोई छुपी हुई मंशा अथवा हिडन एजेण्डा है ? यह विचारणीय प्रश्न है।
शिकायतकर्ता स्वयं को कांग्रेस से जुड़ा हुआ बताता है मगर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनिल डांगी उसे पदाधिकारी होना तो दूर प्राथमिक सदस्य भी नहीं मानते है उनका तो यहां तक कहना है कि शिकायतकर्ता सुनील कौशिक का कांग्रेस से कोई लेना देना नही है।
इसी प्रकार ग्राम विकास समिति बदनोर के नाम से भी फर्जी शिकायतें भेजने का मामला उजागर हुआ, समिति के अध्यक्ष सज्जन सिंह चौपाल बताते है कि ‘‘अक्टूबर 2011 में ग्राम विकास समिति बदनोर के नाम से संस्था गठित तो हुई थी लेकिन इसका पंजीकरण बैराट ग्राम विकास समिति के नाम से हुआ है।’’ चौपाल के मुताबिक-‘‘एक आदतन शिकायतकर्ता ने ग्राम विकास समिति के पहले के लेटरपेड और उनके हस्ताक्षर स्कैन कर लिये तथा जिला प्रशासन व खनिज व वन विभाग को गलत सूचनाएं देने लगा, जो कि सरासर फर्जीवाड़ा है।’’
पर फर्जीवाड़ा करने वाले लोग रूकते कहां है ? उन्हें तो एक प्रकार की लत ही लग जाती है। वे शिकायतें करने को अपना धन्धा बना लेते है, फिर शिकायतें वापस लेने के नाम पर पैसा ऐंठने लगते है तथा जनता के नाम पर दुकानें चलाते है। ऐसे कुछ लोगों ने भीलवाड़ा जिले में सूचना के अधिकार कानून का भी मखौल बना रखा है, इन्हीं ‘ब्लैकमेलिंग’ करने के आरोपियों के चलते जनता का अधिकार सूचना का अधिकार नाहक बदनाम हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ये आदतन शिकायतकर्ता स्वयं को सूचना का अधिकार कार्यकर्ता भी बताते है, कभी अवैध खनन के खिलाफ संघर्षरत यौद्धा के रूप में तो कभी पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले के रुप में यह व्यक्ति सामने आता है। कभी कभी तो ये स्वयं को क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन ‘‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’’ का कार्यकर्ता भी बताने से नहीं चूकता है, हांलाकि मजदूर किसान शक्ति संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनका सरोकार महज मोगर की जनता और उनके द्वारा ‘वन क्षेत्र की सुरक्षा’ के लिए उठाए गए मुद्दे से है, फिर भी कोई व्यक्ति संगठन के नाम का दुरूपयोग करता है अथवा किसी को धमकाता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
फर्जी शिकायतें, फर्जी लैटरपेड, फर्जी दस्तखत, फर्जी संगठन और फर्जी ही पदों पर बैठकर सम्पूर्ण फर्जीवाड़े में संलग्न रहने वाले लोग जब जनता के रक्षक की भूमिका निभाने लगते है तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है। हांलाकि ऐसे लोगों का एक न एक दिन पर्दाफाश हो जाता है तथा सच्चाई जानने के बाद न तो जनता उनकी बात मानती है और न ही प्रशासन।
खैर, 5 मई 2012 को बदनोर थाने में सुगन मोहम्मद, अब्दुल हनीफ तथा घनश्याम सिकलीघर ने एक इस्तगासे के जरिये मुकदमा दर्ज करवाया कि वे लोग पट्टी फर्जी के पट्टाधारी खननकर्ता है तथा बदनोर गांव के पास स्थित अपनी माइन्स विगत 15 वर्षों से चला रहे है, हाल ही में सुनील कौशिक नामक व्यक्ति स्वयं को इण्डियन नेशनल कांग्रेस का कथित पदाधिकारी बताकर खनन व्यवसायियों को धमकी भरे संदेश भेजता है और बदले में ‘रुपयों की मांग करता है। उस पर 9887611210 मोबाइल नम्बर से धमकी भरे संदेश भेजे जाने का भी आरोप लगाये गये है। प्रकरण के मुताबिक सुनील कौशिक ने खान मालिको को फोन करके धमकाया कि अगर वे 3 लाख रुपए अदा नहीं करेंगे तो उनके विरूद्ध की जाने वाली शिकायतों वह जारी रखेगा और अपनी ऊंची राजनीतिक पहुंच के जरिये वह इन लोगों का धन्धा खत्म कर देगा।
मुकदमें के अनुसार 3 मई 2012 को तो अब्दुल हनीफ को सुनील कौशिक ने 24 घण्टे में रुपए अदा करने को कहा तथा धमकाया कि अन्यथा यह तुम्हारा आखिरी दिन होगा। यह भी धमकी दी कि तुम्हारी माइन्सों को ब्लास्ट करके क्षतिग्रस्त कर दूंगा।
क्षेत्र के खननकर्ताओं के मुताबिक सुनिल कौशिक उन्हें धमकाता है कि अगर तुम्हें माईन्से चलानी है तो प्रतिमाह कमीशन देना पड़ेगा, नहीं तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
धमकी भरे फोन तो लोगों के पास आते ही है, धमकी भरे संदेश (एसएमएस) भी भिजवाये जाते है, सुनील कौशिक के मोबाइल नम्बर 9887611210 से पूर्व सरपंच घनश्याम सिकलीघर के मोबाइल नम्बर 9414114717 पर आये कुछ सन्देशों का मजमून ऐसा है –
गब्बर के संदेश
‘‘गब्बर के ताप से तुमको एक ही आदमी बचा सकता है, और वो है खुद गब्बर।’’
‘‘मुझ पर एक हमला करवाओं ना, प्लीज, मैं कब से इसी इंतजार में हूं . . . और प्रमोद भैया कैसे है ?’’
‘‘मुझे डराया नहीं जा सकता, मुझे धमकाया नहीं जा सकता है केवल मनाया जा सकता है . . .।’’
यह तो बानगी मात्र है, ऐसे ही कई सारे एसएमएस का पुलिन्दा पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को सौंपा गया है तथा ब्लैकमेलिंग करने को धन्धा बना चुके व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई है। उम्मीद है कि भीलवाड़ा जिले में सूचना के अधिकार के नाम पर लोगों को डरा धमका कर चौथ वसूली करने वाले लोगों के विरूद्ध प्रशासन कार्यवाही करेगा ताकि जिले में पनप रहे संगठित अपराध पर लगाम लग सके। इस बारे में खबरकोश के प्रतिनिधि ने सुनील कौशिक का पक्ष भी जानने की कोशिश की मगर मुकदमा दर्ज होने के बाद से कौशिक बदनोर से बाहर है, तथा उनका मोबाइल नम्बर स्विच्ड़ ऑफ मोड पर है, लेकिन कोशिक ओर से शिकायतें करने का काम अभी भी जारी है . . .।
(लेखक – khabarkosh.com के सम्पादक है। उनसे bhanwarmeghwanshi@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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