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जाट को चमार बताकर करवाई जमीन की रजिस्ट्री…

By   /  September 12, 2012  /  1 Comment

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-लखन सालवी||
‘‘देश भर में सवर्ण जाति के लोग दलितों की जमीनों को छीनने में लगे है। भीलवाड़ा जिले की हुरड़ा तहसील के परड़ोदास गांव के एक दलित व्यक्ति की जमीन को एक जाट ने चमार बनकर अपने नाम करवा ली। महिपाल व गोपाल जाट ने घीसाराम की जमीन गिरवी रखने का स्टाम्प लिखने की बजाए जमीन विक्रय करने का स्टाम्प लिखवाया और अनपढ़ घीसा व उसके परिवारजनों के हस्ताक्षर करवा लिये। वर्तमान में उस जमीन पर महिपाल व गोपाल जाट ने कब्जा कर रखा है और खेती कर रहे है। जबकि दलित घीसाराम पिछले एक साल से सभी प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजें खड़खड़ाता रहा है, उसने सत्तापक्ष व विपक्ष के जनप्रतिनिधियों से भी मदद मांगी है लेकिन फिलहाल उसे कहीं से कोई राहत नहीं मिली है। कांग्रेस के उपजिला प्रमुख गजमल जाट पर आरोप लगाते हुए घीसाराम का कहना है कि उपजिला प्रमुख गजमल जाट मेरी जमीन को हड़पने वालों की मदद कर रहे है।’’
जानकारी के अनुसार परड़ोदास गांव में घीसा बलाई व उसके परिवारजनों के नाम 12 बीघा 3 बिस्वा कृषि भूमि स्थित है जिसकी आराजी संख्या 1548, 1549, 1552, 1553 व 1554 है। सन् 1998 में इन सभी सह खातेदारों को 30 हजार रुपयों की आवश्यकता पड़ी तो इन्होंने अपनी जमीन में से 5 बीघा जमीन को गिरवी रखकर रुपए लेने का निर्णय लिया। जमीन गिरवी रखने के लिए इन्होंने अपनी ही जाति के राम लाल बलाई को कहा। राम लाल ने परड़ोदास निवासी महावीर जाट को इनसे मिलवाया। महावीर जाट व रामलाल बलाई ने योजनाबद्ध तरीके से विजयपुर निवासी गोपाल जाट को घीसाराम के पास भेजा। गोपाल जाट ने अपने आप को गोपाल चमार बताया और घीसाराम की 5 बीघा जमीन को गिरवी रखने को तैयार हो गया। उसने 30 हजार रुपए देकर 5 बीघा जमीन को गिरवी रख ली।
सन् 2011 में घीसा बलाई अपने सभी सहखातेदारों की राय से गिरवी पड़ी जमीन को छुडाने के लिए गया। उसने राम लाल को कहा कि वो गिरवी पड़ी 5 बीघा जमीन को साथ चलकर छुडवावे। राम लाल कई दिनों तक घीसाराम को टालता गया। राम लाल टालता रहा तो तो घीसाराम को शंका हुई। उसने जमीन की नकल निकलवा कर देखा तो उसके पांव तले से जमीन खिसक गई। उसकी जमीन बनेड़ा तहसील के विजयपुर निवासी गोपाल चमार के नाम दर्ज हो चुकी थी।
उसने अपने सभी सहखातेदारों को धोखाधड़ी हो जाने की बात बताई। उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री की नकल निकलवाई। जमीन की रजिस्ट्री विजयपुर निवासी गोपाल पिता भागीरथ चमार के नाम थी। घीसाराम बलाई का कहना है कि ‘‘महावीर जाट ने जमीन का गिरवीनामा लिखवाने की बजाए हमसे स्टाम्प में अपने मामा के बेटे गोपाल जाट (गोपाल चमार) के नाम जमीन का विक्रय पत्र लिखवा दिया। हम सभी सहखातेदार अनपढ़ है। महावीर जाट ने गिरवीनामें पर हस्ताक्षर करवाने की बात कहकर हमसे विक्रय पत्र हस्ताक्षर करवा लिये।’’
तब घीसाराम ने महावीर जाट व गोपाल चमार व गोपाल जाट के खिलाफ गुलाबपुरा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई लेकिन पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते कोई कार्यवाही नहीं की। घीसाराम ने पुलिस अधीक्षक व पुलिस महानिरीक्षक को ज्ञापन भेजे लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। उसके बाद घीसाराम ने न्यायालय की शरण ली और गोपाल जाट के खिलाफ वाद प्रस्तुत किया।

