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टेट अनुतीर्ण बन गए शिक्षक…!

By   /  September 14, 2012  /  No Comments

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-चन्दन भाटी||
 
बाड़मेर। तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के द्वितीय लेवल के प्रश्न पत्र में ऎसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का मामला प्रकाश में आया है जिन्होंने टेट भी उत्तीर्ण नहीं की। मामला सामने आने के बाद जिला परिषद ने एक अभ्यर्थी के दस्तावेज वापस मंगाते हुए उसकी नियुक्ति प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए।

जिला परिषद बाड़मेर को 55 प्रतिशत से कम अंक वालों को नियुक्ति नहीं देने के उच्च न्यायालय के आदेशों की खबर होने के बावजूद “बैकडेट” में कार्रवाई कर नियुक्ति की। विकास अधिकारियों ने भी ऎसा ही किया। आनन फानन में कई नियुक्तियां अब सवालों के घेरे में है। गुरूवार को ऎसे मामले प्रकाश में आए है। एक अभ्यर्थी के आरटेट में 55 अंक ही आए और नियुक्ति दे दी। यह अभ्यर्थी आरटेट उत्तीर्ण भी नहीं है। जबकि नियमानुसार 75 अंक होने चाहिए। एक अन्य मामले में 71 व दूसरे को 74 अंक पर नियुक्ति मिल गई।

श्रेणी बदलने का मामला- बाड़मेर पंचायत समिति में एक महिला अभ्यर्थी ओबीसी वर्ग से है। इसको एसबीसी विधवा वर्ग में मानते हुए नियुक्ति देने की शिकायत मिली।

आनन फानन में जांच- जिला परिषद के पास 2157 पदों की नियुक्ति का मामला था। पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बाहरी राज्यों से बीएड करने वाले 526 लोगों को नियुक्ति नहीं देने का निर्णय किया। बाद में इनको नियुक्ति दे दी। उच्च न्यायालय ने 55 प्रतिशत से कम अंकों से आरटेट करने वालों को नियुक्ति नहीं देने के आदेश किए। यह आदेश 10 सितम्बर को हुए और 10 सितंबर को जिला परिषद की स्थापना समिति में इसका अनुमोदन होना था। बावजूद पंचायत समितियों को सूची दी और नियुक्ति आदेश निकाल दिए।

ऎसा हो सकता है- एक मामला तो सामने आया है। दस्तावेजों की जांच में समय की कमी होने पर रिमार्क नहीं किया। इससे ऎसा हो सकता है। शिकायतों पर गौर किया जाएगा। दस्तावेज वापस मंगाए है।
– चतुर्भुज सोनी, प्रभारी तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा
जांच होगी- मामलों की जानकारी ली जाएगी। कोई त्रुटि हुई है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है।

– मदनकौर, जिला प्रमुख

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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