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ओंकारेश्वर बांध पर जल समाधी आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता….

By   /  September 11, 2012  /  1 Comment

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विगत 17 दिन से चला आ रहा मात्र ओंकारेश्वर बांध पर घोघल गांव के मात्र 51 ग्राम निवासियों की जल समाधी हर तरह से एक ऐतिहासिक छाप छोड़ गया। इंदिरा सागर डेम को 260 मीटर के ऊपर पानी भरने से डूब क्षेत्र में आये 29 गांव हैं जहां के खेत, घर, आबादी और रास्ते पानी से घिर रहे हैं। सम्बंधित गांवो के लोग उनके पुनर्वास की व्यवस्था किये बगैर डेम का जल स्तर बढ़ाने का घोर विरोध कर रहे थे।
वास्तव में जल समाधी का इस तरह का यह शायद पहला आंदोलन हुआ है जहां 17 दिन तक लगातार नदी में आंदोलनकारी लोग लगभग पानी में डूबे रहे जिससे उनके शरीर गलने लग गया थे। ऐसा आंदोलन शायद ही पूर्व में कही देखने को मिला हो। दूसरा इस आंदोलन में कोई भी नामचीन व्यक्ति सीधा नहीं जुड़ा था। यद्यपि इस आंदोलन के मुद्दे पर पूर्व मे नामचीन नेत्री मेघा पाटकर शामिल हुई थी। मात्र 51 ग्राम वासियो के आंदोलन ने इतना दृढ़-नैतिक दबाव सरकार पर डाला कि सरकार को आंदोलनकारियों की लगभग सभी मांगे अंततः माननी पड़ी जिसमें सबसे मुख्य मांग बांध की उंचाई 189 मीटर तक सीमित करना भी शामिल है। बांध की उंचाई के लिए मेघा पाटकर काफी समय से लम्बी लड़ाई लड़ रही है। अन्ना और बाबा के बड़े जन-आंदोलन के अंततः परिणाम रहित और दिशा भटकने वाले आंदोलन (गैर राजनैतिक से राजनैतिक) होने के बाद यह महसूस किया जाने लगा था कि इस देश में भविष्य में शायद ही कोई जन आंदोलन उठ पाये। जनता की मूलभूत आवश्यक समस्याएं हल करने का वैधानिक एवं संवैधानिक एवं संवैधानिक दायित्व सरकार का होता है जिसे सरकार जब अनसुनी कर देती है तब उसका कोई निराकरण शायद ही कोई आंदोलन से हो पाए। यह धारणा अन्ना के आंदोलन के असफल होने के कारण बलवती होती जा रही थी। इस ‘जल आंदोलन’ ने यह मिथक भी गलत सिद्ध कर दिया है कि आंदोलन के लिए बहुत ‘मुंडियों’ की आवश्यकता होती है। वास्तव में कुछ ‘मुंडिया’ ही यदि निस्वार्थ बिना किसी प्रचार के लिए आडम्बरहीन होकर अपने कानूनी और सामाजिक हक के लिए लड़ते है तो अंततः वे अपनी ओर वृहत समाज, मीडिया और सरकार का ध्यान सफलता पूर्वक खीच लेते है जिसका परिणाम भी सकारात्मक आता है जो उक्त आंदोलन ने सिद्ध किया है। इसलिए ऐसे दृढ़ निश्चयी अपने शरीर को गलाकर कुछ प्राप्ति करने के आशा में लगे निमाड़ के भूमिं की उन जाबाज सत्यागाहियों को मेरा साष्टांग नमन्।
देश ही नहीं समस्त जन आंदोलनकर्ता जल सत्यागाहियो से न केवल प्रेरणा ले बल्कि भविष्य में यदि वे भी देश की, समाज की समस्याओं के लिए आंदोलित होंगे तो उन्हे भी वैसी ही सफलता प्राप्त होगी यह विश्वास करें बशर्ते वही दृढ़ निस्वार्थ प्रचार रहित इच्छा शक्ति हो?

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  • Published: 6 years ago on September 11, 2012
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  • Last Modified: September 11, 2012 @ 10:23 am
  • Filed Under: देश

About the author

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में भारतीय जनसंघ के संस्थापक स्वर्गीय श्री गोवेर्धन दास जी खंडेलवाल, जो कि संविद शासन काल में मंत्री एवं आपातकाल में मीसाबंदी रहे ! जिनके नेतृत्व में न केवल पार्टी का विकास हुआ अपितु बैतूल जिले में प्रगति के जो भी आयाम उभरे उन्हें आज भी जनता भूली नहीं है, के पुत्र हैं राजीव खंडेलवाल, वर्ष १९७९-८० में एलएलबी पास करने के बाद पहले सिविल, क्रिमिनल एवं आयकर, विक्रयकर की वकालत प्रारम्भ की । अब आयकर वाणिज्यकर की ही वकालत करते है। सरकार, समाज और संगठन के विभिन्न जिम्मेदरियो को सम्भालते हुए समाज सेवा के करने के दौरान सामने आने वाली समाज की विभिन्न समश्याओ को जनता एवं सरकार के सामने उठाने का प्रयास करते है.साथ ही पिछले १० वर्षो से देश, समाज के ज्वलंत मुद्दो पर स्वतंत्र लेखन कर रहे है व तत्कालिक मुद्दो पर त्वरित टिप्पणी लिखते है जो दैनिक जागरण, नव भारत, स्वदेश, समय जगत, पीपूल्स समाचार, राष्ट्रीय हिन्दी मेल, अमृत दर्शन समस्त भोपाल, जबलपुर एक्सप्रेस छिन्दवाड़ा, बी.पी.एन. टाईम्स ग्वालियर, प्रतिदिन अमरावती, तीर्थराज टाईम्स इलाहाबाद एवं स्थानीय समाचार पत्र एवं पत्रिकोओं में ओपन आई न्यूज भोपाल, पावन परम्परा नागपुर आदि में छपते रहे है। M : 9425002638 Email:-rajeevakhandelwal@yahoo.co.in

1 Comment

  1. शहीदभगतसिंह जी का जन्म28 सितम्बर, के दिन क्या बालाघाट वासी नगरपालिका परिषद के प्रांगण में रखी शहीदभगतसिंह जी प्रातिमा के साथ न्यायकर पायेगे क्या आने वाली 28 सितम्बर के दिन शहीद भगत सिंह जी की प्रातिमा स्थापित हो जिला चित्किसालय का नामकरण हो पायेगा.

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