विजयपुर में नहीं है कोई गोपाल चमार
विजयपुर में गोपाल पिता भागीरथ चमार नाम को कोई शख्स है ही नहीं। महावीर जाट ने फर्जी नाम  (गोपाल पिता भागीरथ चमार) पर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली। ठगी के शिकार हुए परड़ोदास के घीसा बलाई व उसके सहखातेदारों ने रजिस्ट्री पर चस्पा फोटो के आधार पर जांच पड़ताल की तो पता चला कि वो फोटो महावीर जाट के विजयपुर निवासी मामा के बेटे गोपाल पिता बालुराम जाट का है।
इसलिए बना चमार
अनुसूचित जाति की कृषि जमीन का हस्तान्तरण अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम पर ही हो सकता है। घीसा बलाई अनुसूचित जाति के है, ऐसे में उनकी संयुक्त खातेदारी वाली जमीन सवर्ण जाति के व्यक्ति के नाम पर हस्तान्तरित नहीं हो सकती थी। इसलिए महावीर जाट ने योजनाबद्ध तरीके से बनेड़ा तहसील के विजयपुर निवासी अपने मामा के बेटे गोपाल पिता बालुराम जाट की फोटो लगाकर उसे गोपाल पिता भागीरथ चमार बताकर घीसा बलाई की संयुक्त खातेदारी वाली 5 बीघा जमीन को उसके नाम पर करवा दी।
जमीन बेची नहीं, गिरवी रखी रखी थी
‘‘घीसाराम ने 30000 रुपए में अपनी 5 बीघा जमीन गोपाल चमार (गोपाल जाट) के गिरवी रखी थी। हमारे सामने गोपाल ने घीसाराम को 15000 रुपए दिए। बाकी के 15000 रुपए गिरवीनामा लिखवाने पर तहसील में ही देने की बात की थी। जो गिरवीनामा लिखवाने के दौरान गोपाल ने घीसाराम को दे दिए।’’ ये कहना है गढ़वालों का खेड़ा के जगदीश जाट व ईश्वर जाट का।
ईश्वर जाट व जगदीश जाट ने न्यायालय में भी इस आशय के बयान दिए है। उनका कहना है कि गोपाल जाट ने अपने आपको गोपाल चमार बताकर तथा धोखाधड़ी से घीसाराम की जमीन को अपने नाम करवा दिया।

उपजिला प्रमुख कर रहे है दलित विरोधियों की मदद
घीसाराम बलाई ने गुलाबपुरा पुलिस थाने में दिसम्बर-2012 में महावीर जाट के खिलाफ रिपोर्ट दी। लेकिन पुलिस ने महावीर जाट के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। 14 दिसम्बर को घीसाराम ने पुलिस थाना गुलाबपुरा के खिलाफ शिकायत की और पुलिस अधीक्षक से महावीर जाट के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की। लेकिन जब कहीं से राहत ना मिली तो घीसाराम ने 2 जनवरी 2012 को गुलाबपुरा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में इस्तगासा पेश किया। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 406, 467, 465, 468 व 471 के तहत एफआईआर (45/12) दर्ज कर कार्यवाही शुरू की।
घीसाराम ने बताया कि गुलाबपुरा पुलिस उप जिला प्रमुख के दबाव में रही। थाने में महावीर जाट के खिलाफ दी गई रिपोर्ट पर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। घीसाराम ने पुलिस महानिरीक्षक को लिखे पत्र में बताया कि उप जिला प्रमुख तथा महावीर जाट के सहयोगी उसे जान से मारने की धमकियां दे रहे है। बहरहाल मामला गुलाबपुरा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में विचाराधीन है। वहीं जमीन पर महावीर जाट ने कब्जा कर रखा है और वो खेती कर रहा है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Kunwar Sen says:

    inhe chamaro ka sb kuch achha lgta h sivay smmaan ke.

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