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कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी आपातकाल की याद दिला रही है….

By   /  September 10, 2012  /  5 Comments

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अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता पर प्रहार करते हुए रविवार को मशहूर कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को देशद्रोह के आरोप में मुंबई में गिरफ्तार कर लिया और असीम त्रिवेदी को रविवार की पूरी रात मुंबई में बांद्रा के पुलिस लॉकअप में बितानी पड़ी. असीम पर आरोप है कि भ्रष्टाचार विरोधी कार्टूनों से वे देश के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी  की इस गिरफ्तारी को लेकर देश भर के बुद्धिजीवियों में रोष उत्पन्न हो गया है. यही नहीं आज फेसबुक पर तो जैसे कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के साथ हुई अभद्रता और उनकी गिरफ्तारी को लेकर तूफ़ान खड़ा हो गया है. ज्यादातर फेसबुकियंस सरकार के इस तानाशाही रवैये की निंदा कर रहें हैं और मान रहें हैं कि कांग्रेस सरकार ने असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार कर आपातकाल की यादें ताज़ा कर दी हैं.  प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू ने असीम का बचाव करते हुए कहा है कि कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी गलत नहीं किया है. उन्‍होंने कहा, ‘मेरे विचार से कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत सी बातें कहीं जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी गलत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ्तार करना भी एक अपराध है.’सुप्रीम कोर्ट के जज रहे मार्केण्डेय काटजू ने बतौर जज कहे अपने शब्दों को याद करते हुए कहा, ‘मैं अक्सर कहता था कि लोग मुझे कोर्ट या कोर्ट के बाहर बेवकूफ या कुटिल कह सकते हैं, लेकिन मैं कभी भी अदालत की अवमानना का मामला शुरू करने का कदम नहीं उठाऊंगा, क्योंकि आरोप सही होने पर मैं इसी लायक हूं और गलत होने पर मैं उन्हें नजरअंदाज कर दूंगा.’ उन्होंने कहा कि नेताओं को भी यह पाठ सीख ही लेना चाहिए.

भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता और कवि कुमार विश्वास का कहना है कि राष्ट्रीय-प्रतीकों की अस्मिता, संसद में सरेआम लहरतीं नोटों की गड्डियों से, एक दूसरे से सरेआम मारपीट करने से, सांसदों और विधायकों की खरीद-फ़रोख्त से, उच्च-सदनों में बैठ कर पोर्न फिल्म देखने से कभी भंग क्यूँ नहीं होती ? हाँ इन विषयों पर कोई अगर राष्ट्रीय-गुस्से को उकेर भर दे तो उस पर “राष्ट्र-द्रोह” का मुकदमा दर्ज कर के उसे जेल में डाल दो, ये ज़रूर संसदीय है ! माना की हमारे प्रतीक आदरणीय हैं किन्तु क्या

युवा-कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को पुलिस-लॉकअप में बंद करने से, जनता में जाग रहे बेबाक-सवाल और राजनैतिक बिरादरी के प्रति पैदा हुआ देश का अविश्वास खत्म हो जायेगा ? किसी धर्म के पूज्य देवी-देवताओं के अशालीन और कुत्सित नग्न-चित्रों की हिमायत, अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम करने वाले “शाब्दिक-खाड़कू” अब क्यूँ मुह सिले बैठे हैं ? अब क्या सांप सूंघ गया सब को ? मैं असीम के प्रति हो रहे इस अन्याय का विरोध करता हूँ और अभिव्यक्ति की शालीनता युक्त आज़ादी में उस का समर्थन करता हूँ !!!

वहीं एक फेसबुकियन जयेश अग्रवाल बड़ी ही वितृष्णा से अपनी वाल पर लिखते हैं कि “मै देश का आम नागरिक होते हुए ये बताना चाहता हूँ की अगर कार्टून बनाना देशद्रोह है तो फिर उन नेताओ को तो फ़ासी होनी चाहिए जो किसी महिला का रेप करते है किसी का क़त्ल करवा देते है और संसद के अन्दर नोटों भरा बैग उछालते है संसद के अन्दर हाथापाई करते है और उन्हें सरकार बाइज्ज़त सम्मान देती है। अंग्रेजो से आजादी के बाद सबने आज़ाद देश का सपना देखा था पर हालत इतने बदतर हों जायेंगे इसकी कल्पना भी नहीं की गयी थी की एक तरफ जो देश को नोच नोच के खा रहे है लाखोँ करोड़ तक के घोटालो ने देश को खोखला कर दिया अगर उन गिद्धों का कार्टून बनाया गया तो यह कहाँ से गलत है वो गोलिया चलाते रहेँ घोटाले करते रहेँ और हम अपनी आवाज भी न उठायेँ और अगर आवाज उठायेँ तो हम पर राजद्रोह लगा दिया जाए.”

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अमित कतर्नये ने दिसंबर में त्रिवेदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. इसमें कहा था कि पिछले साल अन्ना हजारे की रैली के दौरान त्रिवेदी ने बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स में संविधान का मखौल उड़ाते हुए बैनर लगाए थे. उन्होंने अपनी वेबसाइट पर भी आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की. त्रिवेदी पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप है. उन्‍हें देशद्रोह के आरोप में आईपीसी की धारा 124ए के तहत गिरफ्तार किया गया. इसके अलावा आईटी एक्ट की धाराओं में भी मामला दर्ज किया गया है. कोर्ट ने पिछले माह त्रिवेदी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था.

