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सेक्सी च स्लिम एपल

By   /  September 14, 2012  /  1 Comment

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– आलोक पुराणिक||

जलवा है साहब, हॉट सेलिब्रिटीज के फोटू जहां छपते हैं, उन कॉलमों में ऐपल आईफोन-5 के फोटू छप रहे हैं। स्लिम, हॉट, सेक्सी जैसे विशेषणों के साथ। ऐपल और सेक्स (इसी क्रम में) ने बहुत मार मचाई है साहब। आदम और हव्वा ने ईडन गार्डन में ऐपल खाकर दुनिया नामक जो बवाल शुरू किया वो तो सतत चलायमान है।

और फिर इत्ते ऐपल, कित्ते एपल – ऐपल आईफोन, ऐपल आईपॉड, ऐपल लैपटॉप, ऐपल आईफोन, इत्ते ऐपल हैं कि रोज ऐपल लिए जाओ, फिर भी लेना चलता रहे। ऐन ऐपल अ डे, फिर ले ऐपल नेक्स्ट डे। फिर पता चले आपने तो ऐपल आईफोन-4 लिया था, अब 5 लॉन्च हो लिया है। फिर से ऐन ऐपल अ डे। ये ऐपल आईफोन जितना पॉप्युलर हुआ है, उसे देखकर मुझे लगता है कि कुछेक बरस बाद आदम और हव्वा की बेसिक स्टोरी बदल जाएगी। अलबत्ता झगड़े की वजह के तौर पर ऐपल ही चिह्मित होगा।

नई स्टोरी यूं बनेगी कि हव्वा ने आदम के ऐपल आईफोन के विडियो सेक्शन, फोटो सेक्शन में आदम को ऐसे-ऐसे पोज में देखा कि चाऊं-चाऊं हो गई। फिर आदम के आईफोन की असीमित मेसेज सेविंग कैपेसिटी के कारण आठ लाख मेसेज भी आईफोन में जमा थे। इन मेसेजों को देखने के बाद तो आदम हव्वा में वो हुई ना कि बाकियों ने कहा कि लो अपना ऐपल आईफोन और तुम दोनों निकलो बाहर यहां से।

ऐपल की वजह से आदम और हव्वा जन्नत से बाहर आ लिए। खैर, जी मैं नहीं खरीद रहा हूं ऐपल आईफोन-5 जो लॉन्च हुआ है परसों। जी मैं आईफोन सेवन या एट या ट्वेंटी खरीदूंगा। जल्दी आ जाएगा आईफोन-7 भी। बस यही कहकर इज्जत बच रही है। आईफोन-5 के नाम पर जो नक्शेबाजी काट रहा हो, उसे ऐसे ही ट्रीट कीजिए। ऐपल वालों को ये हुनर हासिल है कि उनके ग्राहक अपने चलते-फिरते पुराने आईफोन को नए लॉन्च के बाद कबाड़ मानने लगते हैं। अपना ही पुराना आईफोन बंदा ऐसे छिपाकर यूज करता है, मानो चोरी का हो।

पर ये भी जरूरी है, तब ही तो ‘ऐन ऐपल अ डे’ होगा।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. बिलकुल सही है, मैं भी एपल आईफ़ोन 8 का इंतजार कर रहा हूँ. आइफोने 5 में जो फीचर्स है, मुझे ये कुछ खास नहीं लगे. (यही केहकर अपने पैसे बचा रहा हूँ.)

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