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आओ सुनाएं, लाचार पीएम की कहानी..!

By   /  September 5, 2012  /  2 Comments

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-दिलीप सिकरवार||

आओ, आप सबको सुनाते हैं एक लाचार पीएम की कहानी. इसमें ना कोई राजा है ना कोई रानी. एक है बड़ा ज्ञानी-ध्यानी. इसमें ‘मन के हारे जीत है, मन के हारे हार.’ कॉमन मैन का मन अजीब होता है परन्तु अपने मन का मन कौन जाने! वो तो मन ही मन कुछ कहता है और सार्वजनिक तौर पर चुप रहता है. कहता है मुझे खामोश रहने दो. मैने कुछ कहा तो भूचाल आ जायेगा. अपनी कहानी किसको सुनाएं, इसलिये चुप रहते हैं.
रे मनवा तू क्यों ना धीर धरे. सब कुछ बीत जायेगा अधीर न हो. हमारे मन के मोहन ने हमारी बात मानी. बस यही से षुरू होती है उनकी कहानी. मन तो मन है. कहते है ना मनमौजी. इसी प्रवृति के चलते अब पानी सर के उपर चला गया है. विदेशियों में आलोचना का केन्द्र बने हुए हैं. अपनी कमजोरी देश के बाहर तक पहुंच गई है. सुना है वहां के खबरनवीसों ने हमारी अच्छी उतारी है. हंसी हो रही है. सब काठ का पुतला और ना जाने क्या क्या कहते जा रहे है.
तारीफ तो इस बात की है कि विदेशी भाइयों ने हिम्मत तो दिखाई. वरना हम तो चापलूसी में कसीदे गढ़ते नही अघाते.
अब जबकि सच लिखा ही जा चुका है तो सोनीया अंटी कहती हैं, अखबार वाले माफी मांगे. उन्होंने सच क्यों लिखा या जो कुछ दबा था, उसे क्यो उजागर कर दिया? सच ही तो है, हम आज भ्रष्टाचारियो में अव्वल माने जा रहे है. रिष्वतखोरी हमारे अंग-अंग में घुस गई है. दलाली जी भर के खाते है. देश का कोई अच्छा-बुरा कार्य बिना किसी स्वार्थ के दलाली लिये नही करते. संसद ठप्प है. हम केवल राजनीति में व्यस्त है. जनता और जनता के पैसों का क्या हो रहा है यह सवाल ही नही पूछा जाता!
काठ का पुतला तो ठीक है, उन्हें मान भी लिया, परन्तु उसकी डोर पता नही किसके हाथों में है. बिना डोर का पुतला भी होता तो समझ आता. देश में अप्रिय स्थिति बन जाये. मगर यह मन है कि चुपचाप देखता-सुनता रहता है. कुछ करता नही है. इससे बड़ी लाचारी क्या होगी.
हद हो गई जी. अब तो सीता को अग्नि परीक्षा देना होगी. बताना होगा कि कोयले की दलाली में कितनों के मुंह और कितनों के हाथ काले है. नही तो सब उस सत्ता को दोश देंगे जो सवोपरि है. सर्वमान्य है. बेदाग है.
आज देखिये ना, हमारी थू-थू हो रही है. हमने हिम्मत तो की थी आपको कहानी सुनाने की किन्तु वो हौसला हममें नही है. हम भला कैसे अपने कपड़े उतारकर नग्नता का प्रदर्शन करें. कैसे बताएं कि वो राजा कोई और नही हमारा मुखिया है. हमारे भारत परिवार का मुखिया.
-लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं एवं आल इंडिया रेडियो से जुड़े है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. AJAY PANDEY says:

    भारत देश का कुछ नही हो सकता | यहाँ की जनता को अत्यचार सहने की आदत हो होगई है बचपन में बाप ,माँ फिर टीचर जॉब में बोस शादी के बाद बीबी हमे गुलामी पसंद है जब रिटायर हो तो बच्चो की गुलामी| अगर हम एक बार साल में देस को अपना ७-८ दिन दे और चोर नेताओ के खिलाफ आन्दोलन करे तो उन्हें अपनी अओकात समझ आ जाएगी में सब स्टुडेंट से कहता हु देस का भविष आप के हाथ में आप लोग जागो और अरविन्द भाई के साथ आगे बढ़ो

  2. mahendra gupta says:

    CHALEGA भाई ऐसा ही चलेगा ,दुनिया चाहे कुछ भी कहे , कहती है तो कहती रहे,जो किया अगर गलत है तो मानेंगे नहीं ,सच है तो स्वीकारेंगे नहीं , हमें अगर चोर मानते हो तो तुम्हे भी चोर बता कर बना कर गद्दी पर रहेंगे एक साल की तो बात है लड़ भीड़ कर आँख पर पट्टी रखकर कान में अंगुली रखकर,मुह पर हाथ रख कर बैठे रहेंगे,क्यों भूलते हो कि कांग्रेस अकेली गांधीवादी है , गाँधी का अनुसरण केवलं एक यही पार्टी कर सकती है ,अगर कोई अन्य करता है तो उसे यह सच होते हुए भी नकार देती है,उन्ही गांधीजी का अनुसरण करते हुए उनकी बात को मानते हुए यह कांग्रेसी यह सब कर रहे हैं —- बुरा मत कहो , बुरा मत सुनो ,बुरा मत देखो ——-कोयला घोटाला हो या यूपी ऐ २ के अन्य घोटाले तुम उन्हें बुरा ही तो मानते हो.

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