ताज़ा समाचारों के अनुसार अब मुंबई पुलिस बैकफुट पर आ गई है और उसने कहा है कि उसकी जाँच पूरी हो चुकी है तथा अब वह असीम त्रिवेदी के लिए पुलिस रिमांड  सरेंडर कर देगी. बांद्रा पुलिस द्वारा कार्टूनिस्‍ट असीम त्रिवेदी को बांद्रा कोर्ट में पेश किया गया और कोर्ट से कहा कि अब असीम त्रिवेदी की जाँच पूरी हो जाने से उसके पुलिस रिमांड की जरूरत नहीं है. इस पर बांद्रा कोर्ट ने उन्हें 24 सितम्बर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

उधर असीम त्रिवेदी ने घोषणा की है कि वे जमानत नहीं करवाएंगे और ना ही कोई वकील करेंगे. असीम त्रिवेदी ने कहा कि “सच कहने से कोई देशद्रोही होता है तो मैं देशद्रोही हूँ. मैंने वही अभिव्यक्त किया जो मैंने समाज में और देश में देखा और यह कोई अपराध नहीं है.”

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. bilkul, wakai, isme koi sak nahi, sarkar ne bewajah aapni fajihat karwa li.

  2. Suman Chugh says:

    1. yes theek hai ki hume hamare rashtriye chinhon ka sammaan karna chahiye..lekin agar kahi aisa ghatata hai to sarkar ko iski sazza dene ki apeksha iske karno per vichar karna chahiye aur sudhar ki taraf kadam barrane chahiye 2.agar yes cartoon galat hai aur asim trivedi per raj droh ka kes banata hai to sabhi sansad sadasyon per usse pahle roj droh ka kes banata hai kyoki unhone na to sansad ki garima bacha ker rakhi hai aur na desh ki izzat.

  3. Javed Khan says:

    बधाई भाई! असीम तुम्हे असीम बधाइयां…….
    चाहे दुर्दांत आंतकवादियों को आम माफ़ी दिलाने पर सहमती बनाएं ,
    चाहे सीमा पार आतंकवादियों को उनके घरों तक सुरक्षित छोड़ कर आयें ,
    चाहे देश पर जान निछावर करने वाले शहीद सिपाहियों के कफ़न तक बेच खाएं ,
    चाहे घोटालों में देश के राजस्व को करोड़ों अरबों का घोटाला दलाली में खा जाएँ ,
    चाहे अपनी सुविधाएं ,वेतन बढाने को एक स्वर में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पुरे चाँद में पुआल पर लौट लगाए ,
    चाहे अपने गुणगान करने वाले कलमकारों को विभिन्न समितियों और कलाकेंद्रों का अध्यक्ष बनाएं ,
    सिर्फ एक विधा ऐसी बची हैं जिसमे एडिटर की एडीटिंग नहीं चलती न संपादक की रोक टोक ,
    और सीधे जनता के दिल की आवाज़ कुची से बयान होती है ,
    रस्सी नहीं आतंकवादियों को लटकाने की पर हिम्मत है कार्टूनिस्ट को बंदी बनाने की ,
    javed ahmed shah khan AL- HINDI.

  4. Manish Khattry says:

    सांसद और मुंबई पर हमले की साजिश करने वालों को क्या ये सरकार कभी फांसी देगी? मतलब जो भी इस सरकार या उसकी गतिविधियों के खिलाफ हुआ वो ही देशद्रोही और आतंकवादी.. बाकी सब परम आदरणीय… लानत है मुझपे और इस देश की जनता पर जो इतना सब होने के बावजूद 'मौन प्रधानमंत्री' का अनुशरण कर चुप बैठी है..

  5. Arun Kumar says:

    प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू ने असीम का बचाव करते हुए कहा है कि कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी गलत नहीं किया है. उन्‍होंने कहा, ‘मेरे विचार से कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत सी बातें कहीं जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी गलत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ्तार करना भी एक अपराध है.’
    जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने यह बयान देकर प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के रुख को स्पस्ट कर दिया है कि प्रेस कौंसिल अपने संवैधानिक दायित्व के प्रति बहुत ही सजग है. अभी हाल ही में २७ अगस्त को प्रेस कौंसिल ने सोसल मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया को भी प्रेस कौंसिल के दायरे में लाने और प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया का नाम बदल कर मीडिया कौंसिल ऑफ़ इंडिया करने का एक प्रस्ताव पारित किया था. उसके बाद इस तरह की घटना से गलत संदेश जा सकता था.
    प्रेस कौंसिल के इस प्रस्ताव का अर्थ मीडिया पर कंट्रोल नहीं नियमन है जिसके तहत संवैधानिक दायरे में रहकर किसी की वैधानिक आलोचना के हक की रक्षा करना है न कि मीडिया पर नियन्त्रण. मैं जस्टिस मार्कंडेय काटजू के इस कदम की सराहना करता हूँ और मुंबई पुलिस की इस तानाशाही कार्रवाई की पुरजोर निंदा करते हुए ऐसी हरकतों का सख्त से सख्त विरोध दर्ज़ करता हूँ.

    अरुण कुमार
    सदस्य
    भारतीय प्रेस परिषद

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