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पर्यटन व्यवसाय दलालों ने जैसलमेर का पर्यटन उद्योग ख़त्म किया

By   /  September 12, 2012  /  No Comments

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-चन्दन भाटी||

जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान की पर्यटन नगरी जैसलमेर में पर्यटक  की घटती संख्या ने पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को चिंता में डाल दिया हें ,जयपुर और दिल्ली में बैठे पर्यटन से जुड़े सम्बंधित टूर ट्रेवल्स कंपनियों द्वारा दलाली और कमीशन की राशि अत्यधिक बढ़ा देने से टूर  पैकेज महंगे हो गए जिसके कारण भी विदेशी जैसलमेर आना पसंद नहीं कर रहे, दलालों के कारण  राजस्थान में मरुस्थली इलाकों में पर्यटन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. विदेशी सैलानियों  के टूर पैकेज पर बड़ी ट्रेवल कम्पनियों को जैसलमेर में मुह्मांगा कमीशन नहीं मिलने के कारण इस व्यवसाय से जुड़े एजेंट ग्रुप जैसलमेर भेजने में कोई रूचि नहीं  दिखा रहे .

थार पर्यटन के लिए प्रसिद्ध जैसलमेर जिले में इस वर्ष देसी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में खासी कमी आने की आशंका है. हालांकि कहा जा रहा है कि पर्यटकों की संख्या घटने का प्रमुख कारण यहां बहुतायत में लगाई गई पवन ऊर्जा मिलें है.

जैसलमेर में वर्ष 2011 में कुल 2 लाख 98 हजार 891 देसी पर्यटक और 1 लाख 25 हजार 958 विदेशी पर्यटक आए थे जबकि वर्ष 2012 में जनवरी से जुलाई तक केवल 56 हजार 958 देसी और 35 हजार 823 विदेशी पर्यटक आए. जैसलमेर के पर्यटन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस वर्ष घरेलू पर्यटकों की संख्या में 60 फीसदी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में 40 फीसदी की कमी आ सकती है.

जैसलमेर की सत्यम ट्यूर्स एंड ट्रैवल्स के डायरेक्टर शैतान सिंह देवड़ा  का कहना है कि जैसलमेर में पिछले पांच सालों में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और पर्यटन यहां के लोगों के लिए प्रमुख व्यवसाय बन गया था, लेकिन इस वर्ष पर्यटकों की संख्या में कमी का अनुमान है. इस साल जैसलमेर में पर्यटकों की की संख्या बढऩे के आसार कम ही हैं.

जैसलमेर लोकेशन के प्रदीप गौड़  का कहना है कि पर्यटकों की संख्या बढऩे से जैसलमेर के लोगों को नया रोजगार क्षेत्र मिल गया था. मेंहदीरत्ता का कहना है कि वैश्विक मंदी जैसलमेर में पर्यटकों की संख्या और घटाएगी.
गौरतलब है कि राजस्थान का रेगिस्तानी जिला जैसलमेर हेरिटेज थार पर्यटन और सम के धौरों के लिए  विश्व के पर्यटन नक्शे पर एक खास जगह रखता है मगर बड़ी ट्रेवल कम्पनियां कम कमीशन के कारण पर्यटकों  को जैसलमेर के पैकेज उपलब्ध करने में संकोच कर रही हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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